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Mohan Bhagwat: 'युद्ध स्वार्थ का नतीजा, दुनिया को संघर्ष नहीं सद्भाव चाहिए'; नागपुर में बोले संघ प्रमुख
Fri, 20 Mar 2026 12:45 PM IST
नवीन पारमुवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
Published by: नवीन पारमुवाल
Updated Fri, 20 Mar 2026 12:45 PM IST
सार
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में दुनिया के मौजूदा हालातों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि स्वार्थ और वर्चस्व की भावना ही दुनिया में झगड़ों की मुख्य वजह है। उन्होंने शांति के लिए धर्म और एकता पर जोर दिया।
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दुनिया को संघर्ष की नहीं, सद्भाव की जरूरत है: संघ प्रमुख मोहन भागवत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
RSS Chief Mohan Bhagwat: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दुनिया में बढ़ते तनाव को लेकर बयान दिया है। नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि आखिर क्यों दुनिया में शांति नहीं हो पा रही है। भागवत ने स्वार्थ और दूसरों पर काबू पाने की इच्छा को इन विवादों की जड़ बताया। उन्होंने कहा कि जब तक लोग अपनी सोच नहीं बदलेंगे, तब तक शांति संभव नहीं है। भारत के प्राचीन ज्ञान को उन्होंने दुनिया की समस्याओं का समाधान बताया। उनका कहना है कि पूरी दुनिया को एक परिवार की तरह देखना ही सुख का रास्ता है।
आरएसएस प्रमुख शुक्रवार को नागपुर में विश्व हिंदू परिषद के नए दफतर के भूमि पूजन कार्यक्रम में बोल रहे थे। मोहन भागवत ने कहा कि पिछले दो हजार वर्षों से दुनिया में शांति के लिए कई प्रयोग किए गए। लेकिन इनमें से कोई भी पूरी तरह सफल नहीं हुआ। आज भी धार्मिक कट्टरता और जबरन धर्म परिवर्तन जैसी समस्याएं मौजूद हैं। लोग खुद को दूसरों से बड़ा और दूसरों को छोटा समझते हैं। यही वजह है कि दुनिया में लगातार संघर्ष और विवाद बने हुए हैं।
धर्म केवल किताबों में नहीं, लोगों के व्यवहार में दिखना चाहिए: भागवत
संघ प्रमुख ने कहा कि शांति केवल बातों से नहीं आएगी। इसके लिए एकता, अनुशासन और धर्म के रास्ते पर चलना होगा। उन्होंने कहा कि धर्म केवल किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे लोगों के व्यवहार और आचरण में दिखना चाहिए। अनुशासन और नैतिक मूल्यों का पालन करने के लिए मेहनत और त्याग की जरूरत होती है। जब तक समाज में अनुशासन नहीं होगा, तब तक हम एक बेहतर दुनिया की कल्पना नहीं कर सकते।
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दुनिया को टकराव की जगह आपसी मेलजोल की जरूरत
भागवत ने कहा कि भारत का प्राचीन ज्ञान सिखाता है कि हम सब एक हैं और आपस में जुड़े हुए हैं। दुनिया को अब टकराव छोड़कर तालमेल और सहयोग की तरफ बढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अब आधुनिक विज्ञान भी धीरे-धीरे इसी बात को मान रहा है। भारत मानवता के नियम का पालन करता है, जबकि दूसरे 'सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट' में विश्वास करते हैं। यही वजह है कि दुनिया के कई हिस्से केवल ताकतवर के जीवित रहने की बात करते हैं। दुनिया को संघर्ष की नहीं बल्कि आपसी मेलजोल की जरूरत है।
यह भी पढ़ें: अमेरिका-ईरान युद्ध से बढ़ा संकट: पेंटागन ने मांगे 200 अरब डॉलर, ईरान ने इस्राइल फर्स्ट टैक्स कहकर उड़ाया मजाक
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आरएसएस प्रमुख शुक्रवार को नागपुर में विश्व हिंदू परिषद के नए दफतर के भूमि पूजन कार्यक्रम में बोल रहे थे। मोहन भागवत ने कहा कि पिछले दो हजार वर्षों से दुनिया में शांति के लिए कई प्रयोग किए गए। लेकिन इनमें से कोई भी पूरी तरह सफल नहीं हुआ। आज भी धार्मिक कट्टरता और जबरन धर्म परिवर्तन जैसी समस्याएं मौजूद हैं। लोग खुद को दूसरों से बड़ा और दूसरों को छोटा समझते हैं। यही वजह है कि दुनिया में लगातार संघर्ष और विवाद बने हुए हैं।
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धर्म केवल किताबों में नहीं, लोगों के व्यवहार में दिखना चाहिए: भागवत
संघ प्रमुख ने कहा कि शांति केवल बातों से नहीं आएगी। इसके लिए एकता, अनुशासन और धर्म के रास्ते पर चलना होगा। उन्होंने कहा कि धर्म केवल किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे लोगों के व्यवहार और आचरण में दिखना चाहिए। अनुशासन और नैतिक मूल्यों का पालन करने के लिए मेहनत और त्याग की जरूरत होती है। जब तक समाज में अनुशासन नहीं होगा, तब तक हम एक बेहतर दुनिया की कल्पना नहीं कर सकते।
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दुनिया को टकराव की जगह आपसी मेलजोल की जरूरत
भागवत ने कहा कि भारत का प्राचीन ज्ञान सिखाता है कि हम सब एक हैं और आपस में जुड़े हुए हैं। दुनिया को अब टकराव छोड़कर तालमेल और सहयोग की तरफ बढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अब आधुनिक विज्ञान भी धीरे-धीरे इसी बात को मान रहा है। भारत मानवता के नियम का पालन करता है, जबकि दूसरे 'सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट' में विश्वास करते हैं। यही वजह है कि दुनिया के कई हिस्से केवल ताकतवर के जीवित रहने की बात करते हैं। दुनिया को संघर्ष की नहीं बल्कि आपसी मेलजोल की जरूरत है।
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