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सरस्वती नदी का मिल गया प्रमाण, अब कई राज्यों की बुझेगी प्यास

Sun, 16 Oct 2016 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली 
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली  Updated Sun, 16 Oct 2016 01:23 AM IST
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 Saraswati river existed, concludes expert panel; finding can't be challenged, says Uma Bharti
सरस्वती नदी के रहस्यों से पर्दा हटाते हुए केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने कहा है कि अब यह प्रमाणित हो गया है कि गुजरात, राजस्थान और हरियाणा में कभी सरस्वती नदी बहती थी। सरस्वती नदी पर एक रिपोर्ट को सामने रखते हुए उमा ने कहा कि पुरातन काल में काल में बहने वाली नदी के वैज्ञानिक प्रमाण मिल गए हैं। 
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रिपोर्ट को विश्व की सबसे प्रामाणिक रिपोर्ट करार देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रमाणित हो गया है कि हिमालय के आदि  बद्री से निकलकर पश्चिम में हड़प्पा कालीन नगर धौलावीरा  तक सरस्वती नदी बहती थी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों को आदि बद्री से कच्छ के रण से होकर धौलावीरा तक करीब पौने पांच हजार किलोमीटर तक जमीन के भीतर विशाल जल भंडार का भी पता चला है।  जिससे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के अहम इलाकों की प्यास बुझाई जा सकती है। 
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भारती ने एलान किया कि वे सरस्वती के रिपोर्ट पर मंथन के लिए जल्द ही एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करेंगी। दरअसल भारत सरकार के जल संसाधन मंत्रालय ने प्रख्यात भूगर्भ वैज्ञानिक प्रोफेसर केएस वाल्दिया की अध्यक्षता में एक विशेष दल का गठन किया था। शनिवार को इस विशेष दल ने उमा भारती को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। जिसमें सरस्वती नदी के अस्तित्व में रहने की बात प्रमाणित हुई है। 
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रिपोर्ट मिलने के बाद खुशी व्यक्त करते हुए भारती ने कहा कि वैश्विक स्तर पर बेहद प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों ने व्यापक अध्ययन के बाद सरस्वती नदी के होने की पुष्टि की है। उनकी इच्छा थी कि आस्था और धर्म के अलावा सरस्वती नदी का वैज्ञानिक प्रमाण भी सामने आए। सरस्वती के आगे की कार्ययोजना के मामले पर उमा ने कहा है कि पानी की नयी धारा को लाने की तुलना में पुरानी धारा को पुनर्जीवित करना कम खर्चीला होता है। इस मामले में अध्ययन किया जाएगा कि सरस्वती की सुप्त जलधारा की क्षमता कहां कितनी है। उससे गुजरात, राजस्थान और हरियाणा में सूखे का मुकाबला कैसे किया जा सकता है। 
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