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'उनका साहस और दृढ़ विश्वास...': पाकिस्तानी लेखक तारिक फतेह के निधन पर आया RSS का बयान, जानें क्या कहा

Tue, 25 Apr 2023 10:21 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 25 Apr 2023 10:21 AM IST
सार

तारिक फतेह का सोमवार को 73 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। संघ ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मीडिया और साहित्य जगत में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। 

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RSS on Pakistani-Canadian author Tarek Fatah death praises contribution news and updates
तारिक फतेह के निधन पर आरएसएस ने शोक जताया। - फोटो : Social Media

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से पाकिस्तानी-कनाडाई लेखक तारिक फतेह को श्रद्धांजलि दी गई है। संघ ने कहा कि मीडिया और साहित्य जगत में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। तारिक फतेह का सोमवार को 73 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे पिछले काफी समय से कैंसर से जूझ रहे थे। तारिक के निधन की जानकारी उनकी बेटी नताशा फतेह ने दी। 
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ट्विटर पर एक संदेश में आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि तारिक फतेह एक प्रख्यात विचारक, लेखक और टिप्पणीकार थे। मीडिया और साहित्य जगत में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। वे पूरा जीवन अपने सिद्धांतों और विश्वास के लिए प्रतिबद्ध रहे और अपने साहत और दृढ़ विश्वास के लिए वे सम्मानित रहे। 
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होसबाले ने आगे कहा, "उनके परिवार, दोस्त और उनके चाहने वाले, जो उन्हें हमेशा याद करेंगे, उनके प्रति मेरी संवेदना। मैं उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करता हूं और दिवंगत आत्मा की सद्गति के लिए प्रार्थना करता हूं।"
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बेटी ने ट्वीट में बताया हिंदुस्तान का बेटा
इससे पहले तारिक फतेह की बेटी नताशा ने ट्वीट किया, 'पंजाब के शेर, हिन्दुस्तान के बेटे, कनाडा के प्रेमी, सच बोलने वाले, न्याय के लिए लड़ने वाले, दलितों और शोषितों की आवाज तारिक फतेह अब हमारे बीच नहीं रहे। उनका काम और उनकी क्रांति उन सभी के साथ जारी रहेगी, जो उन्हें जानते और प्यार करते थे। बता दें कि वे भारत के प्रति अपने उदारवादी रुख के कारण यहां के लोगों में खासे लोकप्रिय थे। 

कौन थे तारिक फतेह?
बता दें कि तारिक फतेह का परिवार मुंबई का रहने वाला था। 1947 में जब भारत और पाकिस्तान का विभाजन हुआ तो  उनका परिवार पाकिस्तान के कराची में जाकर बस गया। जहां 20 नवंबर साल 1949 को कराची में तारिक फतेह का जन्म हुआ। मशहूर लेखक तारिक फतेह ने कराची यूनिवर्सिटी से बायोकेमिस्ट्री की पढ़ाई की थी, लेकिन बाद में उन्होंने पत्रकारिता को अपना पेशा बनाया। 

उन्होंने एक पाकिस्तानी टीवी चैनल में काम किया। उससे पहले 1970 में वे कराची सन नाम के अखबार में रिपोर्टिंग करते थे। खोजी पत्रकारिता के कारण वे कई बार जेल भी गए। हालांकि बाद में तारिक पाकिस्तान छोड़ कर सऊदी अरब चले गए। जहां से 1987 में वे कनाडा में बस गए। 

तारिक फतेह की पहचान पाकिस्तानी मूल के कनाडाई लेखक प्रसारक और सेक्युलर उदारवादी कार्यकर्ता के रूप में थी। वे इस्लामी अतिवाद के खिलाफ मुखर होकर बोलते और लिखते रहे।  चेजिंग अ मिराज : द ट्रैजिक इल्लुझ़न ऑफ़ ऐन इस्लामिक स्टेट (Chasing a Mirage: The Tragic Illusion of an Islamic State) उनकी प्रसिद्ध कृति है। वे समलैंगिक व्यक्तियों के सामान अधिकारों और हितों के भी पक्षधर थे। इसके साथ ही बलूचिस्तान में मानवाधिकार के हनन पर भी उन्होंने खूब लिखा और बोला। वे आजाद बलूचिस्तान के पक्षधर के रूप में भी जाने जाते थे। 


पाकिस्तान को हमेशा दिखाया आईना
तारिक फतेह हमेशा से पाकिस्तान के कट्टर आलोचक रहे। उन्होंने कई मौकों पर पाकिस्तान को आईना दिखाने का काम किया। भारत और हिंदुओं के प्रति उनका रुख हमेशा से सकारात्मक रहा। हर बड़े मुद्दे पर वे अपना विचार रखते थे। इस्लाम की कुछ परंपराओं को लेकर उनके विचार विवाद में भी रहे।  कई मुद्दों पर उन्होंने भारत का समर्थन किया। उन्होंने कई बार मोदी सरकार की भी सराहना की थी। एक बयान में उन्होंने कहा था कि मोदी ने बिना एक गोली चलाए पाकिस्तान को भुखमरी की हालत पर ला दिया।
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