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RSS: 'सुरक्षित रहने के लिए एकजुट रहना होगा', बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार मामले क्या बोले मोहन भागवत?

Sun, 21 Dec 2025 11:03 AM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: शिवम गर्ग Updated Sun, 21 Dec 2025 11:03 AM IST
सार

Mohan Bhagwat in Kolkata: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कोलकाता में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं और सुरक्षा के लिए उन्हें एकजुट रहना होगा। इस दौरान भागवत ने दुनियाभर के हिंदुओं से मदद की अपील की। 

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RSS Chief Mohan Bhagwat Visit West Bengal Says RSS Is Not Just a Service Organisation
कोलकाता में बोले मोहन भागवात - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत इन दिनों पश्चिम बंगाल के चार दिवसीय दौरे पर हैं। रविवार को उत्तर बंगाल के कोलकाता पहुंचे भागवत ने साइंस सिटी सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने दुनियाभर में हिंदुओं के हालात खासकर बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे आत्याचार को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक हैं और वहां हालात काफी कठिन हैं। ऐसे में अपनी सुरक्षा के लिए वहां के हिंदुओं को एकजुट रहना होगा।

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मोहन भागवत ने कहा कि सिर्फ बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के हिंदुओं को उनकी मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हम अपनी सीमाओं के भीतर रहकर जितनी मदद कर सकते हैं, उतनी करनी चाहिए और हम कर भी रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदुओं के लिए एकमात्र देश भारत है, इसलिए भारत सरकार को इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए।
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संघ और भाजपा को लेकर क्या बोले आरएसएस प्रमुख?
भागवत ने आगे कहा कि अगर आप संघ को समझना चाहते हैं, तो तुलना करने से गलतफहमियां पैदा होंगी। अगर आप संघ को केवल एक अन्य सेवा संगठन मानते हैं, तो आप गलत होंगे। आरसएस प्रमुख ने कहा कि कई लोगों में 'संघ' को भाजपा के नजरिए से समझने की प्रवृत्ति होती है, जो एक बहुत बड़ी गलती है। संघ की स्थापना का सार एक ही वाक्य में है 'भारत माता की जय'। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि अपनी खास संस्कृति, परंपरा और स्वभाव का नाम है। संघ का लक्ष्य इन मूल्यों को बनाए रखते हुए भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने के लिए समाज को तैयार करना है।
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'संघ को समझाने के लिए इतिहास उदाहरण'
भागवत ने साफ किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जन्म किसी राजनीतिक मकसद, प्रतिस्पर्धा या विरोध के लिए नहीं हुआ। उनका कहना था कि संघ पूरी तरह हिंदू समाज के संगठन, उन्नति और संरक्षण के लिए समर्पित है। संघ की भूमिका समझाने के लिए भागवत ने इतिहास का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस के निधन के बाद अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष भले ही थम गया, लेकिन राजा राम मोहन राय के समय से शुरू हुई समाज सुधार की प्रक्रिया लगातार चलती रही। उन्होंने इसे समुद्र के बीच एक ऐसे द्वीप की तरह बताया, जो समय के साथ मजबूती से कायम रहा।



हमें अपने समाज को मजबूत करना है- आरएसएस प्रमुख
अपने संबोधन में आरएसएस प्रमुख ने समाज को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि भारत एक महान विरासत वाला देश है और उसे वैश्विक नेतृत्व के लिए खुद को तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि अतीत में हम अंग्रेजों से युद्ध हार गए थे, लेकिन अब वक्त है कि हम अपने समाज को संगठित और सशक्त बनाएं। उनका पूरा भाषण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा, ‘व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण’ की सोच और एकजुट हिंदू समाज के साथ समृद्ध भारत के लक्ष्य पर केंद्रित रहा।

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