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SC: नौसेना में कैप्टन रैंक से वंचित महिला अधिकारियों की याचिका, SC ने कहा- राहत के लिए AFT का रुख करें

Wed, 04 Dec 2024 10:49 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Wed, 04 Dec 2024 10:49 PM IST
सार

महिला अधिकारियों की ओर से पेश वकील ने कहा कि 17 मार्च, 2020 को शीर्ष अदालत के फैसले में कहा गया था कि पदोन्नति समेत परिणामी लाभ संबंधित अधिकारियों को दिए जाएं, लेकिन वह नहीं दिया गया। पीठ ने कहा कि यदि यह अदालत के निर्देशों का अनुपालन न करने का मामला है, तो इसमें एक अवमानना याचिका दायर किये जाने की जरूरत होती है।

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SC asks women officers denied captain rank in Navy to approach AFT, News in hindi
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

उच्चतम न्यायालय ने भारतीय नौसेना में 'शॉर्ट सर्विस कमीशन' (एसएससी) महिला अधिकारियों से बुधवार को कहा कि वे कैप्टन रैंक पर परिणामी पदोन्नति समेत अन्य राहत के लिए सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) का रुख करें। मामले में न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि पदोन्नति मुद्दे को लेकर सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) की तरफ से व्यक्तिगत मामलों के आधार पर गहराई से विचार करने की आवश्यकता है। पीठ ने कहा कि यह मुद्दा महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने संबंधी शीर्ष अदालत के 17 मार्च, 2020 के फैसले के बाद उठा है।
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एक दशक से अधिक समय से लंबित है पदोन्नति
पीठ ने महिला अधिकारियों को अपनी दलीलों के साथ एएफटी का रुख करने की स्वतंत्रता दी और न्यायाधिकरण को चार महीने के भीतर उनकी याचिकाओं का निपटारा करने का निर्देश दिया क्योंकि इन अधिकारियों की पदोन्नति का मुद्दा एक दशक से अधिक समय से लंबित है।
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मामले में अवमानना याचिका दायर किए जाने की जरूरत- कोर्ट
वहीं मामले की सुनवाई के दौरान महिला अधिकारियों की ओर से पेश वकील ने कहा कि 17 मार्च, 2020 को शीर्ष अदालत के फैसले में कहा गया था कि पदोन्नति समेत परिणामी लाभ संबंधित अधिकारियों को दिए जाएं, लेकिन वह नहीं दिया गया। पीठ ने कहा कि यदि यह अदालत के निर्देशों का अनुपालन न करने का मामला है, तो इसमें एक अवमानना याचिका दायर किये जाने की जरूरत होती है, न कि एक विविध याचिका, जो इन अधिकारियों ने दायर की है।
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वकील ने कहा कि भारतीय सेना में महिला अधिकारियों की तरफ से इसी तरह का एक विविध आवेदन दायर किया गया था और शीर्ष अदालत ने उन अधिकारियों को राहत दी थी, जिनका मामला इसी तरह का था।


'कुछ ऐसे मामले भी हैं जो मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं'
केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि 2020 के फैसले के बाद, रक्षा बल स्थायी कमीशन दे रहे थे, लेकिन यह पिछले तीन वर्षों से लंबित था। उन्होंने कहा, 'कुछ ऐसे मामले भी हैं जो मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं। अगर वे पदोन्नति या स्थायी कमीशन न दिए जाने के आदेश से व्यथित हैं, तो वे एएफटी से संपर्क कर सकते हैं।'
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