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Goa: मडगांव रेलवे स्टेशन से बचाए गए 200 से अधिक बच्चे, रेलवे पुलिस और 'चाइल्डलाइन' ऐसे बचा रही जान
Sun, 11 Dec 2022 05:49 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sun, 11 Dec 2022 05:49 PM IST
सार
चाइल्डलाइन रेलवे की समन्वयक एना एंड्रिया फर्नांडीस ने भी इसके बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 'इस साल अब तक कम से कम 217 बच्चों को मडगांव रेलवे स्टेशन से बचाया गया है। इनमें से कुछ बच्चे घर से भागे हुए थे, जो रेलवे स्टेशन पर रह रहे थे।'
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आरपीएफ।
विस्तार
दक्षिण गोवा के मडगांव रेलवे स्टेशन पर इस साल अब तक करीबन 200 से अधिक बच्चों को बचाया गया है। सीआरपीएफ के एक अधिकारी ने इसके बारे में जानकारी दी है। रेलवे सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 200 से अधिक बचाए गए बच्चों में ऐसे बच्चे शामिल हैं जो किसी कारण से अपने घर से भाग निकले थे या रेलवे स्टेशन पर भीख मांगते पाए गए थे। अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस काम में एक गैर लाभकारी संगठन चाइल्डलाइन की भी अहम भूमिका रही है। चाइल्डलाइन ने मडगाँव रेलवे स्टेशन पर एक बूथ स्थापित किया है। इस बूथ के जरिए ये संगठन इन बचाव कार्यों में शामिल रहा है।
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चाइल्डलाइन रेलवे की समन्वयक एना एंड्रिया फर्नांडीस ने भी इसके बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 'इस साल अब तक कम से कम 217 बच्चों को मडगांव रेलवे स्टेशन से बचाया गया है। इनमें से कुछ बच्चे घर से भागे हुए थे, जो रेलवे स्टेशन पर आ गए थे।'
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इस तरह करते हैं काम
चाइल्डलाइन रेलवे की समन्वयक एना एंड्रिया फर्नांडीस ने अपने काम के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनकी टीम के सदस्य रेलवे स्टेशन पर चौबीसों घंटे काम करते हैं। इस दौरान वे रेलवे परिसर में अकेले रहने वाले बच्चों पर नजर रखते हैं। इसके अलावा मडगांव स्टेशन पर आने वाली ट्रेनों के डिब्बों में भी जांच करते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार पड़ोसी राज्य कर्नाटक और यहां तक कि बिहार, ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों के भी घर से भागे हुए बच्चे ट्रेनों से यहां पहुंचते हैं।
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उन्होंने कहा कि सामने आया है कि कई बार माता-पिता के आपसी झगड़ों के कारण या परिजनों से नाराजगी या फिर परीक्षा में फेल हो जाने के डर से बिना परिणामों की चिंता किए बगैर बच्चे अपना घर छोड़कर भाग जातें हैं।
फर्नांडिस ने बताया कि एक बार बचाए जाने के बाद, बच्चों को आरपीएफ या कोंकण रेलवे पुलिस को सौंप दिया जाता है, जो उन्हें गोवा सरकार द्वारा स्थापित बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की देखभाल करने के लिए सौंपती है। सीडब्ल्यूसी बच्चों को माता-पिता को सौंपने से पहले मर्सेस में राजकीय गृह 'अपना घर' में रखती है।