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आरएसएस की महिला शाखा ने कहा: उचित शिक्षा के बाद ही हो लड़कियों की शादी, लेकिन आयु सीमा थोपना उचित नहीं
Sun, 27 Feb 2022 09:00 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Sun, 27 Feb 2022 09:00 PM IST
सार
राष्ट्रीय सेविका समिति ने कहा है कि इस तरह के मुद्दों को जन जागरूकता और व्यापक चर्चाओं के साथ निपटाया जाना बेहतर होगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : iStock
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विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की निर्णय लेने वाले सर्वोच्च निकाय की वार्षिक बैठक से ठीक पहले इसकी महिला शाखा राष्ट्रीय सेविका समिति ने रविवार को कहा कि लड़कियों को उचित शिक्षा प्राप्त करने के बाद ही शादी करना चाहिए। इसने यह भी कहा कि शादी की उम्र थोपने से संभव है कि इच्छित परिणाम न मिलें।
आरएसएस की प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक 11 मार्च से प्रारंभ होगी। इस दौरान लड़कियों की शादी की आयु 18 साल से बढ़ाकर 21 साल करने समेत कई मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। दिसंबर में संसद के शीत सत्र के दौरान केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री स्मृति ईरानी ने इस पर विधेयक पेश किया था।
इस विधेयक में लड़कियों की शादी की उम्र पुरुषों की तरह ही 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 साल करने का प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन इस विधेयक को लोकसभा ने विस्तृत चर्चा के लिए संसद की स्थायी समिति के पास भेज दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने इस प्रस्तावित विधेयक को बहुत अहम बताया है।
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'विधेयक को लेकर देखने को मिलीं दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं'
राष्ट्रीय सेविका संघ की प्रचार प्रमुख सुनीला सोहवानी ने कहा कि लड़कियों को उचित परवरिश और शिक्षा के बाद ही शादी करनी चाहिए ताकि वह सक्षम बन सकें। उन्होंने कहा कि समिति बाल विवाह का विरोध करती है। विधेयक को लेकर उन्होंने कहा कि संगठन ने समाज से प्रतिक्रिया ली है और हमें इस पर विभिन्न राय मिली हैं।
सोहवानी ने कहा, 'हमें अपने कार्यकर्ताओं और समाज से जो प्रतिक्रियाएं मिली हैं, उनमें लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने के समर्थन में और विरोध में, दोनों तरह की राय देखने को मिली हैं।' उन्होंने कहा कि यह देखा गया है कि इस तरह के सामाजिक मुद्दों पर समाज पर कुछ भी थोपने से इच्छित परपिणाम देखने को नहीं मिलते हैं।
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आरएसएस की प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक 11 मार्च से प्रारंभ होगी। इस दौरान लड़कियों की शादी की आयु 18 साल से बढ़ाकर 21 साल करने समेत कई मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। दिसंबर में संसद के शीत सत्र के दौरान केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री स्मृति ईरानी ने इस पर विधेयक पेश किया था।
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इस विधेयक में लड़कियों की शादी की उम्र पुरुषों की तरह ही 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 साल करने का प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन इस विधेयक को लोकसभा ने विस्तृत चर्चा के लिए संसद की स्थायी समिति के पास भेज दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने इस प्रस्तावित विधेयक को बहुत अहम बताया है।
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'विधेयक को लेकर देखने को मिलीं दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं'
राष्ट्रीय सेविका संघ की प्रचार प्रमुख सुनीला सोहवानी ने कहा कि लड़कियों को उचित परवरिश और शिक्षा के बाद ही शादी करनी चाहिए ताकि वह सक्षम बन सकें। उन्होंने कहा कि समिति बाल विवाह का विरोध करती है। विधेयक को लेकर उन्होंने कहा कि संगठन ने समाज से प्रतिक्रिया ली है और हमें इस पर विभिन्न राय मिली हैं।
सोहवानी ने कहा, 'हमें अपने कार्यकर्ताओं और समाज से जो प्रतिक्रियाएं मिली हैं, उनमें लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने के समर्थन में और विरोध में, दोनों तरह की राय देखने को मिली हैं।' उन्होंने कहा कि यह देखा गया है कि इस तरह के सामाजिक मुद्दों पर समाज पर कुछ भी थोपने से इच्छित परपिणाम देखने को नहीं मिलते हैं।