संघ संगठनों के लिए सॉफ्ट टारगेट बना नीति आयोग, अब विज्ञान भारती ने बोला हमला
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पीएम मोदी के जरिए गठित नीति आयोग संघ संगठनों के लिए सॉफ्ट टारगेट बन गया है। भारतीय मजदूर संघ और स्वदेशी जागरण मंच के बाद अब संघ की विज्ञान भारती संस्था ने नीति आयोग पर हमला बोला है।
नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद की उपस्थिति में ही विज्ञान भारती के संगठन महामंत्री जय कुमार ने आयोग के क्रियाकलापों को लेकर खरी-खोटी सुनाई। जय कुमार ने बकायदा यह तक कहा कि नीति आयोग को चुनौति और संकट बताने के बजाय निदान बताना चाहिए।
यदि ऐसा नहीं है तो फिर पूरी कार्यप्रणाली को बदलने की जरूरत है। दरअसल संघ के पांचवे प्रमुख केसी सुदर्शन की याद में आयोजित स्मृति व्याख्यान के अवसर पर विज्ञान भारती के संगठन महामंत्री जय कुमार और नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद का आमना-सामना हुआ।
भारतीय कृषि की संकट और उसकी चुनौतियों के विषय पर व्याख्यान था। विज्ञान भारती के आयोजन में रमेश चंद बतौर मुख्य अतिथि बुलाए गए थे। उन्होंने भारतीय कृषि की बदरंगी तस्वीर क्या पेश की संघ संगठन की नाराजगी बढ़ गई। इसके बाद विज्ञान भारती की ओर से धन्यवाद ज्ञापन करने खड़े हुए संगठन महामंत्री जय कुमार ने रमेश चंद और उनके नीति आयोग को खरी-खरी सुना दी।
रमेश चंद ने ऐसा क्या कहा कि संघ संगठन की बढ़ी नाराजगी?
संघ संगठन ज्ञान भारती की ओर से आयोजित केसी सुदर्शन स्मृति व्याख्यान में भारतीय कृषि की वास्तविक तस्वीर पेश करते हुए रमेश चंद ने कहा कि इस वक्त देश का कृषि क्षेत्र चौराहे पर खड़ा है। ऊंट किस करवट बैठेगा इसका कोई अता-पता नहीं है।
उन्होंने कि पीएम मोदी ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वायदा तो कर दिया है। लेकिन यह मुश्किल कार्य है। नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कृषि क्षेत्र को 4 प्रतिशत की दर से विकास करना होगा। अभी हमारी कृषि विकास दर महज 2 प्रतिशत से थोड़ी ज्यादा है।
रमेश चंद ने यह भी कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की राजग सरकार ने कृषि पैदावार दोगुनी करने का वायदा किया था। लेकिन वह संभव नहीं हो सका। पीएम मोदी के जरिए किसानों की आय दोगुनी करने के वायदे का हश्र भी उन्होंने अटल के वायदे सरीखा होना करार दिया।
चंद का कहना है कि कृषि विकास की दर 4 प्रतिशत किए बिना किसानों की आय दोगुनी नहीं की जा सकती और कृषि दर बढ़ाने में जमीन पर ढेरों रुकावटे हैं।
पीएम मोदी के सपने पर कुठाराघत होता देख विज्ञान भारती ने दिखाए तेवर
अपने ही आयोजन में पीएम मोदी के सपने पर कुठाराघात होता देख संघ के संगठन ने तत्काल प्रतिक्रिया दे दी। कार्यक्रम में बतौर धन्यवाद भाषण देते हुए संगठन महामंत्री जय कुमार ने रमेश चंद से कहा कि जब अटल का वायदा फेल हो गया, पीएम मोदी का प्रयास भी धरातल पर नहीं उतर पाएगा और देश की कृषि संकट के समाधान के रास्ते नहीं हैं तो फिर कृषि विश्वविद्यालयों, नौकरशाहों, नीति आयोग और बड़े-बड़े विद्वानों के रहने का क्या फायदा।
उन्होंने कहा कि यदि वाकई में भारतीय कृषि की यही तस्वीर है तो हमें कृषि की परिभाषा बदलनी चाहिए। उन्होंने नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद से कहा कि आप समस्या और चुनौतियां गिनाने के साथ निदान भी बताइये। भारत को कृषि प्रधान देश माना जाता है। यदि कृषि संकट दूर नहीं हुआ तो हमारी पहचान खत्म हो जाएगी।
उल्टे जय कुमार ने रमेश चंद का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि चिंता नहीं करिये उनकी विज्ञान भारती अगले तीन-चार वर्षों में कृषि क्षेत्र की बेहत्तरी का सामधान निकाल लेगी। जय कुमार ने कहा कि आने वाले दिनों में उनके संगठन का मुख्य फोकस कृषि क्षेत्र और उनकी चुनौतियों के निदान पर रहेगा। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही कृषि क्षेत्र में कार्य करने वाले अन्य संगठनों, वैज्ञानिकों, हितग्राहियों और किसानों के साथ बैठक और चिंतन का संवाद करेंगे। मामले में उन्होंने सरकार से भी चर्चा करने की बात कही।