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S Jaishankar: एस जयशंकर ने की विदेश नीति पर बात, कहा- भारत खुद को वैश्विक मित्र के तौर पर स्थापित कर रहा

Sat, 02 Nov 2024 07:18 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Sat, 02 Nov 2024 07:18 PM IST
सार

विदेश मंत्री ने कहा कि हमारे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक कारक ठीक से काम कर रहे हैं। क्योंकि हम रूढ़िवादी सभ्यता नहीं हैं। साथ ही आत्मविश्वास भी हमारी क्षमता का एक बड़ा पहलू है, जिसके जरिये हम दुनिया के सामने आते हैं।

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S Jaishankar spoke on foreign policy, said- India is establishing itself as a global friend
एस जयशंकर - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को भारत के वैश्विक संबंधों और विदेश नीति को लेकर बात की। दिल्ली में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में एस जयशंकर ने कहा कि भारत खुद को वैश्विक मित्र के तौर पर स्थापित कर रहा है। भारत अधिक से अधिक देशों के साथ मित्रता करना चाहता है। 
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उन्होंने कहा कि इस वक्त हमारे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक कारक ठीक से काम कर रहे हैं। क्योंकि हम रूढ़िवादी सभ्यता नहीं हैं। साथ ही आत्मविश्वास भी हमारी क्षमता का एक बड़ा पहलू है, जिसके जरिये हम दुनिया के सामने आते हैं। अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया को क्वाड से लाभ हुआ है। यह इतिहास की झिझक पर काबू पाने के उदाहरण हैं। 
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात और इस्राइल, जो रूस और फ्रांस के साथ मिलकर बहुध्रुवीयता पर बयान दे रहे थे, वे पिछले दशक में बहुत बदल गए हैं। मुझे लगता है कि इसका अधिकांश श्रेय पीएम मोदी के व्यक्तिगत हित और नेतृत्व को दिया जाना चाहिए। याद रखें कि इनमें से कम से कम तीन देश ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले तीन दशकों में कोई उच्च-स्तरीय दौरा नहीं देखा था। कुछ मामलों में हम पर अपनी बातचीत को सीमित करने या कुछ मामलों में लंबे समय से चले आ रहे वैचारिक संदेह को दूर करने का दबाव था।
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विदेश मंत्री ने कहा कि आज विश्व व्यवस्था में भारत की उपस्थिति प्रतिस्पर्धा को भी आकर्षित करती है। जैसे-जैसे हम एक अग्रणी शक्ति बनने की ओर आगे बढ़ेंगे, यह और बढ़ेगा। प्रमुख शक्तियों के साथ संबंध बनाना भी अपने आप में एक चुनौती है। वे जितने अधिक वैश्विक होंगे, उनकी गतिविधियों और रुचियों का दायरा उतना ही व्यापक होगा। कुछ अधिक एकाग्र हो सकते हैं, कुछ कम और कुछ अलग भी हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि कभी-कभी दोस्तों के दूसरे दोस्त भी होते हैं जो जरूरी नहीं कि हमारे हों। आप समय-समय पर सुनेंगे कि हमारे समकालीन यथार्थवाद को किसी प्रकार की विरासत में मिली हठधर्मिता के रूप में पेश किया जाता है। ऐसा कुछ नहीं है, बल्कि यह वास्तव में एक दिमागी खेल है।


डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता जैसी संवेदनशीलताएं हमेशा भागीदारों के मूल्यांकन में कारक रहेंगी। कुछ मित्र दूसरों की तुलना में अधिक जटिल भी हो सकते हैं और हमेशा परस्पर सम्मान की संस्कृति या कूटनीतिक शिष्टाचार के लोकाचार को साझा नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने समय-समय पर अपने घरेलू मुद्दों पर टिप्पणियां देखी हैं। एक देश के लिए जो स्वतंत्रता है वह दूसरे के लिए हस्तक्षेप बन सकती है।
 
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