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संतोष गंगवार ने नकारी प्रोटेम स्पीकर बनने की बात

Thu, 30 May 2019 11:00 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 30 May 2019 11:00 AM IST
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santosh gangwar might become protem speaker, administer oath of office to new members
संतोष गंगवार (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

बरेली से आठवीं बार सांसद चुने गए संतोष कुमार गंगवार को मोदी सरकार में मंत्री बनाया जा सकता है। इसके लिए उन्हें पार्टी अध्यक्ष का फोन जा चुका है। वह शपथ ग्रहण कार्यक्रम से पहले शाम के साढ़े चार बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चाय पर चर्चा करेंगे। मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल के दौरान उन्हें श्रम और रोजगार मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का कार्यभार सौंपा गया था।

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मीडिया में पहले ऐसी खबरें आ रही थीं कि उन्हें प्रोटेम स्पीकर बनाया जा सकता है क्योंकि वह वरिष्ठ सासंदों में से एक हैं। प्रोटेम स्पीकर नए सांसदों को शपथ दिलाता है। खबरों की पुष्टि करते हुए उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने उन्हें सोशल मीडिया पर प्रोटेम स्पीकर बनने की बधाई तक दे दी थी। हालांकि बाद में उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। गंगवार ने मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया है। उन्होंने कहा, 'मैं मंत्री बनने के बाद प्रोटेम स्पीकर नहीं बन सकता। मुझे जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी मैं उसे निभाऊंगा।'
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क्या होता है प्रोटेम स्पीकर
प्रोटेम स्पीकर उन्हें कहा जाता है, जो चुनाव के बाद पहले सत्र में स्थायी अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष का चुनाव होने तक संसद या विधानसभा का संचालन करते हैं। सरल शब्दों में कहें, तो कामचलाऊ और अस्थायी अध्यक्ष ही प्रोटेम स्पीकर हैं। लोकसभा अथवा विधानसभाओं में इनका चुनाव बेहद कम वक्तों के लिए होता है।
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सामान्यतः सदन के वरिष्ठतम सदस्य को यह जिम्मेदारी सौंपी जाती है। लोकसभा अथवा विधानसभा चुनाव के ठीक बाद अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष के चुनाव से पहले अस्थायी तौर पर वे सदन के संचालन से संबंधित दायित्वों का निर्वहन करते हैं। प्रोटेम स्पीकर तब तक अपने पद पर बने रहते हैं, जब तक सदस्य स्थायी अध्यक्ष का चुनाव न कर लें।


हालांकि लोकसभा अथवा विधानसभाओं में प्रोटेम स्पीकर की जरूरत तब भी पड़ती है, जब सदन में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, दोनों का पद खाली हो जाता है। यह स्थिति तब पैदा हो सकती है, जब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, दोनों की मृत्यु हो जाए अथवा वे अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दें।

संविधान में, हालांकि प्रोटेम स्पीकर की शक्तियां स्पष्ट तौर पर नहीं बताई गई हैं, लेकिन यह तय है कि उनके पास स्थायी अध्यक्ष की तरह शक्तियां नहीं होतीं।

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