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RSS Hindutva: आरएसएस नेता कृष्ण गोपाल बोले- हिंदुत्व समावेशी है, इस मौलिक दर्शन के साथ जीने वाले हिंदू हैं
Mon, 16 May 2022 02:55 AM IST
देव कश्यप
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Mon, 16 May 2022 02:55 AM IST
सार
आरएसएस के वरिष्ठ नेता कृष्ण गोपाल ने कहा कि इस देश में इस तरह की विभाजनकारी सोच नहीं है कि यह मेरा है और वह आपका है और जो कोई भी इस तरह सोचता है वह संकीर्ण सोच वाला है। धृतराष्ट्र (महाभारत महाकाव्य में दुर्योधन के पिता) के पास यह विचार था और उन्हें सबक मिला।
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RSS Sah Sarkaryawah, Krishna Gopal
- फोटो : ANI
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विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने रविवार को कहा कि हिंदुत्व समावेशी है क्योंकि यह मानवता को विभाजित नहीं करता और हजारों वर्षों से इस मौलिक विचार और दर्शन के साथ जीने वाले हिंदू हैं। उन्होंने कहा, हिंदुत्व न केवल भारतीय एकता का प्रतीक है, बल्कि वैश्विक एकता का भी है... हिंदुत्व मानवता को विभाजित नहीं करता है; यह केवल विश्व कल्याण की बात करता है... हमारी सोच और व्यवहार समावेशी है।"
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उन्होंने यहां ‘‘हिंदुत्व अर्थात भारतीय एकात्मता, मुस्लिम विद्वेष नहीं’’ नामक पुस्तक के अनावरण के लिए आयोजित कार्यक्रम में कहा कि जो विभाजित या बहिष्कृत करता है वह हिंदुत्व नहीं है, जो स्वयं की तलाश कर रहे हैं और विभाजनकारी विचार रखते हैं, वे संकीर्ण सोच वाले हैं। गोपाल ने कहा कि भारत उन लोगों की भूमि है जिन्होंने अपने धर्म और राजनीतिक विचारों के बावजूद सभी को गले लगाया है।
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आरएसएस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘इस देश में इस तरह की विभाजनकारी सोच नहीं है कि यह मेरा है और वह आपका है तथा जो कोई भी इस तरह सोचता है वह संकीर्ण सोच वाला है। धृतराष्ट्र (महाभारत महाकाव्य में दुर्योधन के पिता) के पास यह विचार था और उन्हें सबक मिला।’’
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पुस्तक के शीर्षक पर विचार करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदुत्व केवल भारतीय एकजुटता का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह वैश्विक एकजुटता का प्रतीक है क्योंकि देश के लोग इस मौलिक दर्शन का पालन करते हुए अपने कर्मों, कार्यों और व्यवहार में दुनिया के कल्याण को ध्यान में रखते हैं।
गोपाल ने कहा, ‘‘हिंदुत्व समावेशी है, यह मानवता को विभाजित नहीं करता है। हमारे दुश्मन को भी हमारी दृष्टि और विचारों से बाहर करने की कोई संभावना नहीं है क्योंकि हम मानते हैं कि हम सबके बिना अधूरे हैं।’’