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Sabarimala: सबरीमाला सोना घोटाले मामले के दूसरे आरोपी मुरारी बाबू का निधन, सोने के पैनलों के गबन का था आरोप

Sat, 13 Jun 2026 10:34 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sat, 13 Jun 2026 10:34 AM IST
सार

Sabarimala Gold Theft Case: सबरीमाला सोना घोटाले मामले के दूसरे आरोपी और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व अधिकारी मुरारी बाबू का कैंसर के कारण निधन हो गया। वह मंदिर से हटाए गए सोने की परत वाले पैनलों के कथित गबन मामले में जांच का सामना कर रहे थे। उन पर आय से अधिक संपत्ति, प्रशासनिक अनियमितताओं और अन्य विवादों के भी आरोप लगे थे। 

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Sabarimala gold theft case second accused Murari Babu passed away misappropriating gold panels
सबरीमाला मंदिर विवाद से जुड़े पूर्व अधिकारी का निधन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

केरल के चर्चित सबरीमाला सोना घोटाले से जुड़े दूसरे आरोपी और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी मुरारी बाबू का शनिवार को निधन हो गया। वह कैंसर से पीड़ित थे और कोच्चि के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनकी मौत ऐसे समय हुई है जब सबरीमाला मंदिर से जुड़े सोने की परत वाले पैनलों के कथित गबन और अन्य वित्तीय अनियमितताओं की जांच अब भी जारी है। इस मामले ने वर्षों से केरल की धार्मिक और प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक चर्चा पैदा की हुई है।

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क्या था सबरीमाला सोना घोटाले का मामला?

सबरीमाला मंदिर के दरवाजों के फ्रेम और द्वारपालक मूर्तियों पर लगे सोने की परत वाले पैनलों को हटाने और उनके कथित गबन को लेकर जांच शुरू हुई थी। आरोप था कि मंदिर से हटाए गए सोने की परत वाले पैनलों का सही रिकॉर्ड नहीं रखा गया और उनकी हेराफेरी की गई। इसी मामले में मुरारी बाबू को आरोपी बनाया गया था। पूछताछ के दौरान उन्होंने दावा किया था कि सोने के पैनलों को तांबे के पैनल के रूप में दर्ज करने की प्रक्रिया मंदिर के पुजारी के एक पत्र के आधार पर की गई थी। हालांकि जांच एजेंसियां इस दावे की भी जांच कर रही थीं।

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मुरारी बाबू पर और कौन-कौन से आरोप लगे थे?

विजिलेंस जांच के दौरान मुरारी बाबू का नाम कई अन्य विवादों में भी सामने आया था। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया था कि टीडीबी में अपेक्षाकृत निचले पद पर रहने के बावजूद उन्होंने अपने कार्यकाल में करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की। चंगनासेरी स्थित उनकी पैतृक जमीन पर बने आलीशान मकान की भी जांच की गई थी। इसके अलावा प्रमुख मंदिर उत्सवों में हाथियों की आपूर्ति से जुड़े ठेकों में कथित अनियमितताओं, मंदिर परिसर से सोने-चांदी की वस्तुएं गायब होने और प्रशासनिक फैसलों को लेकर भी सवाल उठे थे।

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क्या सबरीमाला में उनकी नियुक्ति भी विवादों में रही थी?

सबरीमाला जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थल पर उनकी नियुक्ति को लेकर भी विवाद हुआ था। आरोपों का सामना कर रहे कर्मचारियों को ऐसी जगहों पर तैनात न करने संबंधी हाई कोर्ट के निर्देशों के बावजूद बाद में उन्हें सबरीमाला में प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त किया गया था। विजिलेंस की जांच में यह भी सामने आया था कि उन्होंने कथित रूप से देवस्वोम बोर्ड को पूरी जानकारी दिए बिना द्वारपालक मूर्तियों पर सोने की परत चढ़ाने के काम को लेकर एक निजी कंपनी से बातचीत की थी। इन आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया था।

पुलिस सेवा छोड़कर देवस्वोम बोर्ड तक कैसे पहुंचे थे मुरारी बाबू?

मुरारी बाबू एक साधारण परिवार से आते थे। वर्ष 1994 में उन्होंने पुलिस कांस्टेबल के रूप में चयन प्राप्त किया था, लेकिन प्रशिक्षण पूरा होने से पहले ही नौकरी छोड़ दी। इसके बाद 1997 में वह त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड से जुड़े। अपनी सेवा के दौरान उन्होंने एट्टुमानूर, वाइकोम और थिरुनक्कारा जैसे प्रमुख मंदिरों में विभिन्न प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं। समय के साथ वह बोर्ड के प्रभावशाली अधिकारियों में गिने जाने लगे, लेकिन बाद में कई विवादों और जांचों के चलते उनका नाम सुर्खियों में आ गया।



मुरारी बाबू के निधन के साथ सबरीमाला सोना घोटाले मामले में के एक प्रमुख आरोपी का अध्याय समाप्त हो गया है, लेकिन मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है। जांच एजेंसियां अब भी कथित वित्तीय अनियमितताओं, सोने की परत वाले पैनलों के गबन और संबंधित प्रशासनिक फैसलों की जांच कर रही हैं। उनकी मौत से कुछ सवाल हमेशा के लिए अनुत्तरित रह सकते हैं, लेकिन मामले से जुड़े दस्तावेज, अन्य आरोपी और जांच रिपोर्ट आगे की कार्रवाई का आधार बने रहेंगे। केरल में यह मामला धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस का विषय बना हुआ है।

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