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रूस-यूक्रेन तनाव: 100 डॉलर के करीब पहुंचा कच्चा तेल, साढ़े सात साल में सबसे उच्च स्तर, यूक्रेन में सेना भेजने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़े दाम

Wed, 23 Feb 2022 03:11 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 23 Feb 2022 03:11 AM IST
सार

मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 99.38 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। हालांकि, इस वायदा भाव पर कुछ मुनाफावसूली होने से आखिर में यह 98 डॉलर प्रति बैरल से थोड़ा ऊपर बंद हुआ। इससे पहले ब्रेंट क्रूड सितंबर, 2014 में 99 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया था।

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Russia Ukraine tension: Crude oil reached near 100 Dollar highest level in seven and a half years Prices increased in the international market after sending troops to Ukraine
क्रूड ऑयल (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock

विस्तार

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन में सेना भेजने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं। यह सितंबर, 2014 के बाद इसका साढ़े सात साल का उच्चतम स्तर है। यूक्रेन संकट गहराने से दुनियाभर में कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इससे कीमतों में तेजी आई है।

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मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 99.38 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। हालांकि, इस वायदा भाव पर कुछ मुनाफावसूली होने से आखिर में यह 98 डॉलर प्रति बैरल से थोड़ा ऊपर बंद हुआ। इससे पहले ब्रेंट क्रूड सितंबर, 2014 में 99 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया था। जानकारों का कहना है कि महामारी की रफ्तार थमने के बाद दुनियाभर में कच्चे तेल की मांग बढ़ी है। ऐसे में सऊदी अरब के बाद दुनिया का दूसरे सबसे बड़े तेल निर्यातक रूस पर प्रतिबंध लगता है तो वहां से आपूर्ति नहीं होगी। इससे कीमतों में तेजी आएगी और कच्चे तेल जल्द ही 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच जाएगा। 
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भारत पर ज्यादा असर नहीं
भारत के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी बहुत कम है। 2021 में भारत ने रूस से प्रतिदिन 43,400 बैरल तेल का आयात किया था, जो उसके कुल आयात का करीब एक फीसदी है। इसके अलावा, रूस से भारत का कोयला आयात 18 लाख टन रहा, जो कुल आयात का 1.3 फीसदी है। ऐसे में रूस से होने वाली आपूर्ति भारत के लिए अधिक चिंता का विषय नहीं है, लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतें उसकी मुश्किल जरूर बढ़ा सकती हैं। 
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विधानसभा चुनावों के बाद महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल
वैश्विक बाजार में तेजी के बावजूद पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों को देखते हुए घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर हैं। पिछले 110 दिनों से कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। इससे रिफाइनरी कंपनियों का मार्जिन प्रभावित हो रहा है। जानकारों का कहना है कि विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी होगी। मंगलवार को नई दिल्ली में पेट्रोल 95.41 रुपये और डीजल 86.67 रुपये लीटर था।


उत्पादन बढ़ाने में आनाकानी कर रहा ओपेक
इस बीच, रूस सहित तेल उत्पादन देशों के संगठन ओपेक ने रविवार की बैठक के बाद कच्चे तेल का अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने से इनकार कर दिया। इससे पहले ओपेक ने दो फरवरी को हुई बैठक में उत्पादन चार लाख बैरल प्रतिदिन बढ़ाने की बात कही थी। लेकिन, अरब देशों के मंत्रियों ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि अब महामारी का जोखिम कर हो रहा है और अर्थव्यवस्थाएं खुल रही हैं।

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