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सबरीमाला: सात सवालों से होगा आस्था से जुड़े कानूनी मुद्दों का परीक्षण, सुप्रीम कोर्ट ने किए तैयार

Tue, 11 Feb 2020 02:53 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Tue, 11 Feb 2020 02:53 AM IST
सार

  • सबरीमाला: धार्मिक स्वतंत्रता व आस्था से जुड़े कानूनी सवालों का परीक्षण करेगा सुप्रीम कोर्ट
  • नौ सदस्यीय पीठ ने कहा, पुनर्विचार मामले में कानूनी सवालों को बड़ी पीठ को सौंप सकते हैं

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Sabarimala: Seven questions will test the legal issues related to faith, the Supreme Court prepared
सबरीमाला - फोटो : self

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार व विभिन्न धार्मिक पंथों के अधिकारों के बीच गुंजाइश व दायरा परीक्षण करने का फैसला किया है। कोर्ट ने कहा कि उसकी पांच सदस्यीय पीठ सबरीमाला मामले में पुनर्विचार के सीमित अधिकार का इस्तेमाल करने के दौरान कानूनी सवालों को बड़ी पीठ को सौंप सकती है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय पीठ ने सोमवार को संविधान के तहत धार्मिक स्वतंत्रता व आस्था से संबंधित मुद्दों से जुड़े सात सवाल तैयार किए हैं, जिन पर पीठ 17 फरवरी से दैनिक आधार पर सुनवाई करेगी। यह सुनवाई दस दिन चलेगी।

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पीठ ने वरिष्ठ वकील फली एस नरीमन सहित अन्य वकीलों की इस आपत्ति को खारिज कर दिया कि पुनर्विचार याचिका पर विचार करते हुए किसी कानूनी मसले को बड़ी पीठ के पास नहीं भेजा जा सकता है। वर्ष 2018 में सबरीमाला मंदिर में दिए गए फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार करते हुए गत वर्ष 14 नवंबर को पांच सदस्यीय पीठ ने कहा था कि सबरीमाला मंदिर की तरह ही मुस्लिम महिलाओं के दरगाह व मस्जिदों में प्रवेश, दाउदी वोहरा समुदाय में महिलाओं में  ‘खतना’, गैर पारसी युवक से शादी करने वाली पारसी महिलाओं को होली फायर में प्रवेश पर रोक आदि भी मसले हैं, इनका भी निपटारा आवश्यक है।
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जिसके बाद मामले पर सुनवाई नौ सदस्यीय पीठ कर रही है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश देने के फैसले से उठे प्रश्न पर व्यापक मसले अधिकार बनाम आस्था को निर्धारित करने का फैसला किया था।
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वकील बताएं किस का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं 
सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न पक्षों की ओर से पेश वकीलों को यह सूचित करने का निर्देश दिया कि वे किसका प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इसी के बाद पीठ उन्हें बहस के लिए समय आवंटित करेगी। पीठ ने कहा, केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता 17 फरवरी को बहस शुरू करेंगे और उनके बाद वरिष्ठ वकील के परासरन बहस करेंगे।

इन सवालों का परीक्षण करेगी नौ सदस्यीय पीठ

  • 1. अनुच्छेद-25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में गुंजाइश व  दायरा क्या है?
  • 2. व्यक्ति की स्वतंत्रता और धर्म व पंथ के बीच पारस्परिक प्रभाव क्या है?
  • 3 क्या धार्मिक अधिकार, मौलिक अधिकार केतहत है, पब्लिक ऑर्डर, नैतिकता और स्वास्थ्य को छोड़कर ।
  • 4. अनुच्छेद-25 एवं 26 के तहत नैतिकता का दायरा क्या है?
  • 5. धार्मिक स्वतंत्रता में न्यायिक परीक्षण का दायरा क्या है?
  • 6. अनुच्छेद-25(2)(बी) के तहत हिंदू वर्ग से क्या मतलब है?
  • 7. क्या वह व्यक्ति जो किसी धर्म विशेष से ताल्लुक नहीं रखता है क्या वह जनहित याचिका के माध्यम से उस धर्म या उस धर्म की मान्यताओं पर सवाल उठा सकता है?
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