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Sambhal Violence: संभल हिंसा की चार्जशीट में पाकिस्तान से अमेरिका तक का जिक्र, मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?
Sat, 22 Feb 2025 02:18 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 22 Feb 2025 02:18 PM IST
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संभल हिंसा मामले में पुलिस ने दाखिल की चार्जशीट।
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अमर उजाला
विस्तार
संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा को लेकर गुरुवार को पुलिस ने अदालत में छह अलग-अलग मामलों में चार्जशीट दाखिल कर दी है। पुलिस ने कुल दर्ज 12 एफआईआर में से छह में आरोप तय कर दिए हैं। इनमें 208 लोगों को आरोपियों के तौर पर चिह्नित किया गया है। यूपी पुलिस की चार्जशीट कुल 4175 पन्नों में है, जिसमें कई बड़े खुलासे किए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोप पत्र में पाकिस्तान से लेकर ब्रिटेन और अमेरिका तक का जिक्र मिलता है।ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर संभल मामले में अब तक क्या-क्या हुआ है? पुलिस ने मामले में किस तरह और क्या कदम उठाए हैं? कोर्ट में दायर चार्जशीट में हिंसा को लेकर क्या-क्या नई बातें सामने आई हैं? इसके अलावा इसमें किन बड़े नामों का भी जिक्र किया गया है? आइये जानते हैं...
हिंसा के बाद से अब तक क्या-क्या हुआ?
पुलिस की तरफ से संभल हिंसा मामले में यह चार्जशीट 87 दिन बाद दायर हुई है। हालांकि, इससे पहले पुलिस ने एफआईआर में कई लोगों के नाम शामिल किए। संभल में जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने कई अहम गिरफ्तारियां भी कीं। पुलिस ने 25 नवंबर से ही कई इलाकों में दबिश देकर हिंसा फैलाने वाले संदिग्धों को हिरासत में लिया। सीसीटीवी कैमरों के जरिए इन लोगों की पहचान की गई और इसके बाद उपद्रवियों के पोस्टर लगाकर इनकी गिरफ्तारी शुरू कर दी गई।
25 नवंबर: पुलिस ने एफआईआर में समाजवादी पार्टी के नेता और संभल के सांसद जिया उर रहमान बर्क का नाम शामिल किया। इसके अलावा सपा नेता इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल का नाम भी शामिल रहा।
पुलिस की तरफ से संभल हिंसा मामले में यह चार्जशीट 87 दिन बाद दायर हुई है। हालांकि, इससे पहले पुलिस ने एफआईआर में कई लोगों के नाम शामिल किए। संभल में जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने कई अहम गिरफ्तारियां भी कीं। पुलिस ने 25 नवंबर से ही कई इलाकों में दबिश देकर हिंसा फैलाने वाले संदिग्धों को हिरासत में लिया। सीसीटीवी कैमरों के जरिए इन लोगों की पहचान की गई और इसके बाद उपद्रवियों के पोस्टर लगाकर इनकी गिरफ्तारी शुरू कर दी गई।
25 नवंबर: पुलिस ने एफआईआर में समाजवादी पार्टी के नेता और संभल के सांसद जिया उर रहमान बर्क का नाम शामिल किया। इसके अलावा सपा नेता इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल का नाम भी शामिल रहा।
28 नवंबर: यूपी सरकार ने तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया। आयोग को जांच में यह पता लगाना था कि यह घटना कोई सुनियोजित साजिश थी या अचानक घटित हुई। अगर साजिश थी तो इसके पीछे किन लोगों की भूमिका थी। साथ ही, घटना के बाद पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा कानून व्यवस्था बरकरार रखने का लिए उठाए गए कदम सही थे कि नहीं।
29 नवंबर: सुप्रीम कोर्ट ने संभल ट्रायल कोर्ट को शाही जामा मस्जिद मामले में कार्यवाही को रोकने का निर्देश दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि जब तक इलाहबाद हाईकोर्ट सर्वे से जुड़े आदेश को चुनौती देने वाली मस्जिद समिति की याचिका पर सुनवाई नहीं कर लेती तब तक इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।
29 नवंबर: सुप्रीम कोर्ट ने संभल ट्रायल कोर्ट को शाही जामा मस्जिद मामले में कार्यवाही को रोकने का निर्देश दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि जब तक इलाहबाद हाईकोर्ट सर्वे से जुड़े आदेश को चुनौती देने वाली मस्जिद समिति की याचिका पर सुनवाई नहीं कर लेती तब तक इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।
1 दिसंबर, 21 जनवरी, 30 जनवरी: यूपी सरकार की तरफ से गठित आयोग तीन बार संभल में जांच के लिए पहुंचा। इस दौरान यहां लोगों से लिखित बयान लिए गए। तीसरे दौरे में आयोग ने सरकारी कर्मियों और अफसरों के बयान दर्ज किए।
अब जानें- संभल हिंसा से जुड़ी चार्जशीट में क्या?
चार्जशीट में कितने आरोपियों का जिक्र?
उत्तर प्रदेश पुलिस ने कोर्ट में जो चार्जशीट दाखिल की है, वह 4175 पन्नों की है। इसमें संभल हिंसा से जुड़ी कुल 12 एफआईआर में से 6 मामलों में आरोप तय किए गए हैं। चार्जशीट में कुल 159 आरोपी बनाए गए हैं। बताया गया है कि इनमें से 80 आरोपियों को पकड़ा जा चुका है, जबकि 79 अभी भी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं।
फिलहाल जिन छह मामलों में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है, उनमें से चार मामले पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों पर हमले से जुड़े हैं। वहीं एक केस पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ और आग लगाने से जुड़ा है। इन्हीं मामलों में आरोप तय हुए हैं।
चार्जशीट में कितने आरोपियों का जिक्र?
उत्तर प्रदेश पुलिस ने कोर्ट में जो चार्जशीट दाखिल की है, वह 4175 पन्नों की है। इसमें संभल हिंसा से जुड़ी कुल 12 एफआईआर में से 6 मामलों में आरोप तय किए गए हैं। चार्जशीट में कुल 159 आरोपी बनाए गए हैं। बताया गया है कि इनमें से 80 आरोपियों को पकड़ा जा चुका है, जबकि 79 अभी भी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं।
फिलहाल जिन छह मामलों में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है, उनमें से चार मामले पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों पर हमले से जुड़े हैं। वहीं एक केस पुलिस की गाड़ियों में तोड़फोड़ और आग लगाने से जुड़ा है। इन्हीं मामलों में आरोप तय हुए हैं।
किन-किन मामलों में दाखिल की गई है चार्जशीट?
जिन मामलों में एसआईटी ने आरोपपत्र दाखिल किया है, उनमें पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों पर हमला करने, लूट, आगजनी के मामले शामिल हैं।
जिन मामलों में एसआईटी ने आरोपपत्र दाखिल किया है, उनमें पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों पर हमला करने, लूट, आगजनी के मामले शामिल हैं।
संभल हिंसा का मास्टरमाइंड कौन?
स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने इस चार्जशीट में संभल हिंसा का मुख्य मास्टरमाइंड दुबई आधारित भगोड़े शारिक साटा को बताया गया है, जो कि संभल में गाड़ी चोरी करने वाले गिरोह का सरगना है, जिसने दिल्ली-एनसीआर से 300 से ज्यादा गाड़ियां उठाई हैं। पुलिस का कहना है कि साटा के अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से संबंध हैं। साथ ही उसके पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी- इंटर सर्विस इंटेलिजेंस (आईएसआई) से भी संपर्क रहे हैं।
संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई के मुताबिक, साटा फर्जी पासपोर्ट के जरिए देश छोड़कर भागने में कामयाब रहा था। संभल हिंसा की जांच के दौरान पुलिस को जो सबूत मिले, उसमें साटा के इस घटना के मास्टरमाइंड होने की बात सामने आई। चार्जशीट में उसके गिरोह से जुड़े कई लोगों के नामों का जिक्र है, इनमें दो बड़े नाम गुलाम और अफरोज के हैं, जिन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है। उसने ही बताया कि शारिक साटा ने ही हथियार उपलब्ध कराए और बवाल करने के लिए कहा था। उसके इशारे पर पूरी घटना को बड़ा रूप देने का प्रयास किया। विष्णु शंकर जैन की हत्या करने की साजिश थी, लेकिन उसमें वह असफल रहे। एसपी ने बताया कि अब शारिक साटा भी बीएनएसएस की धारा 48 का आरोपी बन गया है। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने इस चार्जशीट में संभल हिंसा का मुख्य मास्टरमाइंड दुबई आधारित भगोड़े शारिक साटा को बताया गया है, जो कि संभल में गाड़ी चोरी करने वाले गिरोह का सरगना है, जिसने दिल्ली-एनसीआर से 300 से ज्यादा गाड़ियां उठाई हैं। पुलिस का कहना है कि साटा के अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से संबंध हैं। साथ ही उसके पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी- इंटर सर्विस इंटेलिजेंस (आईएसआई) से भी संपर्क रहे हैं।
संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई के मुताबिक, साटा फर्जी पासपोर्ट के जरिए देश छोड़कर भागने में कामयाब रहा था। संभल हिंसा की जांच के दौरान पुलिस को जो सबूत मिले, उसमें साटा के इस घटना के मास्टरमाइंड होने की बात सामने आई। चार्जशीट में उसके गिरोह से जुड़े कई लोगों के नामों का जिक्र है, इनमें दो बड़े नाम गुलाम और अफरोज के हैं, जिन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है। उसने ही बताया कि शारिक साटा ने ही हथियार उपलब्ध कराए और बवाल करने के लिए कहा था। उसके इशारे पर पूरी घटना को बड़ा रूप देने का प्रयास किया। विष्णु शंकर जैन की हत्या करने की साजिश थी, लेकिन उसमें वह असफल रहे। एसपी ने बताया कि अब शारिक साटा भी बीएनएसएस की धारा 48 का आरोपी बन गया है। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
क्या है बीएनएस की धारा 48?
बीएनएस धारा 48 के अनुसार, भारत से बाहर रहने वाले किसी व्यक्ति को भारत में अपराध को बढ़ावा देने का दोषी पाया जा सकता है। यदि वह भारत में किसी ऐसे कार्य को करने में सहायता करता है या उकसाता है, जिसे यहां किए जाने पर अपराध माना जाएगा। वह धारा 48 के तहत आरोपी होगा और जितना अपराध भारत में किया गया है उतना ही अपराध विदेश में बैठे आरोपी का माना जाएगा।
बीएनएस धारा 48 के अनुसार, भारत से बाहर रहने वाले किसी व्यक्ति को भारत में अपराध को बढ़ावा देने का दोषी पाया जा सकता है। यदि वह भारत में किसी ऐसे कार्य को करने में सहायता करता है या उकसाता है, जिसे यहां किए जाने पर अपराध माना जाएगा। वह धारा 48 के तहत आरोपी होगा और जितना अपराध भारत में किया गया है उतना ही अपराध विदेश में बैठे आरोपी का माना जाएगा।
सपा सांसद और नेता के नाम चार्जशीट से गायब, पर जांच जारी
इस चार्जशीट में सपा के नेता और संभल से सांसद जियाउर रहमान बर्क और विधायक इकबाल महमूद के बेटे सोहेल इकबाल के नाम शामिल नहीं हैं, जबकि घटना के बाद दर्ज हुई एफआईआर में इन दोनों के ही नाम शामिल थे। बर्क पर हिंसा से पहले भड़काऊ भाषण देने के आरोप थे, जबकि विधायक इकबाल के बेटे पर उस भीड़ का हिस्सा बनने के आरोप थे, जिसने पुलिस पर हमला किया था और उनकी गाड़ियों में आग लगा दी थी।
संभल एसपी के मुताबिक, सपा सांसद और विधायक के बेटे के मोबाइल फोन से किए गए व्हाट्सएप मैसेज की जानकारियां मांगी गई हैं। इस मामले में और सबूत जुटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरोपियों की धरपकड़ के लिए अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। जैसे- सीसीटीवी फुटेज, पोस्टर लगाकर संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारियों के बाद लोगों के कबूलनामे।
इस चार्जशीट में सपा के नेता और संभल से सांसद जियाउर रहमान बर्क और विधायक इकबाल महमूद के बेटे सोहेल इकबाल के नाम शामिल नहीं हैं, जबकि घटना के बाद दर्ज हुई एफआईआर में इन दोनों के ही नाम शामिल थे। बर्क पर हिंसा से पहले भड़काऊ भाषण देने के आरोप थे, जबकि विधायक इकबाल के बेटे पर उस भीड़ का हिस्सा बनने के आरोप थे, जिसने पुलिस पर हमला किया था और उनकी गाड़ियों में आग लगा दी थी।
संभल एसपी के मुताबिक, सपा सांसद और विधायक के बेटे के मोबाइल फोन से किए गए व्हाट्सएप मैसेज की जानकारियां मांगी गई हैं। इस मामले में और सबूत जुटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरोपियों की धरपकड़ के लिए अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। जैसे- सीसीटीवी फुटेज, पोस्टर लगाकर संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारियों के बाद लोगों के कबूलनामे।