भारत-पाकिस्तान के बीच कितनी ट्रेनें चलती हैं और कब-कब पड़ा यात्रियों पर असर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनिल पांडेय Updated Sat, 10 Aug 2019 08:09 PM IST

सार

  • हमारे देश में एक ऐसा रेलवे स्टेशन भी है जो दो राज्यों की सीमा में आता है।
  • इस स्टेशन का नाम है नवापुर। जिसका आधा हिस्सा महाराष्ट्र में है और आधा गुजरात में।
  • देश की सबसे धीमी रफ्तार वाली ट्रेन 10 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है।
  • पहाड़ों से होकर गुजरने वाली यह ट्रेन है मेट्टुपलायम ओट्टी नीलगीरी पैसेंजर।
  • सबसे बड़े नाम वाला रेलवे स्टेशन वेंकटनरसिम्हाराजुवारिपटा (Venkatanarsimharajuvaripeta) है।
  • सबसे छोटा नाम नावाला रेलवे स्टेशन ईब (IB) है, जो ओडिशा में है।
भारत-पाकिस्तान के बीच रेल सेवा बंद
भारत-पाकिस्तान के बीच रेल सेवा बंद - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

हम सभी बचपन से पढ़ते आ रहे हैं कि 16 अप्रैल साल 1853 को देश में सबसे पहली रेलगाड़ी महाराष्ट्र के मुंबई और ठाणे के बीच चलाई गई थी। इस ट्रेन ने 21 मील (33.8 किलोमीटर) की दूरी की यात्रा करीब 57 मिनट में पूरी की थी। उस रेलगाड़ी में सिंध, साहिब और सुल्तान नाम के तीन इंजन लगे थे, जो 14 बोगियों में बैठे करीब 400 यात्रियों को गन्तव्य स्थान तक लेकर गए थे।
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1853 से शुरू हुआ यह सफर आज आधुनिकता की पटरियों पर दौड़ रहा है। आजादी के आंदोलन में भी रेल ने लोगों को जोड़ने का काम किया था।

रेलगाड़ियों ने अविभाजित भारत को बहुत अच्छे से देखा भी है और लाखों लोगों को लाहौर, पेशावर, कराची जैसे शहरों तक पहुंचाया भी था। आज अगर आपसे पूछा जाए कि भारत और पाकिस्तान के बीच कितनी ट्रेन चलती हैं तो संभव है आप समझौता एक्सप्रेस और थार एक्सप्रेस का नाम लें। लेकिन एक ऐसा समय भी था जब मुंबई से पेशावर, बड़ौदा से लाहौर, रावपिंडी और पेशावर के लिए भी ट्रेनें चलती थीं। यहां तक कि मेंगलोर से पेशावर के लिए भी दिल्ली के रास्ते ट्रेन से जाया जाता था।


1947 के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हर चीज का बंटवारा हो गया। रेल का भी। आज भी दोनों देशों के बीच पटरियां तो हैं, पर उसमें दौड़ने वाली ट्रेनें फिलहाल रोक दी गई हैं।

जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने और अनुच्छेद 370 में हुए बदलाव से पाकिस्तान बेवजह खफा हो गया है और उसने  थार एक्सप्रेस (Thar Link Express) रेल सेवा को बंद कर दिया है। 10 अगस्त को आखिरी रेल भारत वापस आई। इसके बाद से यह मार्ग अनिश्चितकाल के लिए बंद हो गया है। पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रईस अहमद ने थार लिंक एक्सप्रेस को बंद करने की घोषणा की थी। उन्होंने यह भी कहा कि, जब तक वो रेलमंत्री हैं, तब तक भारत और पाकिस्तान के बीच कोई रेल नहीं चलेगी।

आइए जानते हैं भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस (Samjhauta Express) व थार एक्सप्रेस का रूट क्या है? कहां से कहां तक जाती हैं और इसमें सवार होने वाले मुसाफिरों की जांच-पड़ताल पूरी प्रकिया क्या होती है।

क्या है समझौता एक्सप्रेस

  • समझौता एक्सप्रेस भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली ट्रेन है। भारत में यह ट्रेन दिल्ली से पंजाब के अटारी श्यामसिंह रेलवे स्टेशन तक जाती है।
  • अटारी से इस ट्रेन को पाकिस्तान रेलवे का इंजन वाघा होते हुए लाहौर तक ले जाता है।
  • इस दौरान सीमा सुरक्षा बल के जवान घोड़ागाड़ी से इसकी निगरानी करते हैं। आगे-आगे चलकर पटरियों की पड़ताल भी करते चलते है।
  • भारत से यह ट्रेन सप्ताह में दो बार बुधवार व रविवार को पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से रात 11.10 बजे चलती थी।
  • इसके लिए पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर अलग से प्लेटफॉर्म भी बनाया गया है।
  • इस ट्रेन में दाखिल होने से पहले मुसाफिरों की गहन सुरक्षा जांच की जाती है। इसके बाद ही यात्री ट्रेन में बैठ पाते हैं।
  • समझौता एक्सप्रेस में कुल छह शयनयान (Sleeper Coach) और एक वातानुकूलित तृतीय श्रेणी (3rd AC) कोच है।
  • दिल्ली से निकलने के बाद अटारी तक इस ट्रेन का कोई स्टॉपेज नहीं है।
  • बताया जाता है कि इसे भारतीय रेल की राजधानी एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस व अन्य प्रमुख ट्रेनों के ऊपर तरजीह दी जाती है ताकि इसमें कोई देर ना हो।
  • लाहौर से वापसी के समय समझौता एक्सप्रेस भारत में सोमवार और गुरुवार को पहुंचती है। इस दौरान इस ट्रेन के लोको पायलट और गार्ड नहीं बदले जाते हैं।
  • ये पहला मौका नहीं था जब समझौता एक्सप्रेस को भारत-पाक में तनाव की सुगबुहाट पर ही रोक लगा दी गई हो।
  • इससे पहले 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हमले के बाद भी समझौता एक्सप्रेस रोक दी गई थी।
  • 27 दिसंबर 2007 को बेनजीर भुट्टो हमले के बाद भी इस ट्रेन को रोक दिया गया था।

समझौता एक्सप्रेस का इतिहास

  • समझौता एक्सप्रेस का इतिहास 43 साल पुराना है। इसकी शुरुआत 1971 में शिमला समझौता के बाद हुई थी।
  • भारत-पाक युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच शिमला में समझौता हुआ था। वहीं दोनों देशों के बीच रेल सेवा को शुरू करने पर सहमति बनी थी।
  • बंटवारे के पहले भी भारत और पाकिस्तान के बीच रेल सेवा थी। लेकिन 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान सेना के जवानों ने रेल की पटरियां उखाड़ दी थीं।
  • 22 जुलाई 1976 को अटारी-लाहौर के बीच समझौता एक्सप्रेस को शुरू करने का फैसला किया गया था।
  • शुरुआत में इसे रोज चलाया जाता था। लेकिन 1994 में इसके संचालन को हफ्ते में दो दिन ही कर दिया गया था।
  • शुरुआत में ये ट्रेन संचालन के दिन ही भारत भी लौट आती थी, लेकिन बाद में यह अगले दिन भारत लौटने लगी।
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