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सतारा ग्राउंड रिपोर्ट: छत्रपति के सामने पवार का गढ़ भेदने की चुनौती; भाजपा को पहली बार कमल खिलने का भरोसा
Fri, 03 May 2024 07:41 AM IST
शिव शरण शुक्ला
सुरेंद्र मिश्र
सुरेंद्र मिश्र
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Fri, 03 May 2024 07:41 AM IST
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उदयनराजे भोसले, शशिकांत शिंदे
- फोटो :
ANI
विस्तार
कांग्रेस से अलग होकर शरद पवार ने 1999 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का गठन किया था। तब से 2019 तक सतारा लोकसभा क्षेत्र में एनसीपी का दबदबा रहा है। इस बार छत्रपति शिवाजी महाराज के 13वें वंशज छत्रपति उदयनराजे भोसले के सामने शरद पवार का गढ़ भेदने और राजघराने का अस्तित्व कायम रखने की चुनौती है। भाजपा को पहली बार शिवाजी की जमीन पर कमल खिलने का भरोसा है। उदयनराजे भोसले 90 के दशक में भाजपा के साथ थे और विधायक बनने के बाद शिवसेना-भाजपा सरकार में मंत्री बने थे। 2009 में एनसीपी में शामिल हो गए। एनसीपी से तीन बार सतारा से सांसद चुने गए। 2019 में भी वे जीते थे, लेकिन शरद पवार से मतभेद के बाद इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए थे। उपचुनाव हुआ तो एनसीपी के श्रीनिवास पाटिल से हार गए थे।फिलहाल, राज्यसभा सदस्य हैं। वह जनता के नुमाइंदे के रूप में लोकसभा जाने के लिए फिर भाजपा से मैदान में उतरे हैं। उदयनराजे का मुकाबला एनसीपी (शरद) के विधायक शशिकांत शिंदे से है, जो शरद पवार के भरोसेमंद है। हालांकि, पवार पहले पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को चुनाव लड़ाना चाहते थे, लेकिन वह एनसीपी (शरद) के चिह्न पर नहीं, बल्कि कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर लड़ने के लिए तैयार थे। विधायक शिंदे पर मुंबई कृषि उपज बाजार समिति में घोटाले का आरोप है और इस मामले में उन पर गिरफ्तारी की तलवार भी लटक रही है। पवार उनके पीछे चट्टान की तरह खड़े हैं। शशिकांत शिंदे सतारा लोकसभा क्षेत्र में पहले कोरेगांव और अब जावली से विधायक हैं।
मराठा आरक्षण का असर नहीं महाराज की गद्दी का आदर
सतारा की मंडियों, व्यापारी संगठनों और कर्मचारी यूनियनों पर शरद पवार का असर है। वहीं, उदयनराजे का शहर पर नियंत्रण है। यहां के लोग छोटे-मोटे कार्यक्रमों में भी उन्हें निमंत्रण देने पहुंच जाते हैं और वह किसी को निराश नहीं करते। यह उदयनराजे की लोकप्रियता का बड़ा राज है। इस बार उनके चचेरे भाई सतारा से भाजपा विधायक शिवेन्द्र राजे भोसले भी पारिवारिक कटुता भूलकर क्षेत्र में राजघराने का वर्चस्व बनाए रखने के लिए चिलचिलाती धूप में जनता का आशीर्वाद मांग रहे हैं।
पिछले दो चुनावों का हाल
2019 में एनसीपी के उम्मीदवार छत्रपति उदयनराजे भोसले को यहां 51.8% मत मिले थे। वहीं, शिवसेना के नरेंद्र अन्नासाहेब पाटिल को 40.48% मत मिले थे। बात एगर 2014 के लोकसभा चुनावों की करें तो छत्रपति उदयनराजे भोसले को 53.50% मत मिले थे। तब भी वे एनसीपी से ही चुनावी मैदान में थे। वहीं, निर्दलीय प्रत्याशी पुरुषोत्तम जाधव को 15.97% फीसदी मत मिले थे।