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Samwad 2025: पूर्व बीएसएफ DIG ने बताया, चुनौतियों को कैसे मात दी? घायल बेटे के पास 64 दिन बाद पहुंचे पिता...

Thu, 17 Apr 2025 07:38 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 17 Apr 2025 07:38 PM IST
सार

अमर उजाला संवाद के मंच पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) के सेवानिवृत्त डीआईजी नरेंद्रनाथ धर दुबे भी पहुंचे। दो दिवसीय इस सत्र के पहले दिन कीर्ति चक्र से सम्मानित अधिकारी नरेंद्रनाथ धर दुबे ने अपने सेवाकाल में शौर्य और पराक्रम के लम्हों की कहानियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि साल 2003 में बीएसएफ की कार्रवाई के दौरान उन्होंने आतंकी को ढेर किया था।

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Samwad 2025 Lucknow Former BSF Commandant Narendranath Dhar Dubey on operation in Jammu Kashmir and BSF tenure
अमर उजाला संवाद के मंच पर पूर्व BSF डीआईजी नरेंद्रनाथ धर दुबे और अन्य ने सुनाई पराक्रम की कहानी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीमा सुरक्षा बल (BSF) के सेवानिवृत्त डीआईजी नरेंद्रनाथ धर दुबे ने अमर उजाला संवाद 2025 के मंच पर लगभग दो दशक पहले सुरक्षाबलों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि उनके जिस ऑपरेशन के आधार पर 'ग्राउंड जीरो' नाम की फिल्म बनी है, ये सीमा सुरक्षा बल को सच्ची श्रद्धांजलि है। बता दें कि दुबे को अपने पराक्रम के लिए कीर्ति चक्र से भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने अगस्त, 2003 में जम्मू-कश्मीर में एक चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन के दौरान जैश-ए-मोहम्मद के चीफ ऑपरेशनल कमांडर एक खूंखार आतंकवादी राणा ताहिर नदीम उर्फ गाजी बाबा को मार गिराया था। देश की संसद पर हुए हमले में भी इस दहशतगर्द की भूमिका रही थी।

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जब पिता घायल बेटे को देखने 64 दिन बाद अस्पताल पहुंचे...
उन्होंने बताया कि जब वे आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन के समय गंभीर रूप से घायल हुए, इसकी सूचना दो महीने बाद उनके गांव में पिता और परिवार को मिली। सेवानिवृत्त डीआईजी नरेंद्रनाथ धर दुबे ने बताया कि दुबई में रहने वाला एक शख्स एक छोटा सा मोबाइल लाया था। इसी से पिता को सूचना मिली। 64 दिन बाद पिता उन्हें देखने अस्पताल पहुंचे। वे गुस्से से तमतमाए हुए थे। उन्होंने सवाल किया कि पूरी बात क्यों नहीं बताई, तुम क्या हमें इतना कमजोर समझते हो? इस पर मैंने जवाब दिया कि ऐसी स्थिति में क्या बताते। दिमाग में यही बात आई कि जब थोड़ा ठीक हो जाएं तो बताएंगे।
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बीएसएफ के ऑपरेशन पर आधारित फिल्म सच्ची श्रद्धांजलि
पूर्व डीआईजी नरेंद्रनाथ धर दुबे ने बताया कि उनकी माता अब व्हीलचेयर की मदद से चलती हैं। अब वे लखनऊ में ही रहती हैं, इसलिए आज वे इस कार्यक्रम में भी आई हैं। उन्होंने बताया कि चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन पर कभी कोई फिल्म बनेगी, ये बात उनके दिमाग में कभी नहीं आई। बकौल दुबे, बीते नौ साल से इस पर काम चल रहा था। नौ साल की यात्रा भी अपने आप में एक कहानी है। जिस तरह, और जिस पैमाने पर यह फिल्म बनी है, इससे बड़ी कोई श्रद्धांजलि नहीं हो सकती।

ये भी पढ़ें- सेवानिवृत्त BSF डीआईजी नरेंद्रनाथ धर दुबे के पराक्रम की कहानियां

सैन्य कार्रवाई पर बीएसएफ के साथ-साथ पूरे देश को नाज है
उन्होंने सेना की कार्रवाई को ऐतिहासिक और मील का पत्थर बताया। पूर्व डीआईजी नरेंद्रनाथ धर दुबे ने बताया कि जब बीएसएफ को इस ऑपरेशन के लिए सम्मानित किया गया, उस वर्ष बीएसएफ की 50वीं वर्षगांठ भी थी। उन्होंने कहा, 2015 में बीएसएफ ने 50वां स्थापना दिवस मनाया। तत्कालीन गृह मंत्री को घुसपैठियों के खिलाफ बीएसएफ के ऑपरेशन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। सबसे सफल कार्रवाई को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए बीएसएफ के साथ-साथ पूरे देश को नाज है।

BSF के ऑपरेशन पर फिल्म बनाने के लिए सरकार से 2019 में मिली थी मंजूरी
कीर्ति चक्र से सम्मानित सैन्य अधिकारी दुबे ने बताया सितंबर, 2019 में गृह मंत्रालय ने फिल्म बनाने की लिखित मंजूरी दी थी। 27 अगस्त, 2022 को कैमरा रोल हुआ था। उन्होंने कहा कि 27 अगस्त की रात को ही उन्होंने वास्तविक सैन्य ऑपरेशन शुरू किया था। बकौल दुबे, 'पहले मुझे लगा कि ये महज इत्तेफाक भी हो सकता है। 29 अगस्त को ऑपरेशन पूरा हुआ था। फिल्म बनने के दौरान श्रीनगर में डीआईजी धर्मेंद्र पारीख से मुलाकात हुई। मैंने फिल्म के कलाकारों के बारे में जानना चाहा।'

मुंबई के कलाकारों का श्रीनगर में बीएसएफ की फायरिंग रेंज में क्या काम? समर्पण देखकर खुशी...
दुबे ने बताया कि जब वे फायरिंग रेंज में पहुंचे तो मुंबई से आए बॉलीवुड के कलाकारों को देखकर दंग रह गए। उन्होंने बताया, 'पहले मुझे लगा कि कलाकारों का फायरिंग रेंज में क्या काम, लेकिन सभी लोग फायरिंग का अभ्यास कर रही थी।' इसके बाद एहसास हुआ कि किरदार को दिखाने के लिए प्रॉपर ट्रेनिंग ली जा रही है। सीमा सुरक्षा बल की जैसी छवि जनता को दिखाई जा रही है, यह काफी हद तक वास्तविक होनी ही चाहिए।

निजी जीवन में इमरान हाशमी से जुड़े कई संयोग
अभिनेता इमरान हाशमी के साथ जुड़े संयोगों को लेकर दुबे ने बताया कि उनका ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव  है। इमरान का भी यही है। हम दोनों का जन्म मार्च में हुआ है। इमरान ने कहा, 2003 में उनका करियर शुरू हुआ, जिस साल उन्होंने सफल ऑपरेशन किया था। इसी संयोग के साथ पहली फिल्म भी रिलीज हुई। उन्होंने कहा कि 22 साल बाद फिल्म रिलीज हो रही है, जिसकी उन्हें काफी खुशी है।

शरीर में सात गोलियां लगी हैं
ऑपरेशन के दौरान लगी गोलियों और इस चुनौती को मात देने के बारे में दुबे ने बताया, दाहिना हाथ बुरी तरह जख्मी हुआ था। कितनी गोलियां लगीं, इसकी जानकारी नहीं। 11वें दिन एनेस्थेसिया का असर कम हुआ, तो उन्होंने लेटे-लेटे अपने शरीर की हालत देखने का प्रयास किया। डॉक्टरों ने बताया कि उनके शरीर में सात गोलियां लगी हैं। पेट में लगी गोलियां बाहर निकली या नहीं, उन्हें इसकी जानकारी नहीं। दाहिने पैर में भी गोली लगी, लेकिन हड्डी में फैक्चर नहीं हुआ। सीने में बाईं तरफ जो गोली लगी वो बीएसएफ की स्टील प्लेट के कारण उनके शरीर में नहीं गई। इसे उन्होंने स्मृति के तौर पर सहेज रखा है।

2007 में अस्पताल से छुट्टी मिली, एक ही साल में तीन ऑपरेशन
इंजरी से रिकवरी में लंबा समय लगा। एम्स से उन्हें 19 दिसंबर, 2007 को डिस्चार्ज किया गया। एक ही वर्ष में तीन ऑपरेशन हुए। उनकी सबसे बड़ी सर्जरी कोलोन रिमूवल की होनी थी। दो साल तक एनल पाउच पर रहना पड़ा, लेकिन आज फिल्म देखकर अच्छा लग रहा है। 

संसद पर हमले के अपराधी को मारने का ऑपरेशन
आतंकी गाजी बाबा के एनकाउंटर के बारे में दुबे ने बताया कि 17 महीने से वो कश्मीर घाटी में था। संसद पर हमले के अपराधी को मारने का ऑपरेशन हो रहा है, उसका डिप्टी चीफ हमारे कब्जे में था। ऐसे में कुछ कीमत तो चुकानी पड़ेगी। इसके लिए हम मानसिक रूप से तैयार थे। ऐसा हुआ भी। मुठभेड़ के दौरान हमारे साथी बलबीर सिंह की शहादत हुई, जिसका आज भी उन्हें दुख है। मुठभेड़ में पहली गोली उन्हें ही लगी थी। अस्पताल के ICU में जब एनेस्थीसिया के बाद नींद खुली तो बीएसएफ महानिदेशक ने उन्हें बधाई दी।

अस्पताल में बीएसएफ महानिदेशक ने बताया- गाजी बाबा ढेर
बकौल दुबे, '15वीं कोर कमांडर जनरल निर्भय शर्मा, उनकी पत्नी गेट पर दिखे। महानिदेशक ने बताया कि डॉक्टर से बात हो गई है, गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी जीवन बच जाएगा। आपको बधाई हो।' दुबे ने बताया कि पहले उन्हें समझ नहीं आया कि बधाई किस बात की मिल रही है, लेकिन बीएसएफ महानिदेशक ने बताया कि गाजी बाबा इतिहास बन चुका है।  बाकी साथियों के बारे में खबर मिलने के बाद दिमागी तौर पर शारीरिक तकलीफ काफी कम हो गई। जब आपको एक पहचान मिलती है, और बची हुई जिंदगी इज्जत और ग्लोरी के साथ जीते हैं तो बाकी तकलीफें कम हो जाती हैं। ड्यूटी के दौरान लगी चोट और किसी तरह की डिसेबिलिटी होने पर भी आप पूरी जिंदगी आसानी से जी सकते हैं। मेरा मानना है कि समय के साथ बाकी चीजें कम हो जाती हैं।

नरेंद्रनाथ धर दुबे: कैसा है व्यक्तित्व, सेवाकाल में दिखा पराक्रम
गौरतलब है कि नरेंद्रनाथ धर दुबे के सेवाकाल के एक ऑपरेशन पर बनी फिल्म का नाम- 'ग्राउंड जीरो' रखा गया है। इसमें अभिनेता इमरान हाशमी एक बीएसएफ कमांडेंट की भूमिका में नजर आने वाले हैं। दरअसल, 2003 में बीएसएफ की ओर से की गई कार्रवाई में जम्मू-कश्मीर में आतंकी गाजी बाबा मारा गया था। इस ऑपरेशन ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) को बिना जनरल वाली सेना बनाकर रख दिया था। इस ऑपरेशन ने अर्धसैनिक बल को दो सैन्य अलंकरणों सहित एक दर्जन वीरता पदक भी दिलाए थे। तत्कालीन बीएसएफ 2-आईसी (सेकंड-इन-कमांड) रैंक के अधिकारी नरेंद्रनाथ धर दुबे ने इस ऑपरेशन का नेतृत्व किया था। राणा ताहिर नदीम उर्फ गाजी बाबा उस दिन से बीएसएफ के निशाने पर था, जिस दिन जैश-ए-मोहम्मद ने दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर हमला किया था।
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