चीन की चालबाजी: पैंगोंग त्सो इलाके के पास कर रहा निर्माण, सैटेलाइट तस्वीरों में सामने आई हकीकत
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और हाल ही में सामने आईं कुछ सैटेलाइट तस्वीरों ने इसे लेकर चीन की मंशा पर सवाल उठा दिए हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से चल रहा है और दोनों पक्षों के बीच इसे सुलझाने के लिए लगातार वार्ताएं हो रही हैं। बीते दिनों चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भी कहा था कि सीमा पर संघर्ष को दोनों देशों ने प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया है। लेकिन, अब कुछ सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं जो चीन की असलियत को बयां कर रही हैं।
सोशल मीडिया पर सामने आई इन सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर फिंगर-8 इलाके में चीन ने कई संरचनाओं का निर्माण किया है। बताया जा रहा है कि इनमें पक्के भवन और हेलिपैड भी शामिल हैं। अमेरिका में पेंटागन में राष्ट्रीय रक्षा रिपोर्टड जैक डेश ने ये तस्वीरें अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से पोस्ट की हैं।
अक्तूबर की हैं तस्वीरें, समझौते का उल्लंघन कर रहा है चीन
ये तस्वीरें अक्तूबर की हैं। जैक ने लिखा है कि ये तस्वीरें बताती हैं कि कुछ महीने पहले पैंगोंग लेक त्सो से भारत के साथ सैनिकों को हटाने का समझौता करने के बाद चीन अब भी इस इलाके में लगातार निर्माण कार्य करता आ रहा है। साल 2021 की शुरुआत में इस इलाके में एक भारत और चीन की सेना के टैंक भी एक-दूसरे से कुछ ही दूरी पर तैनात किए गए थे।
दोनों देशों के बीच राजनयिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से हुई वार्ता में तय किया गया था कि समझौते के तहत चीन फिंगर-8 से और भारत फिंगर-4 इलाके से आगे नहीं बढ़ेगा। लेकिन इन सैटेलाइट तस्वीरों ने एक बार फिर चीन की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, भारत सरकार की ओर से इस मामले को लेकर अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
चीन के साथ पिछले साल मई में हुई थी गतिरोध की शुरुआत
पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों के बीच बनी सैन्य तनाव की स्थिति ने आपसी संबंधों का खासा तल्ख कर दिया है। दोनों पक्षों के बीच सीमा गतिरोध की स्थिति पिछले साल पांच मई को शुरू हुई थी जब पैंगोंग त्सो झील इलाके में दोनों सेनाओं के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था। इसके बाद दोनों ही पक्षों ने सीमा पर अपने जवानों और हथियारों की तैनाती बढ़ा दी थी।
इस विवाद को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच राजनयिक और सैन्य चैनलों के जरिए बातचीत की शुरुआत हुई थी। कई दौर की वार्ताओं के बाद दोनों पक्ष अगस्त में गोगरा इलाके से सैनिकों को हटाने पर सहमत हुए थे। वहीं, फरवरी में दोनों देशों के बीच पैंगोंग त्सो झील इलाके के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से सैनिकों को हटाने की सहमित बनी थी।