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RSS: सामाजिक कार्यों में महिलाओं की भूमिका बढ़ाएगा आरएसएस, इन योजनाओं में मिलेगी अहम जिम्मेदारी
Sun, 12 Mar 2023 04:09 PM IST
शक्तिराज सिंह
अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Sun, 12 Mar 2023 04:09 PM IST
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RSS: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आम्बेकर
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विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) सामाजिक कार्यों में महिलाओं की भूमिका बढ़ाने पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रहा है। महिला सशक्तीकरण, परिवार कल्याण, लैंगिक भेदभाव उन्मूलन के प्रति जागरूकता, सांस्कृतिक कार्यों के प्रति परिवारों में जागरूकता, पर्यावरण संवर्धन और समाज के विभिन्न वर्गों में आपसी सामंजस्य बढ़ाने के उद्देश्य से संगठन द्वारा जारी कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में महिला स्वयंसेवकों को ज्यादा सशक्त भूमिका सौंपी जा सकती है। ये कार्यक्रम आरएसएस की महिला विंग राष्ट्र सेविका समिति के माध्यम से संचालित किए जा सकते हैं।आरएसएस सूत्रों के मुताबिक, हरियाणा के समालखा में आयोजित की जा रही संगठन की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में इससे संबंधित विषयों पर विचार किया जा सकता है। विचार-विमर्श के बाद इससे संबंधित एक प्रस्ताव भी पास किया जा सकता है। संघ की सबसे शक्तिशाली संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में पास प्रतिवेदन को आगामी वर्षों में स्वयंसेवकों के माध्यम से संबंधित क्षेत्रों में लागू किया जाता है। इस अर्थ में यह प्रस्ताव बेहद महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
आरएसएस के शताब्दी वर्ष तक संघ देश के हर ब्लॉक स्तर तक पहुंचने की योजना बना रहा है। अभी भी वह देश के 42,613 क्षेत्रों में 68,651 शाखाएं संचालित कर रहा है। इसे बढ़ाकर एक लाख शाखाएं किये जाने की योजना है। राष्ट्र सेविका समिति के द्वारा महिलाओं के लिए अलग से शाखा कार्यक्रम चलाया जा रहा है। संघ महिलाओं की शाखाओं को बढ़ाने के लिए भी विचार कर रहा है। महिला शाखा को दो गुना तक किए जाने का प्रस्ताव है। इसके लिए राष्ट्र सेविका समिति के माध्यम से एक अलग अभियान संचालित किया जाएगा।
'दहेज-दानव को समाप्त करने के लिए अभियान चलाए संघ'
महिला अधिकारों के लिए लगातार मुखर रहने वाली लेखिका क्षमा शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि आरएसएस की यह पहल स्वागत योग्य है। महिलाएं इन विषयों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती हैं और वे इनसे सीधे तौर पर सबसे ज्यादा प्रभावित भी होती हैं, लिहाजा उन्हें इन योजनाओं से सीधे तौर पर जोड़कर ज्यादा सटीकता के साथ लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। इससे महिलाओं का सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण भी होगा।
उन्होंने कहा कि आरएसएस अपने-आपको हिंदू समाज की बेहतरी के लिए काम करने वाला संगठन बताता है। यदि ऐसा है तो उसे सबसे पहले दहेज जैसी समस्या के उन्मूलन के लिए कदम उठाना चाहिए। क्योंकि सच्चाई यह है कि तमाम प्रयासों के बाद भी हमारे समाज से यह समस्या समाप्त नहीं हुई है, बल्कि इसके उलट समय के साथ इसकी मांग और ज्यादा बढ़ती जा रही है।इसलिए यदि संघ महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए कोई कार्य करना चाहता है तो उसे सबसे पहले दहेज उन्मूलन के सामाजिक कार्यक्रम चलाने चाहिए।