CRPF में शुरु होगी 'संस्कारशाला': 60 दिन में चार जवानों ने खुद को गोली मारी, चार साथी खत्म किए तो पांच घायल
सीआरपीएफ मुख्यालय के अधिकारी बताते हैं, सभी यूनिटों के अधिकारियों से कहा गया है कि वे जवानों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। अगर जवान के परिवार में कोई दिक्कत है तो उस संबंध में भी बातचीत की प्रक्रिया शुरु की जाए।
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देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में 60 दिन के दौरान आत्महत्या करने और साथी जवानों पर गोली चलाने के पांच मामले सामने आए हैं। इनमें दो केस ऐसे हैं, जहां दो जवानों ने अपने 5 साथियों को मार डाला, जबकि चार अन्य को घायल कर दिया। एक मामले में साथी को मारने के बाद जवान ने खुद को भी गोली मार ली। गंभीर हालत के चलते उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दूसरी तरफ सीआरपीएफ मुख्यालय यह दावा कर रहा है कि जवानों की परेशानियों को जल्द से जल्द हल करने का प्रयास जारी है। उनकी काउंसलिंग की जा रही है। साथ ही बल की सभी यूनिटों पर 'संस्कारशाला' शुरु की गई है। इसके अलावा रिटायर्ड कर्मियों को बल के विभिन्न कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाएगा। हालांकि, बल के जवानों को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दो वर्ष पहले की गई 'एक साल में सौ दिन की छुट्टी' देने की घोषणा पर अभी तक अमल नहीं हो सका है।
सीआरपीएफ मुख्यालय के अधिकारी बताते हैं, सभी यूनिटों के अधिकारियों से कहा गया है कि वे जवानों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। अगर जवान के परिवार में कोई दिक्कत है तो उस संबंध में भी बातचीत की प्रक्रिया शुरु की जाए। जहां पर जवान का परिवार रहता है और वहां के प्रशासन का कोई मामला है तो उस बाबत जिला अधिकारी को पत्र लिखकर या बातचीत कर जवान की समस्या को हल कराया जाए। मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि ऐसे जवानों या अधिकारियों की सूची तैयार की जा रही है, जिन्हें किसी भी तरह की मानसिक समस्या या कोई दूसरी बीमारी है। जवान, अपनी बात कहने के लिए सामने आ रहे हैं। उनका ग़ुस्सा जानलेवा न हो, यह कोशिश जारी है।
जवानों के लिए संस्कारशाला शुरू की गई है। कितनी यूनिटों में इसका आयोजन हो रहा है, बल मुख्यालय ने इसका ब्यौरा मांगा है। इस तरह के आयोजन का मकसद है कि जवान किसी भी तरह की परेशानी में आत्महत्या जैसा कदम न उठाएं। अगर वह गुस्से में हैं तो अपने साथियों पर फायरिंग न करें। वह 'सीओ' या दूसरे अधिकारी को अपनी परेशानी बता सकता है। बल अपने रिटायर्ड कर्मियों को विभिन्न आयोजनों पर आमंत्रित करें।
साल में कम से कम एक बार जैसे, बल का स्थापना दिवस, शौर्य दिवस, गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती आदि पर पूर्व कर्मियों को बुलाएं। इस तरह के आयोजन में पूर्व कर्मियों के पहुंचने, ठहरने और खाने पीने पर जो कुछ भी खर्च होगा, उसका भुगतान संबंधित यूनिट या जीसी के कल्याण फंड से होगा। पिछले दिनों 'सीआरपीएफ' के रिटायर्ड कर्मियों को उनके निधन पर सम्मान देने की भी योजना शुरु की गई है। अंतिम विदाई के वक्त उन्हें बल के डीजी की तरफ से सलामी दी जाएगी। जरुरतमंद परिवार को आठ हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता राशि देने का भी प्रावधान किया गया है।
कॉन्फेडरेसन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वैलफेयर एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारी रणबीर सिंह बताते हैं कि सीआरपीएफ एवं दूसरे बलों में जवानों को सौ दिन की छुट्टी देने की घोषणा पर अमल अभी तक नहीं हुआ है। लगातार ड्यूटी के चक्कर में जवान, लंबे समय तक अपने परिवार के पास नहीं जा पाते। एक अन्य अधिकारी बताते हैं कि जवानों को सौ दिन की छुट्टी कैसे मिलेगी, किसी भी यूनिट या बटालियन में पर्याप्त नफरी नहीं है। बहुत सी जगहों पर जवानों को ऐसी ड्यूटी करनी पड़ रही है जो तय मापदंडों में शामिल नहीं होती। बल मुख्यालय से आदेश तो आ जाते हैं, मगर निचले स्तर पर स्थिति कुछ और ही रहती है। उसे न तो अधिकारी समझना चाहता है और न ही जवान खुद के गुस्से पर काबू रख पाता है। आपस की कहासुनी जब अधिक बढ़ जाती है तो जवान अपने साथियों को मारने या खुद की जान लेने जैसा गलत कदम उठा लेते हैं।
पिछले 60 दिन में हुई इतनी घटनाएं ...
- 8 नवंबर- सुकमा में सीआरपीएफ जवान ने अपने 4 साथी मारे, 4 घायल
- 10 दिसंबर- काठगोदाम स्थित कैंप में सीआरपीएफ जवान ने खुद को गोली मारी
- 15 दिसंबर- गरियाबंद (छत्तीसगढ़) में सीआरपीएफ एएसआई ने आत्महत्या की
- 19 दिसंबर- गांदरबल (J&K) में सीआरपीएफ जवान ने खुद को गोली मारी
- 26 दिसंबर- तेलंगाना में सीआरपीएफ हवलदार ने एसआई को मार कर खुद को गोली मारी