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आरएसएस नेता सुरेश भैयाजी जोशी बोले, भाजपा के विरोध का मतलब हिंदुओं का विरोध नहीं
Sun, 09 Feb 2020 11:03 PM IST
आसिम खान
पीटीआई, पणजी
पीटीआई, पणजी
Published by: आसिम खान
Updated Sun, 09 Feb 2020 11:03 PM IST
सार
- भैयाजी जोशी बोले, हिंदुओं को राजनीति से ऊपर उठना चाहिए
- नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के विरोध के बीच जोशी ने की टिप्पणी
- आरोप भी लगाया, कहा- गरीबों को लालच देकर चर्च करा रहा धर्मांतरण
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सुरेश भैयाजी जोशी (फाइल फोटो)
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विस्तार
आरएसएस के सर कार्यवाह भैयाजी जोशी ने रविवार को कहा कि भाजपा के विरोध का अर्थ हिंदू विरोध नहीं है। यहां डोना पाउला के पास ‘विश्वगुरु भारत’ पर व्याख्यान के दौरान सवाल-जवाब सत्र में जोशी ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को राजनीति से ऊपर उठना चाहिए।
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हिंदू अपने ही समाज का दुश्मन क्यों बन रहा है, इस प्रश्न के जवाब में जोशी ने कहा कि हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि विपक्ष द्वारा भाजपा के विरोध का अर्थ पूरे हिंदू समाज का विरोध है। यह एक राजनीतिक लड़ाई है और वह चलती रहेगी। हिंदू समाज का मतलब भाजपा नहीं है। देश में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के विरोध के बीच जोशी ने यह टिप्पणी की है।
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उन्होंने कहा कि हिंदू अपने ही समाज से इसलिए लड़ रहा है, क्योंकि वह धर्म भूल गया है। छत्रपति शिवाजी महाराज को भी अपने ही परिवार का विरोध झेलना पड़ा था। सर कार्यवाह ने कहा कि जहां भ्रम और आत्मकेंद्रित व्यवहार होता है, वहीं विरोध होता है। कुछ लोगों का मानना है कि विवेकानंद का हिंदुत्व अच्छा है, लेकिन विनायक सावरकर का अच्छा नहीं है। ऐसे दावों का क्या आधार है।
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पश्चिम बंगाल में वामपंथी शासक दावा करते हैं कि वह हिंदुओं के खिलाफ हैं, लेकिन जब दुर्गा पूजा होती है तो वह हमेशा आगे खड़े रहते हैं। वही हाल केरल का है, जहां वामपंथी मंदिर समितियों का अध्यक्ष बनना चाहते हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सभी समुदायों के लोगों का संघ में स्वागत है। जिनकी भी इसकी विचारधारा में विश्वास है, वह आरएसएस में शामिल हो सकते हैं।
धर्मांतरण और शोषण के लिए चर्च की आलोचना
जोशी ने चर्च पर लोगों की अज्ञानता और गरीबी का फायदा उठाकर उनका शोषण और धर्मांतरण करने का आरोप लगाया और उसकी आलोचना की। कहा हमें इसमें आपत्ति नहीं कि यदि कोई अपनी खुशी से ईसाई धर्म को अपनाता है, लेकिन जबरन किसी का धर्मांतरण कराना अपराध है। कई ऐसे एनजीओ हैं जो जल संरक्षण और वन संरक्षण के लिए काम करते हैं, लेकिन जल्द ही चर्च का अनुसरण करने लगते हैं।