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RSS: एकल न्यायाधीश के फैसले को संघ ने HC में दी चुनौती, खुले मैदान में ही रूट मार्च निकालने का दिया था आदेश

Wed, 23 Nov 2022 07:46 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 23 Nov 2022 07:46 PM IST
सार

उच्च न्यायालय ने 4 नवंबर तमिलनाडु में 44 स्थानों पर कुछ शर्तों के साथ भगवा संगठन को कार्यक्रमों की अनुमि दी थी,  जबकि आरएसएस ने राज्य में 50 जगहों पर रैली करने की अनुमति मांगी थी। 

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RSS moves HC challenging order to hold route march in open grounds
आरएसएस (सांकेतिक) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने एक आवेदन के साथ एकल न्यायाधीश के हालिया आदेश को चुनौती देते हुए मद्रास उच्च न्यायालय का रुख किया है। एक न्यायाधीश की पीठ ने संगठन को केवल सभागारों और खुले मैदानों में रूट मार्च और सार्वजनिक सभाओं की अनुमति दी थी। 

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दरअसल, उच्च न्यायालय ने 4 नवंबर तमिलनाडु में 44 स्थानों पर कुछ शर्तों के साथ भगवा संगठन को कार्यक्रमों की अनुमि दी थी,  जबकि आरएसएस ने राज्य में 50 जगहों पर रैली करने की अनुमति मांगी थी। 
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जी. सुब्रमण्यम की ओर से दाखिल आवेदन पत्र में राज्य सरकार के अधिकारियों और पुलिस कर्मियों को अदालत के उस आदेश का पालन न करने के लिए दंडित करने की भी मांग की गई है, जिसमें उन्हें 2 अक्तूबर को मार्च निकालने के लिए अनुमति देने का निर्देश दिया गया था। इसमें राज्य के गृह सचिव, डीजीपी, ग्रेटर चेन्नई के पुलिस आयुक्त और कोरात्तुर पुलिस थाने के निरीक्षक शामिल हैं। 
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न्यायमूर्ति जी. के. इलानथिरैयन ने तय किया था कि रूट मार्च और सभाओं को परिसर या स्टेडियम जैसे परिसर में ही आयोजित किया जाना चाहिए। 

आवेदक ने तर्क दिया कि रिट याचिका पर पारित मूल आदेश को संशोधित करने वाली अवमानना याचिका में न्यायाधीश का आदेश अपने आप में अवैध है और बिना न्यायालय की अवमानना अधिनियम के तहत प्रदत्त अधिकार क्षेत्र के है। 

उन्होंने कहा, अवमानना क्षेत्राधिकार में न आने वाली शक्ति का इस्तेमाल करके रिट याचिका पर पारित आदेश के संशोधन की प्रकृति रूट मार्च की परिभाषा को ही पराजित करती है, जिसकी गारंटी और स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। 


आवेदक ने कहा, न्यायाधीश इस तथ्य को पूरी तरह से भूल चुके थे कि इसी अवधि के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर अन्य राजनीतिक दलों द्वारा प्रदर्शन और आंदोलन की अनुमति दी गई थी। वे इस तथ्य को कोई महत्व देने में विफल रहे कि 2 अक्तूबर को मूल कार्यक्रम के अनुसार अन्य स्थानों और राज्यों, यहां तक कि जम्मू कश्मीर में  रूट मार्च और जनसभाएं हुईं। इसे केवल तमिलनाडु में रोका गया था। 
 
आरएसएस के अधिवक्ता बी. राबू मनोहर ने बताया कि आने वाले दिनों में इसी तरह की चालीस से ज्यादा अपील दायर की जाएंगी। 
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