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ITSC का सहारा की डायरी को सबूत मानने से इनकार

Thu, 05 Jan 2017 02:20 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 05 Jan 2017 02:20 PM IST
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Sahara gets immunity, tax panel accepts its claim that seized papers not evidence
आय कर निपटान आयोग (ITSC) की तरफ से सहारा इंडिया को बड़ी राहत मिली है। आयोग ने 2014 में सहारा इंडिया के दफ्तर में छापेमारी के दौरान बरामद हुई विवादित डायरी मामले में कंपनी के खिलाफ किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई और जुर्माना लगाने से इंकार कर दिया है।
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अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक आयोग ने आयकर विभाग को मिली विवादित डायरी को सबूत मानने से भी इनकार कर दिया है। इस डायरी में कई नेताओं को सहारा की तरफ से पैसे देने का जिक्र था।
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बता दें कि सहारा इंडिया ने आय कर निपटान आयोग में याचिका दी थी आयोग इस डायरी को सबूत न माने। आयोग द्वारा 50 पन्ने में दिए गए फैसले के मुताबिक सहारा इंडिया की इस याचिका को पहले खारिज कर दिया गया था, लेकिन फिर 5 सितंबर, 2016 को उसे दोबारा सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया गया।
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इस मामले की आखिरी सुनवाई 7 नवंबर 2016 को हुई थी, जिसके महज तीन दिनों के बाद,  10 नवंबर 2016 को आयोग ने फैसला सुनाते सहारा को राहत दे दी। संभवत: आयोग ने पहली बार सुनवाई के बाद इतनी जल्दी फैसला दिया है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक कई मामलों में तो आयोग 10 से 12 महीनों में फैसला सुनाता था।

डायरी के बचाव में सहारा ने क्या कहा?

Sahara gets immunity, tax panel accepts its claim that seized papers not evidence
आदेश के पहले ही पन्ने पर आयोग ने लिखा है कि, 'आवेदक(सहारा) ने दलील दी कि कंपनी से कुछ असंतुष्ट कर्मचारियों ने जानबुझकर इस तरह के फर्जी कागजात बना दिए...'

आदेश के आखिरी पन्ने पर लिखा है कि अब सिर्फ छापे के दौरान बरामद हुई 137.58 करोड़ रुपये पर ही टैक्स लगाया जाएगा और इस टैक्स को भी कंपनी 12 किश्तों में दे सकती है। फैसले में आयोग ने यह भी लिखा है कि सहारा ने आयोग से गुहार लगाते हुए कहा था कि कंपनी इस वक्त बुरे दौर से गुजर रही है इसलिए उसे टैक्स को किश्तों में भुगतान करने की छूट दी जाए।

बता दें कि 2013 और 2014 में बिड़ला और सहारा इंडिया के दफ्तरों पर आयकर विभाग ने छापा मारा था। इन छापों में आयकर विभाग ने विवादित डायरी समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए। यह मामला तब गर्माया जब वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से इन फाइलों की जांच की मांग की।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इस डायरी का उल्लेख करते हुए नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाया कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्होंने सहारा से पैसे लिए। इस डायरी में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शीला दीक्षित का नाम भी शामिल है।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी दायर हुआ है, जिसने आयकर विभाग की छापेमारी में बरामद की गई डायरियों को लेकर किसी भी तरह की जांच का आदेश अब तक नहीं दिया है।
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