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New Parliament Building: नए संसद भवन पर मची रार, सत्ता-विपक्ष की दूरी को नहीं पाट सका 'राजदंड'

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 24 May 2023 08:58 PM IST
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सार
New Parliament building: बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक प्रेसवार्ता में 'राजदंड' यानी 'सेंगोल' को पेश कर दिया। उन्होंने कहा, हमने सबको बुलाया है, 'लेकिन' सब अपनी सोचने की क्षमता के अनुसार रिएक्शन भी देते हैं और काम भी करते हैं...
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roar on inauguration of new Parliament building between ruling and the opposition parties
New Parliament building - फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार

संसद के नए भवन के उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच 'रार' खत्म नहीं हो रही है। रविवार को प्रधानमंत्री मोदी नए भवन का उद्घाटन करेंगे। कांग्रेस सहित 19 विपक्षी दलों ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार करने की घोषणा की है। अपने संयुक्त बयान में इन दलों का कहना है कि जब लोकतंत्र की आत्मा को ही संसद से निष्कासित कर दिया गया है, तो हमें नई इमारत में कोई मूल्य नहीं दिखता। हम नए संसद भवन के उद्घाटन का बहिष्कार करने के अपने सामूहिक निर्णय की घोषणा करते हैं। बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक प्रेसवार्ता में 'राजदंड' यानी 'सेंगोल' को पेश कर दिया। उन्होंने कहा, नए संसद भवन के उद्घाटन पर प्रधानमंत्री मोदी एतिहासिक व पवित्र 'सेंगोल' की स्थापना करेंगे। शाह ने ये भी कह दिया कि हमने सबको बुलाया है, 'लेकिन' सब अपनी सोचने की क्षमता के अनुसार रिएक्शन भी देते हैं और काम भी करते हैं।

यह भी पढ़ें: New Parliament building: कांग्रेस एमपी ने नई संसद के उद्घाटन समारोह में उपराष्ट्रपति को न बुलाने पर उठाए सवाल

भारतीयों को हमेशा गर्व करने का मौका देगा

अमित शाह ने कहा, आजादी के 75 साल बाद भी अधिकांश भारत को इस घटना के बारे में जानकारी नहीं है। 14 अगस्त, 1947 की रात को वह एक विशेष अवसर था, जब जवाहर लाल नेहरू ने तमिलनाडु के थिरुवदुथुराई आधीनम (मठ) से विशेष रूप से पधारे आधीनमों (पुरोहितों) से सेंगोल ग्रहण किया था। पंडित नेहरू के साथ सेंगोल का निहित होना ठीक वही क्षण था, जब अंग्रेजों द्वारा भारतीयों के हाथों में सत्ता का हस्तांतरण किया गया था। हम जिसे स्वतंत्रता के रूप में मना रहे हैं, वह वास्तव में यही क्षण है। इस एतिहासिक 'सेंगोल' के लिए संसद भवन ही सबसे अधिक उपयुक्त और पवित्र स्थान है। ये संसद आज भी है और सालों बाद जब हम में से कोई नहीं होगा, तो उस आने वाली पीढ़ी के भारतीयों को भी ये हमेशा गर्व करने का मौका देगा कि ये 'आजाद भारत में बना हुआ अमृतकाल का हमारा संसद भवन है'। हालांकि प्रेसवार्ता में शाह ने कहा, केवल 'सेंगोल' से जुड़े सवाल ही पूछें। राजनीति से जुड़े सवाल न हों।

सब रिएक्शन भी देते हैं और काम भी करते हैं

जब राजनीति को छूते हुए कुछ सवाल आए तो उन्होंने जवाब भी दे दिया। शाह ने कहा, भारत सरकार ने सबको उपस्थित रहने की विनती की है, हमने सबको बुलाया है, लेकिन सब अपनी सोचने की क्षमता के अनुसार रिएक्शन भी देते हैं और काम भी करते हैं। शाह का इशारा साफ था कि विपक्ष जैसा चाहता है, वैसा कुछ नहीं होगा। दूसरी तरफ समान विचारधारा वाले विपक्षी दलों ने भी अपना एक संयुक्त वक्तव्य जारी कर दिया। उसमें कहा गया है कि नए संसद भवन का उद्घाटन एक महत्वपूर्ण अवसर है। हमारे इस विश्वास के बावजूद कि सरकार लोकतंत्र को खतरे में डाल रही है, और जिस निरंकुश तरीके से नई संसद का निर्माण किया गया था, उसके लिए हमारी अस्वीकृति के बावजूद हम अपने मतभेदों को दूर करने और इस अवसर को चिह्नित करने के लिए तैयार थे। हालांकि, राष्ट्रपति मुर्मू को पूरी तरह से दरकिनार करते हुए, नए संसद भवन का उद्घाटन करने का प्रधानमंत्री मोदी का निर्णय न केवल एक गंभीर अपमान है, बल्कि हमारे लोकतंत्र पर सीधा हमला है, जो इसके अनुरूप प्रतिक्रिया की मांग करता है।

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राष्ट्रपति के उच्च पद का अपमान

विपक्षी दलों ने कहा, राष्ट्रपति के बिना संसद कार्य नहीं कर सकती है, फिर भी प्रधानमंत्री ने उनके बिना नए संसद भवन का उद्घाटन करने का निर्णय लिया है। यह अशोभनीय कृत्य राष्ट्रपति के उच्च पद का अपमान करता है। यह संविधान के पाठ और उसकी भावना का उल्लंघन है। यह सम्मान के साथ सबको साथ लेकर चलने की उस भावना को कमजोर करता है, जिसके तहत देश ने अपनी पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति का स्वागत किया था। विपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री और उनकी सरकार के खिलाफ लड़ाई रहेगी। हम अपना संदेश सीधे भारत के लोगों तक ले जाएंगे। 19 विपक्षी दलों के बहिष्कार पर संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी बोले, स्पीकर संसद के संरक्षक होते हैं। स्पीकर ने ही प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया है। अमित शाह ने कहा, 'सेंगोल' की स्थापना 15 अगस्त, 1947 की भावना को अविस्मरणीय बनाती है। यह असीम आशा, अनंत संभावनाओं और एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण का संकल्प है। यह अमृतकाल का प्रतिबिंब होगा, जो नए भारत को विश्व में अपने यथोचित स्थान को ग्रहण करने के गौरवशाली क्षण का साक्षी बनेगा।

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