सुन्नी वक्फ बोर्ड का दावा- राम मंदिर को लेकर पक्षकारों में बनी बात, अभी खुलासा नहीं
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सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील एस रिजवी ने कहा कि मध्यस्थता समिति से पहले अदालत के बाहर, सभी पक्षकारों ने अपने मामले को रखा है और कुछ बात भी बनी जिसको लेकर मैं अभी खुलासा नहीं कर सकता हूं। अच्छी चीजें कभी देर से नहीं होती।
S Rizvi, lawyer Sunni Waqf Board in #AyodhyaCase: Outside the court, before the mediation committee, parties have put across their case&reached some terms that I can't disclose right now.Good things are never late, if you want to do things you can do them at the last moment also. pic.twitter.com/sTY3WMzmzx
— ANI (@ANI) October 17, 2019विज्ञापन
वकील एस रिजवी ने कहा कि मैं अभी यह खुलासा नहीं कर सकता हूं कि वे बातें क्या थी। अच्छी चीजों में कभी देरी नहीं होती है, यदि आप चीजें करना चाहते हैं तो उसे अंतिम क्षणों में भी किया जा सकता है।
सुन्नी वक्फ बोर्ड ने वापस नहीं लिया दावा
सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जफर फारुकी ने साफ किया कि अयोध्या मामले में शीर्ष अदालत में हलफनामा दाखिल कर अपना दावा वापस लेने की टीवी चैनलों पर चल रहीं खबरें निराधार हैं। वक्फ बोर्ड की ओर से सुप्रीम कोर्ट में किसी भी तरह का हलफ नामा दाखिल नहीं किया गया है।
सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मध्यस्थता पैनल में सेटलमेंट का प्रस्ताव जरूर दिया है लेकिन उसका खुलासा नहीं कह सकता। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव एवं बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक व मुस्लिम पक्ष के वकील जफरयाब जिलानी ने भी साफ किया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने दावा वापस नहीं लिया है।
जफरयाब जिलानी ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में किसी भी तरह का हलफनामा दाखिल नहीं किया है, इससे बाबरी मस्जिद का दावा छोड़ने का सवाल ही पैदा नहीं होता। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अगर मिडिएशन कमेटी के सामने किसी भी तरह का प्रस्ताव दिया है तो उसकी मुझे जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है। चीफ जस्टिस 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं, इससे पहले ही फैसला आने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा मुस्लिम पक्ष के वकीलों की ओर से सबूतों के बुनियाद पर बहस की गई है, इससे हमारा पक्ष मजबूत है। फैसला मुस्लिम पक्ष में आने की पूरी उम्मीद है।
सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला हो, अमन कायम रहे
सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला हो, अमन कायम रहे
आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्य ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि आज ऐतिहासिक दिन था, जिसमें सबसे बड़े और संवेदनशील मामले की सुनवाई पूरी हुई है।
हमारी आस्था शीर्ष अदालत की न्याय प्रणाली पर है, उम्मीद है सुप्रीम कोर्ट का फैसला जो भी आएगा वह हक और इंसाफ की बुनियाद पर होगा। इस फैसले को लेकर देश के साथ ही दुनिया की निगाह भी लगी हुई है, हमारी देश की जनता से अपील है कि शीर्ष अदालत का जो भी फैसला हो अमन कायम रखें।
मरकजी शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने दावा वापस नहीं लिया है। बल्कि मध्यस्थता कमेटी के सामने एक सुझाव रखा है। कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई। अब एक महीने में किसी भी दिन फैसला सुना दिया जाएगा। लिहाजा दोनों समुदाय के लोग गंगा-जमुनी तहजीब को बनाए रखें और सम्मान के साथ फैसले को कबूल करें।
आल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि हमें उम्मीद है कि जल्द ही अयोध्या मामले का मुकम्मल हल निकलेगा। देश की जनता को देश की सर्वोच्च अदालत और संविधान पर पूरा भरोसा है। फैसला जो भी हो, हर भारतीय को उसका स्वागत करना चाहिए। जिसको देश के संविधान पर भरोसा नहीं उसको मुल्क में रहने का अधिकार नहीं है।
काजी-ए-शहर के मुफ्ती इरफान मियां फरंगी महल सुनवाई के अंतिम दिन सुन्नी वक्फ बोर्ड भले ही अपने स्टैंड से मुकर जाए, लेकिन बाबरी मस्जिद का मामला देश के करोड़ों मुसलमानों के दिलों से जुड़ा है। जहां तक फैसले का सवाल है, तो माननीय सर्वोच्च न्यायालय अयोध्या मामले को लेकर जो भी फैसला देगा, वह हम सभी को मान्य होगा।