Satya Pal Malik: पूर्व गर्वनर के बयानों से विपक्ष को मिला बड़ा मुद्दा, CRPF को लेकर कांग्रेस ने दागे कई सवाल
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
जम्मू-कश्मीर सहित चार प्रदेशों के राज्यपाल रहे 'सत्यपाल मलिक', जिनकी छवि एक 'दबंग' जाट नेता के तौर पर रही है, ने अपने 'बेबाक अंदाज' से 'विपक्ष' के हाथ में बड़ा मुद्दा थमा दिया है। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में सत्ता पक्ष के साथ उलझ रहे 'विपक्ष' ने भी सत्यपाल मलिक के बयान को हाथोंहाथ लेने में देर नहीं लगाई। शुक्रवार को जैसे ही एक साक्षात्कार में 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले को लेकर सत्यपाल मलिक का बयान वायरल हुआ, वैसे ही विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया। राहुल गांधी ने साक्षात्कार वाली खबर को टैग कर अपने ट्वीट में लिखा, 'प्रधानमंत्री जी को corruption से कोई बहुत नफरत नहीं है।' आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने लिखा, ये विस्फोटक खुलासा है, मोदी ने तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मालिक को खुद मजबूर किया कि दलाल से मिलो। शनिवार को कांग्रेस पार्टी ने लगभग साढ़े चार मिनट का एक वीडियो जारी कर दिया। इसमें सीआरपीएफ, पुलवामा हमले के सीन और सत्यपाल मलिक का साक्षात्कार दिखाया गया है।
यह भी पढ़ें: Defamation Notice: सत्यपाल मलिक की बढ़ सकती हैं मुश्किलें; राम माधव ने भेजा मानहानि का नोटिस
गृह मंत्रालय की 'अक्षमता और लापरवाही' का नतीजा
2019 में लोकसभा चुनाव से पहले 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमला हुआ था। उस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। सत्यपाल मलिक, उस वक्त जम्मू कश्मीर के राज्यपाल थे। उन्होंने अपने साक्षात्कार में कहा, प्रधानमंत्री को कश्मीर के बारे में 'गलत जानकारी' है। वे वहां से 'अनभिज्ञ' हैं। सत्यपाल मलिक ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा, केंद्रीय गृह मंत्रालय की चूक के कारण फरवरी 2019 में पुलवामा में जवानों पर घातक हमला हुआ, मुझे (सत्यपाल मलिक) उसके बारे में बोलने से मना किया था। सत्यपाल मलिक ने कहा, सीआरपीएफ ने एयरक्रॉफ्ट की मांग की थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विमान देने से इनकार कर दिया था। सड़क मार्ग पर प्रभावी ढंग से सुरक्षा इंतजाम नहीं थे। वह हमला गृह मंत्रालय की 'अक्षमता और लापरवाही' का नतीजा था। उस समय राजनाथ सिंह गृह मंत्री थे। मलिक ने कहा, उन्होंने इन सभी चूकों को प्रधानमंत्री के समक्ष उठाया। पुलवामा हमले के दौरान प्रधानमंत्री कॉर्बेट पार्क चल रही एक शूटिंग में बिजी थे। जब पीएम से बात हुई तो उन्होंने इस बारे में चुप रहने और किसी को न बताने के लिए कहा था। एनएसए अजीत डोभाल ने भी उन्हें चुप रहने और इस बारे में बात न करने के लिए कहा। मलिक ने कहा, उन्हें फौरन एहसास हुआ कि यहां इरादा पाकिस्तान पर दोष मढ़ना और सरकार और भाजपा के लिए चुनावी फायदा पाना था।
कांग्रेस पार्टी ने भी जारी कर दिया वीडियो
कांग्रेस पार्टी द्वारा सत्यपाल मलिक के खुलासे को कर्नाटक चुनाव एवं उसके बाद होने वाले दूसरे राज्यों के विधानसभा चुनाव में भुनाया जाएगा। इसके अलावा 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस एवं दूसरे विपक्षी दल, मलिक के बयान को जनता के बीच लेकर जाएंगे। शनिवार को कांग्रेस पार्टी ने साढ़े चार मिनट का वीडियो जारी कर दिया। इसमें सीआरपीएफ, पुलवामा हमला और सत्यपाल मलिक का जिक्र किया गया है। मलिक ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के आसपास के लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उन्होंने यह बात प्रधानमंत्री को बताई थी। उन्हें इसकी कोई परवाह नहीं थी। मलिक ने कहा, 'मैं सुरक्षित रूप से कह सकता हूं कि प्रधानमंत्री को भ्रष्टाचार से बहुत नफरत नहीं है।' इस बात पर कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा, प्रधानमंत्री को भ्रष्टाचार से कोई बहुत नफरत नहीं है। इसके बाद कांग्रेस पार्टी के ट्वीट में लिखा था, हमारे देश के जवानों ने सुरक्षित यात्रा के लिए सिर्फ पांच एयरक्राफ्ट मांगे थे। मोदी सरकार ने साफ मना कर दिया। मजबूरन उन्हें बस से सफर करना पड़ा। रास्ते में आतंकी हमला हुआ और हमारे 40 जवान शहीद हो गए। जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने जब पीएम मोदी से कहा- ये हमारी गलती से हुआ है। जानते हैं पीएम मोदी ने क्या कहा?, प्रधानमंत्री ने कहा- 'तुम अभी चुप रहो। इनकी गलती की वजह से हमारे देश के जवान शहीद हो गए। प्रधानमंत्री अपनी छवि बचाने में लगे रहे।
दूसरे विपक्षी दलों ने भी साधा भाजपा पर निशाना
दिल्ली में सीएम अरविंद केजरीवाल को शराब मामले में सीबीआई ने पूछताछ के लिए बुलाया है। इस पर आम आदमी पार्टी आग बबूला है। आप सांसद संजय सिंह ने सत्यपाल मलिक के साक्षात्कार का वीडियो अपने ट्वीट पर साझा करते हुए लिखा, विस्फोटक खुलासा। मोदी ने खुद मजबूर किया कि राज्यपाल सत्यपाल मालिक, दलाल से मिलें। पीएमओ के मंत्री जितेंद्र सिंह भी पीएमओ का नाम लेकर दलाली करते हैं। गोवा का सीएम टैक्सी वालों से भी वसूली करता है। मैंने शिकायत की तो मेरा ही तबादला कर दिया। मोदी को करप्शन से नफरत नहीं है। संजय राउत, शिवसेना (उद्धव ठाकरे) नेता ने कहा, 'सत्यपाल मलिक, विस्फोटक सत्य सामने लाए हैं। जो पुलवामा विस्फोट से भी अधिक विस्फोटक है, लेकिन यह कोई नई बात नहीं है। उस समय लोगों को पता था कि राजनीतिक लाभ के लिए भारत-पाकिस्तान की किसी घटना को गढ़ा जाएगा। क्या चुनाव जीतने के उद्देश्य से किया गया आतंकी हमला। क्या राजनीतिक फायदे के लिए 40 जवानों को मरवाने की साजिश थी। हम 'विपक्ष' ने उस समय बार-बार इस तरह के सवाल पूछने की कोशिश की थी, लेकिन सत्ता पक्ष द्वारा चुप करा दिया गया और 'देशद्रोही' करार दिया गया।
यह भी पढ़ें: Sena Bharti: पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अग्निपथ योजना को बताया बेहद खतरनाक, सरकार से कर दी यह मांग
मलिक पहले भी खोल चुके हैं पोल: कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी नेता पवन खेड़ा और सुप्रिया श्रीनेत ने शनिवार को एक प्रेसवार्ता में कहा, हाल ही में हमने खुलासा किया था कि तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक, जो कि एक संवैधानिक पद पर आसीन थे, उन्होंने बेबाकी से आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी और भाजपा के मौजूदा राष्ट्रीय महासचिव, राम माधव को लेकर बड़ी बात कही थी। सत्यपाल मलिक ने उनका नाम लेकर बताया था कि किस तरह वो सुबह 7 बजे उनके पास पहुंचकर दो फाइलें मंज़ूर करने की कवायद करते हैं। इन डीलों में 300 करोड़ की रिश्वत की बात थी। यह बात सत्यपाल ने खुद कही है कि ये 'आम धारणा थी'। अब वही बात मलिक ने अपने इस इंटरव्यू में फिर से दोहराई है। अक्तूबर 2021 में एक टीवी इंटरव्यू में सत्यपाल मलिक ने गोवा की भाजपा सरकार की पोल खोली थी। उन्होंने विवरण दिया था कि गोवा सरकार ने बेसिक एसेंशियल्स को ओपन में बेचने की अनुमति नहीं दी थी, लेकिन एक कंपनी को बेसिक एसेंशियल्स को घर-घर बेचने की अनुमति दी थी। जिस कंपनी ने गोवा सरकार को पैसा दिया था, उसे इजाजत मिल गई। उन्होंने ये भी बताया था कि किस तरह गोवा सरकार ने कोरोना महामारी के दौरान खनन ट्रकों को अवैध रूप से माइनिंग करने की अनुमति दी थी। उस वजह से गोवा में कोरोना फैला था।
कांग्रेस पार्टी ने जारी की ज्वलंत सवालों की सूची
कांग्रेस पार्टी के दोनों नेताओं ने केंद्र सरकार से कुछ सवाल पूछे हैं। इन सवालों में 'सीआरपीएफ जवानों को हवाई मार्ग से क्यों नहीं ले जाया गया, मोदी सरकार ने उनको एयरक्राफ्ट के लिए अनुमति क्यों नहीं दी गई, शामिल हैं। आतंकी संगठन जैश की धमकी को क्यों नजरंदाज किया गया। 02 जनवरी, 2019 और 13 फरवरी, 2019 के बीच 11 ख़ुफ़िया इनपुट, जो ऐसी आतंकी साज़िश के बारे में आगाह कर रहे थे, उन्हें नज़रअंदाज़ क्यों किया गया। आतंकवादियों को इतनी भारी मात्रा में आरडीएक्स कैसे मिला। चार साल बाद आज पुलवामा आतंकी हमले की जांच कहां तक पहुंची है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह की क्या ज़िम्मेदारी तय की गई। इतने बड़े हादसे के बाद संवैधानिक पद पर बैठे गवर्नर को प्रधानमंत्री ने तुम चुप रहो, की धमकी क्यों दी। देशद्रोह का सर्टिफिकेट बांटने वाले आज यह बताएं, कि अगर यह देशद्रोह नहीं है तो फिर देशद्रोह क्या है।