तोगड़िया प्रकरण से सतह पर आया संघ परिवार का घमासान
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विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया के अचानक गायब होने और फिर रात में बेहोशी की हालत के बाद तोगड़िया के आए बयान से राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ परिवार के भीतर चल रहा घमासान सतह पर आ गया है।
अपने एनकाउंटर की साजिश की आशंका जताते हुए विहिप नेता ने हालांकि किसी का नाम तो नहीं लिया लेकिन यह कहा कि वह मौत से नहीं डरते और हिंदुत्व के लिए लगातार आवाज उठाते रहेंगे।
उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि विहिप के फायर ब्रांड नेता तोगड़िया संघ परिवार में खुद को बेहद अलग थलग महसूस कर रहे हैं और उनके ऊपर हिंदुत्व के उन मुद्दों पर जोर न देने का दबाव है जिनसे केंद्र सरकार को सरकार चलाने में परेशानी पैदा हो।
विहिप के सूत्रों के अनुसार दस वर्ष की उम्र से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में दीक्षित और पिछले करीब चालीस वर्षों से हिंदुत्व की विचारधारा का एक मुखर चेहरा डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया हिंदुत्व के सिद्धांतों और विचारों में किसी भी तरह की ढील या नरमी बरते जाने के सख्त खिलाफ हैं।
जबकि इन दिनों तोगड़िया इसे लेकर जबरदस्त दबाव में हैं। यह दबाव उस संघ नेतृत्व का है जिसके हिंदुत्व के एजेंडे को बढ़ाने और लागू करने के लिए तोगड़िया प्राण प्रण से प्रतिबद्ध हैं। तोगड़िया पर दबाव है कि वह राम मंदिर निर्माण सहित हिंदुत्व एजेंडे के आठ बिंदुओं को लागू करने के आग्रह को फिलहाल रोक दें, क्योंकि उनके इस आग्रह से केंद्र की भाजपा सरकार की परेशानी बढ़ सकती है।
दबी आवाज में जता रहे विरोध
यह जानकारी देने वाले विश्व हिंदू परिषद से जुड़े सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार के कई फैसलों को लेकर संघ परिवार में इन दिनों जबरदस्त घमासान है। विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल जैसे हिंदुत्व के प्रति कट्टर अनुषांगिक संगठन राम मंदिर निर्माण के लिए संसद द्वारा कानून बनाने को लेकर सरकार की हीलाहवाली से खफा हैं, तो स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय मजदूर संघ और भारतीय किसान संघ केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर परेशान हैं।
हाल ही में खुदरा बाजार में एकल ब्रांड में सौ फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के फैसले ने संघ की स्वदेशी लॉबी को झकझोर दिया है। जहां अन्य अनुषांगिक संगठनों के नेता दबी आवाज में विरोध जता रहे हैं, वहीं विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया परिवार के भीतर और बाहर हिंदुत्व के एजेंडे को जल्दी से जल्दी लागू करने पर खासे मुखर हैं, उसे लेकर न सिर्फ केंद्र सरकार बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शीर्ष नेतृत्व भी बेहद असहज और परेशान है।
ये हैं तोगड़िया की मांगें
सूत्रों का कहना है कि इसलिए संघ नेतृत्व की तरफ से तोगड़िया पर दबाव भी डाला जा रहा है कि वह अपने हिंदुत्व के एजेंडे को फिलहाल विराम दें और राम मंदिर निर्माण और हिंदुत्व के अन्य मुद्दों को जल्दी लागू करने का दबाव न बनाएं।
लेकिन तोगड़िया इसे मानने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने हिंदुत्व समेत अपने जिन आठ बिंदुओं पर शीघ्र अमल के लिए बोलना शुरू किया है उनमें अय़ोध्या में राम जन्मभूमि स्थल पर श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए अदालत के फैसले की प्रतीक्षा किए बिना संसद में प्रस्ताव लाकर कानून बनाना, देश भर में गोवध रोकने के लिए राष्ट्रव्यापी केंद्रीय कानून बनाना और गोरक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को जारी की गई एडवाइजरी को तत्काल वापस लेना, समान नागरिक संहिता लागू करना, जम्मू कश्मीर से धारा 370 अविलंब समाप्त करना, विस्थापित कश्मीरी पंडितों का कश्मीर में पुनर्वास, जिस तरह मुस्लिम युवकों को रोजगार में सहायता देने के लिए अल्पसंख्यक विकास निगम है, उसी तरह करीब दस करोड़ बेरोजगार हिंदू युवकों को रोजगार देने के लिए हिंदू विकास निगम का गठन, किसानों को फसल की लागत का डेढ़ गुना दाम देने का 2014 में किया गया वादा पूरा करना और महंगे इलाज से परेशान जनता के लिए सस्ती स्वास्थ्य योजना शुरू करना शामिल हैं।
अब नहीं तो कब...
सूत्रों के मुताबिक भुवनेश्वर में विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अधिवेशन में तोगड़िया को पद मुक्त करके हाशिए पर डालने की कोशिश भी की गई जो बैठक में मौजूद विहिप प्रतिनिधियों के भारी विरोध के कारण कामयाब नहीं हो सकी। संघ के शीर्ष नेतृत्व से तोगड़िया लगातार कह रहे हैं कि अब 19 राज्यों और केंद्र में भाजपा की सरकार है तब भी हिंदुत्व के उन कार्यक्रमों को तत्काल अमल में नहीं लाया गया जिनके लिए संघ संस्थापक डा. हेडगेवार से लेकर गुरु गोलवलकर समेत संपूर्ण संघ परिवार ने पिछले 90 वर्षों से लगातार जनमत बनाया और संघर्ष किया, तो कब करेंगे। जबकि संघ नेतृत्व हिंदुत्व पर ज्यादा जोर देकर केंद्र और भाजपा की राज्य सरकारों के लिए कोई परेशानी पैदा नहीं करना चाहता। उसे लगता है कि अगर सरकारें अपना कामकाज ठीक से करेंगी तो जनता उन्हें फिर चुनेगी और हिंदुत्व के मुद्दे भी धीरे धीरे लागू होते जाएंगे।