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Supreme Court: 'सरकारी स्कूलों में प्रवेश ले सकेंगे रोहिंग्या बच्चे', जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

Fri, 28 Feb 2025 08:48 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 28 Feb 2025 08:48 PM IST
सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रोहिंग्या बच्चे सरकारी स्कूलों में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं और अगर उन्हें इनकार किया जाता है, तो वे हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। 

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Rohingya children can approach govt schools for admission, move HC if denied: SC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि रोहिंग्या बच्चे सरकारी स्कूलों में प्रवेश ले सकते हैं और अगर उन्हें मना किया जाता है, तो वे हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच ने एक याचिका का निपटारा करते हुए यह निर्देश दिया। याचिका में दिल्ली सरकार के अधिकारियों को संयुक्त राष्ट्र राष्ट्र उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) कार्ड धारक रोहिंग्या बच्चों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश देने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी। 

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आदेश से सीधे 500 छात्रों को मिलेगी प्रवेश की अनुमति: गोंसाल्विस
शीर्ष कोर्ट ने कहा, हम चाहते हैं कि बच्चे पहले सरकारी स्कूलों से संपर्क करें। अगर उन्हें प्रवेश नहीं मिलता है, तो वे हाईकोर्ट जा सकते हैं। 'रोहिंग्या मानवाधिकार पहल' के लिए पेश हुए वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्विस ने कहा कि इस आदेश से 500 रोहिंग्या छात्रों के लिए सरकारी स्कूलों में प्रवेश का रास्ता साफ हो जाएगा। गोंसाल्विस ने कहा, मैं 2018 से इस मुद्दे के लिए लड़ रहा हूं और और एक आदेश से सीधे 500 छात्रों को स्कूल में प्रवेश की अनुमति मिलेगी। 
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शीर्ष कोर्ट ने पहले भी जारी किया था इसी तरह का आदेश
बेंच ने कहा कि उन्होंने एक और जनहित याचिका पर इसी तरह का आदेश पहले पारित किया था। कोर्ट ने 12 फरवरी को कहा था कि किसी भी बच्चे को शिक्षा प्रदान करने में भेदभाव नहीं होगा। इस याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकार को रोहिंग्या शरणार्थियों को सरकारी स्कूलों और अस्पतालों तक पहुंच देने का निर्देश देने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले इन शरणार्थियों के निवास क्षेत्रों के बारे में जानकारी मांगी थी। 
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शाहीन बाग और कालिंदी कुंज की झुग्गियों में रह रहे रोहिंग्या
31 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने एनजीओ को यह बताने के लिए कहा था कि रोहिंग्या शरणार्थी शहर में कहां बसे हुए हैं और उनके लिए उपलब्ध सुविधाएं क्या हैं। गोंसाल्विस ने कहा था  कि एनजीओ ने रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए सरकारी स्कूलों और अस्पतालों तक पहुंची की मांग की थी, क्योंकि आधार कार्ड की कमी के कारण उन्हें यह सुविधा नहीं मिल रही थी।गोंसाल्विस ने बताया था कि रोहिंग्या शरणार्थी शाहीन बाग, कालिंदी कुंज और खजूरी खास क्षेत्रों में रह रहे हैं। शाहीन बाग और कालिंदी कुंज में वे झुग्गियों में रह रहे हैं, जबकि खजूरी खास में वे किराये के घरों में रह रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने यह समझने के लिए सवाल पूछे थे कि क्या वे शिविरों में रह रहे हैं क्योंकि राहत की प्रकृति जनहित याचिका में उल्लिखित से भिन्न होगी। 

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