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जमा हुए 70 करोड़ः ED ने फ्रीज किए दो अकाउंट
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 18 Dec 2016 06:47 PM IST
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- फोटो : Social Media
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नोटबंदी के बाद मुंबई स्थित एक प्राइवेट बैंक में अमान्य 1000 रुपये और 500 रुपये में 70 करोड़ जमा होने के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने दो संदिग्ध अकाउंट फ्रीज कर दिए हैं।
जिन दो अकाउंट में पैसे जमा किए गए उनके जरिए इस राशि को कथित रूप से संदिग्ध फर्जी कंपनियों के अकाउंट में ट्रांसफर किया गया है। अकाउंट फ्रीज करने के समय ईडी को केवल 1.4 करोड़ रुपया मिला है। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में मुंबई शहर के एक सर्राफा व्यापारी की भूमिका की जांच चल रही है।
दरअसल, इन खातों में 100 करोड़ रुपये जमा हुए हैं, लेकिन 30 करोड़ रुपया रियल टाइम ग्रास सेटलमेंट सिस्टम (आरटीजीएस) के जरिए ट्रांसफर किया गया है।
प्रवर्तन निदेशालय इस बात की जांच कर रहा है कि क्या ये दोनों अकाउंट सर्राफा व्यापारी के हैं। आशंका ये है कि नोटबंदी के बाद अमान्य 1000 और 500 रुपये के नोटों के जरिए प्रीमियम पर सोने की बिक्री के बाद इतनी बड़ी राशि इन खातों में जमा की गई।
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गौरतलब है कि नोटबंदी के बाद अमान्य रुपयों के जरिए सोने की खरीददारी ने पूरे देश में जोर पकड़ लिया है। इन पैसों को अकाउंट में जमा कराने के बाद इसे फर्जी कंपनियों के अकाउंट में ट्रांसफर किया गया है, ताकि इसे वैध राजस्व के रूप में दिखाया जा सके।
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जिन दो अकाउंट में पैसे जमा किए गए उनके जरिए इस राशि को कथित रूप से संदिग्ध फर्जी कंपनियों के अकाउंट में ट्रांसफर किया गया है। अकाउंट फ्रीज करने के समय ईडी को केवल 1.4 करोड़ रुपया मिला है। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में मुंबई शहर के एक सर्राफा व्यापारी की भूमिका की जांच चल रही है।
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दरअसल, इन खातों में 100 करोड़ रुपये जमा हुए हैं, लेकिन 30 करोड़ रुपया रियल टाइम ग्रास सेटलमेंट सिस्टम (आरटीजीएस) के जरिए ट्रांसफर किया गया है।
प्रवर्तन निदेशालय इस बात की जांच कर रहा है कि क्या ये दोनों अकाउंट सर्राफा व्यापारी के हैं। आशंका ये है कि नोटबंदी के बाद अमान्य 1000 और 500 रुपये के नोटों के जरिए प्रीमियम पर सोने की बिक्री के बाद इतनी बड़ी राशि इन खातों में जमा की गई।
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गौरतलब है कि नोटबंदी के बाद अमान्य रुपयों के जरिए सोने की खरीददारी ने पूरे देश में जोर पकड़ लिया है। इन पैसों को अकाउंट में जमा कराने के बाद इसे फर्जी कंपनियों के अकाउंट में ट्रांसफर किया गया है, ताकि इसे वैध राजस्व के रूप में दिखाया जा सके।
'सोने की बिक्री से जमा हुए करोड़ों रुपये'
सूत्रों के मुताबिक 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा के बाद से सर्राफा व्यापारी सक्रिय हो गए हैं। जांच एजेंसी को पता चला है कि इन लोगों ने शुरुआती दिनों में जबरदस्त रूप से सोने की बिक्री की और बड़ी मात्रा में अमान्य नोटों को इकट्ठा किया। इन संदिग्ध अकाउंट के बारे में फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट ने जानकारी दी है। एजेंसी के मुताबिक कुछ मामलों में, तो एक समय में करोड़ों रुपये खातों में जमा हुए हैं।
सूत्रों के मुताबिक 'ईडी अधिकारियों ने पाया है कि ये फर्जी कंपनियां एक छोटे से परिसर से चलाई जाती हैं और कोई बिजनेस नहीं करतीं। इन्हें वे लोग चला रहे हैं, जिनकी आय का कोई सही स्त्रोत नहीं है। दोनों अकाउंट फ्रीज किए जाने के बाद जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि ये कंपनियां काल्पनिक है।'
अधिकारियों ने आगे कहा कि वे इन दोनों खातों की जांच कर रहे हैं। साथ ही इस बात की भी जांच की जा रही है कि अमान्य रुपयों को लीगल सिस्टम में वापस लाने के लिए क्या इन फर्जी कंपनियों को प्रोफेशनल ऑपरेटरों के द्वारा चलाया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक 'ईडी अधिकारियों ने पाया है कि ये फर्जी कंपनियां एक छोटे से परिसर से चलाई जाती हैं और कोई बिजनेस नहीं करतीं। इन्हें वे लोग चला रहे हैं, जिनकी आय का कोई सही स्त्रोत नहीं है। दोनों अकाउंट फ्रीज किए जाने के बाद जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि ये कंपनियां काल्पनिक है।'
अधिकारियों ने आगे कहा कि वे इन दोनों खातों की जांच कर रहे हैं। साथ ही इस बात की भी जांच की जा रही है कि अमान्य रुपयों को लीगल सिस्टम में वापस लाने के लिए क्या इन फर्जी कंपनियों को प्रोफेशनल ऑपरेटरों के द्वारा चलाया जा रहा है।