सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर विवाद जारी, उच्चतम न्यायालय में दायर की पुनर्विचार याचिका
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केरल के सबरीमाला मंदिर में पिछले महीने उच्चतम न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर के अंदर प्रवेश करने का आदेश सुनाया था। न्यायालय के आदेश पर बहुत से लोगों ने एतराज जताया था। मंदिर के पुजारी ने भी आदेश को निराशाजनक बताया था। वहीं सोमवार को नेशनल अय्यपन डिवोटी एसोसिएशन ने सर्वोच्च अदालत में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। जिसमें न्यायालय के पहले के आदेश को चुनौती दी गई है।
केरल की पिनराई विजयन सरकार ने न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हुए फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर नहीं करने का फैसला लिया है। सरकार का कहना है कि वह अदालत के आदेश का सम्मान करती है। मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार मंदिर जाने वाली महिला भक्तों की सुविधाओं का ख्याल रखेगी और उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करेगी।
न्यायालय के आदेश को लागू करने के लिए सोमवार को मुख्यमंत्री तीन तंत्रियों (सर्वोच्च पुजारी) और पंडालम राज शाही परिवार के सदस्यों से बातचीत करेंगे। शनिवार को पंडालम शाही परिवार के युवा वशंज ससिकुमार वर्मा और सबरीमाला के मुख्य पुजारी राजीवारू कंदारारू ने एक विरोध रैली में हिस्सा लिया था। यह पहली बार था कि अदालत के आदेश के विरोध में मंदिर के सर्वोच्च पुजारी और राजशाही परिवार के सदस्य ने सड़क पर उतरकर रैली में हिस्सा लिया हो।
वहीं इस मामले पर केरल के मंदिर मामलों के मंत्री कडाकमपल्ली सुरेंद्रन ने कहा था, 'हम सभी संबंधित व्यक्तियों से मिलेंगे और उन्हें यह समझाने की कोशिश करेंगे कि एक चयनित सरकार के तौर पर हम देश की सर्वोच्च अदालत के फैसले को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। अपने वोटबैंक को ध्यान में रखते हुए कुछ पार्टियां परेशानियां खड़ी कर रही हैं। लेकिन उनकी यह शरारत सफल नहीं होगी।'
Supreme Court verdict over women's entry in Kerala's #SabarimalaTemple: National Ayyappa Devotee association files a review petition in the Supreme Court challenging the earlier verdict of the Court.
— ANI (@ANI) October 8, 2018