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यूक्रेन संकट पर पूर्व राजनयिकों की राय: भारत को बरतनी होगी सावधानी, रूस रहा है मजबूत साझेदार 

Thu, 24 Feb 2022 08:04 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Thu, 24 Feb 2022 08:04 PM IST
सार

पूर्व राजनयिक जी पार्थसारथी ने कहा कि भारत को स्थिति के मूल को देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि रूस बहुत कठिन समय में भारत के साथ खड़ा रहा है।
 

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Russia's military offensive against Ukraine: Ex-diplomats say it will be 'tightrope walk' for India diplomatically
यूक्रेन और रूस पर भारत का पक्ष - फोटो : पीटीआई

विस्तार

यूक्रेन संघर्ष पर भारत के लिए प्रतीक्षा करो और देखो के दृष्टिकोण की वकालत करते हुए पूर्व भारतीय राजनयिकों ने गुरुवार को कहा कि नई दिल्ली को कूटनीतिक रूप से सख्ती से आगे बढ़ना होगा क्योंकि मास्को दशकों से हमारा मजबूत साझीदार रहा है। रूस ने गुरुवार को यूक्रेन पर हमला किया, जिससे दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर सैन्य टकराव पर गंभीर चिंताएं पैदा हो गईं।

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पार्थसारथी बोले, देखो और प्रतीक्षा करो 
पाकिस्तान सहित कई देशों में भारत के दूत रहे जी पार्थसारथी ने कहा कि यह भारत के लिए एक जटिल स्थिति है और सरकार को इस पर करीबी फैसला लेना होगा। उन्होंने पीटीआई से कहा कि मेरा खुद का मानना है कि इस पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मतदान होगा। यह देखा जाना बाकी है कि हम इसका विरोध करते हैं या इससे परहेज करते हैं। 
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यह पूछे जाने पर कि क्या भारत को संतुलन बनाए रखना होगा, उन्होंने हां में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि हमें एक निर्णय लेना होगा और देखना होगा कि दूसरे कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। चीन भी इस समय सावधानी से काम कर रहा है। इसलिए हमें यह पता लगाना होगा कि दूसरे कैसे प्रतिक्रिया देते हैं।  

मास्को में भी रह चुके पार्थसारथी ने कहा कि भारत को स्थिति के मूल को देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि रूस बहुत कठिन समय में भारत के साथ खड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए एक कठिन कदम है क्योंकि उसे दुनिया क्या सोचती है और अपने लोग क्या सोचते हैं, इनके बीच संतुलन बनाना होगा। असल में बात यह है कि रूस एक बहुत विश्वसनीय मित्र बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पश्चिम भी पूरे मामले में निर्दोष नहीं रहा है और नाटो के माध्यम से रूस को कोने में धकेल दिया। 




सूद बोले, संवेदनशील कूटनीति की जरूरत 
पूर्व भारतीय राजनयिक राकेश सूद ने भी इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए भारत को कूटनीतिक चालाकी और संवेदनशील कूटनीति की जरूरत है। सूद ने कहा कि आखिरकार किसी भी नीति को भारत के हितों की सेवा करनी होती है। रूस दशकों से भारत का एक दृढ़ भागीदार रहा है और इसलिए, हमारे लिए रूसी कार्रवाई का समर्थन करना या रूसी कार्रवाई की बहुत आलोचना करना मुश्किल होगा। 

हमारी जो भी चिंताएं हैं, हम उन्हें निजी तौर पर रूसी नेताओं के साथ साझा करेंगे। लेकिन किसी भी मामले में एक देश के रूप में हम एकतरफा प्रतिबंधों को स्वीकार नहीं करते हैं। हमने हमेशा एकतरफा प्रतिबंधों के खिलाफ बात की है। जो प्रतिबंध लगाए गए हैं (रूस के खिलाफ) संयुक्त राष्ट्र द्वारा नहीं लगाए गए हैं। सूद ने कहा कि ऐसी कई कूटनीतिक स्थितियां हैं, जिन्हें ब्लैक एंड व्हाइट के आधार पर आसानी से नहीं आंका जा सकता। वहीं, 2009 और 2011 के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका में भारत की राजदूत रहीं मीरा शंकर ने कहा कि अभी सरकार ने प्रतीक्षा करें और देखें का दृष्टिकोण अपनाया है।

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