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Supreme Court: FAIVM ने दाखिल की याचिका, MSME से माल खरीदारों को 45 दिन में भुगतान वाले नियम को दी चुनौती

Wed, 17 Apr 2024 05:44 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 17 Apr 2024 05:44 AM IST
सार

Supreme Court: फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल (एफएआईवीएम) ने याचिका दायर कर सूक्ष्म लघु उद्यमों को माल खरीदारों को 45 दिनों से अधिक का क्रेडिट देने से वंचित करने वाले नियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

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Rule of payment to goods buyers from MSME within 45 days is challenged in the Supreme Court
Supreme Court - फोटो : ANI (File)

विस्तार

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल ने याचिका दायर कर सूक्ष्म लघु उद्यमों को माल खरीदारों को 45 दिनों से अधिक का क्रेडिट देने से वंचित करने वाले नियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में वित्त अधिनियम 2022 में जोड़ी गई धारा 43(बी)(एच) को रद्द करने की मांग की गई है। 

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संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में कहा गया है यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14 और 19(1) (जी) का उल्लंघन है। रवींद्र कुमार गौड़ के माध्यम से दायर  फेडरेशन की याचिका में कहा गया है कि वित्त अधिनियम 2022 की नई जोड़ी गई धारा 43(बी)(एच) में सूक्ष्म लघु उद्यमों को अपने माल के खरीदारों को 45 दिनों से अधिक का क्रेडिट देने से वंचित करने का प्रावधान है। इस प्रावधान के तहत, यदि एमएसएमई इकाई खरीदारों को 45 दिनों से अधिक का क्रेडिट देती है तो खरीदार को कर छूट और भारतीय रिजर्व बैंक के अधिसूचित बैंक दरों के तीन गुना पर चक्रवृद्धि ब्याज के साथ दंडित किया जाता है। यह प्रावधान एक अप्रैल, 2024 से प्रभावी है।  

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निर्माताओं के बीच वर्गीकरण बनाया
याचिका में यह भी कहा गया कि जोड़ी  गई धारा 43(बी)(एच) का प्रभाव है कि भारत सरकार ने उन निर्माताओं के बीच एक वर्गीकरण बनाया है जो खरीदारों को केवल 45 दिनों के लिए ऋण दे सकते हैं। ऐसे निर्माता जो खरीदारों को 45 दिनों से अधिक समय के लिए ऋण दे सकते हैं भी इसमें शामिल हैं। 

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याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि इससे लघु उद्योगों का व्यवसाय मध्यम स्तर के उद्योगों में स्थानांतरित होने की आशंका है। लघु उद्योग और मध्यम स्तर के उद्योगों के बीच कर भेदभाव से बड़ी संख्या में लघु उद्योग अपनी बाजार हिस्सेदारी खो सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने वकील से पूछा-ईवीएम पर अविश्वास के आंकड़े कहां से लाए
वीवीपैट से निकलने वाली पर्चियों का मिलान ईवीएम से करने के मामले की सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान जस्टिस संजीव खन्ना व जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता एडीआर के वकील प्रशांत भूषण ने अपनी दलील में कहा कि ज्यादातर मतदाता ईवीएम पर भरोसा नहीं करते। इस पर जस्टिस दत्ता ने भूषण से पूछा, आपको यह आंकड़ा कहां से मिला। 

जवाब में भूषण ने कहा, एक सर्वेक्षण हुआ था। जब जस्टिस दत्ता ने कहा, हम निजी सर्वेक्षणों पर विश्वास नहीं करते। आंकड़े राय पर नहीं, प्रदर्शन पर आधारित होने चाहिए। हम चुनाव आयोग से आंकड़े प्राप्त करेंगे। 

मतदाता को सही मत पड़ने का भरोसा होना चाहिए
एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने कहा, ईवीएम में खामियों की बात पहले भी आ चुकी है। हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि मतदाताओं को विश्वास हो, उसने जिस प्रत्याशी को वोट दिया है, वह उसी को गया हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आमतौर पर मानवीय हस्तक्षेप के बिना मशीन आपको सटीक परिणाम देती है। समस्या तब उत्पन्न होती है, जब मानवीय हस्तक्षेप होता है।

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