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आचार संहिता लागू होने के बाद सभाएं और जुलूस कराने से संबंधित ये हैं नियम

Sun, 07 Oct 2018 03:48 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 07 Oct 2018 03:48 PM IST
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Rules for Meetings and March after implementation of code of conduct

आचार संहिता चुनाव की तारीख की घोषणा होने के साथ लागू हो जाती है और नतीजे आने तक जारी रहती है। शनिवार को चुनाव आयोग ने पांच राज्यों (मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना) में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का एलान कर दिया है। इसी के साथ इन राज्यों में भी आचार संहिता लागू हो चुकी है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आचार संहिता लागू होने के बाद सभा और जुलूस के लिए किन नियमों का पालन करना पड़ता है-


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आचार संहिता चुनाव की तारीख की घोषणा होने के साथ लागू हो जाती है और नतीजे आने तक जारी रहती है। शनिवार को चुनाव आयोग ने पांच राज्यों (मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना) में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का एलान कर दिया है। इसी के साथ इन राज्यों में भी आचार संहिता लागू हो चुकी है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आचार संहिता लागू होने के बाद सभा और जुलूस के लिए किन नियमों का पालन करना पड़ता है-

सभाओं से संबंधित नियम-

- किसी पार्टी या दल की प्रस्तावित सभा के बारे में स्थानीय पुलिस अधिकारियों को जानकारी होनी चाहिए।

- स्थानीय पुलिस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एक दल या पार्टी की सभा के स्थान पर कोई निर्बाधात्मक या प्रतिबंधात्मक आदेश लागू तो नहीं है।

- प्रस्तावित सभा के लिए दल या पार्टी द्वारा लाउड स्पीकर के उपयोग या अन्य किसी सुविधा के लिए सक्षम अधिकारी से अनुज्ञा या अनुज्ञाप्ति प्राप्त की है या नहीं यह स्थानीय पुलिस को सुनिश्चित करना चाहिए।

- सभा में विघ्न डालने वाले या अव्यवस्था फैलाने का प्रयत्न करने वाले व्यक्तियों से स्थानीय पुलिस को सख्ती से निपटना चाहिए तथा आयोजकों से मदद लेनी चाहिए।

- पुलिस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि स्थाई अथवा गतिशील वाहनों पर लगे लाउड स्पीकरों का प्रयोग सुबह 06 बजे से पहले या रात 10 बजे के बाद और संबंधित अधिकारी की बिना अनुमति के न किया जाए।

- स्थानीय पुलिस को जुलूस के आयोजन से पहले ही यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि जुलूस किस समय और किस स्थान से शुरू होगा और किस रास्ते से होकर जाएगी और कहां जाकर समाप्त होगी।

- जुलूस के आयोजन स्थल, निकलने वाले मार्ग एवं जुलूस के समाप्ति स्थान तक पुलिस की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।

- पुलिस को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि जहां से होकर जुलूस गुजरेगा उसमें कोई निर्बाधात्मक आदेश तो लागू नहीं है।

- जब तक समक्ष अधिकारी द्वारा जुलूस के लिए विशेष रूप से छूट न दी जाए तब तक निर्बन्धों का पालन होना चाहिए। इसके अलावा जुलूस के समय यातायात व्यवस्था का भी विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

- यदि दो पार्टियों के अलग अलग जुलूस एक ही रास्ते से निकलने वाले हों तो उनके समय में आंशिक परिवर्तन कर जुलूसों में शामिल लोगों के आपसी टकराव की संभावना से बचा जा सकता है। इसके लिए आवश्यकता हुई तो राजनैतिक दलों के नेताओं से पुलिस अधिकारियों द्वारा संपर्क किया जा सकता है।

- पार्टियां यथासंभव उन स्थानों के पास जहां दूसरे द्वारा सभाएं आयोजित की जा रही हैं जुलूस न निकालें।

- जुलूस के दौरान यह सुनिश्चित करें कि किसी कार्यकर्ता के पास हथियार या फिर धारदार हथियार तो नहीं है।

ये दिशानिर्देश यानि आचार संहिता देश की सभी राजनीतिक पार्टियों पर लागू किया जाता है। जिसका उद्देश्य पार्टियों के बीच मतभेद टालने, शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष चुनाव कराना होता है।  आचार संहिता द्वारा ये सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी राजनीतिक पार्टी, केंद्रीय या राज्य की अपने आधिकारिक पदों का चुनावों में लाभ हेतु गलत इस्तेमाल न करें।
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