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सीबीआई की पहली महिला निदेशक की रेस से बाहर हो सकती हैं रीना मित्रा, बचे हैं सिर्फ दो दिन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Wed, 30 Jan 2019 09:48 AM IST
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रीना मित्रा
रीना मित्रा - फोटो : Bandaru Dattatreya/Twitter
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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का निदेशक तय करने के लिए अगर अगले दो दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति की बैठक अगर नहीं हुई तो इस टॉप जॉब से रीना मित्रा बाहर हो सकती हैं। रीना केंद्रीय गृह मंत्रालय में विशेष सचिव हैं। अगर उनका चुनाव हो जाता है तो वह सीबीआई की पहली महिला निदेशक होंगी। इस रेस से मित्रा इसलिए बाहर हो सकती हैं क्योंकि 31 जनवरी को वह सेवानिवृत होने वाली हैं। 
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मित्रा 1983 बैच की मध्यप्रदेश-कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं। वह सीबीआई में भी पांच साल तक काम कर चुकी हैं। जिससे उनके चयन को लेकर स्वीकृति हो सकती है। वह सीबीआई में पांच साल काम भी कर चुकी हैं। 


मध्य प्रदेश राज्य विजिलेंस ब्यूरो में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई गंभीर भ्रष्टाचार के मामलों को संभाला है। इसके अलावा वह वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की भी प्रमुख रही हैं। यह संस्था संगठित वाइल्डलाइफ अपराध से निपटने का काम करती है। अगर मित्रा को चुना जाता है तो वह सीबीआई की पहली महिला प्रमुख होंगी। 

ऐसे 11 अधिकारी हैं जो सीबीआई में काम कर चुके हैं और टॉप चार आईपीएस बैच 1982, 1983, 1984 और 1985 से हैं। 

इस रेस में और भी कई बड़े अधिकार शामिल हैं। राजस्थान के पूर्व डीजीपी ओपी गल्होत्रा भी 11 साल तक सीबीआई में रह चुके हैं। वह 1996 से 2002 तक एसपी और 2008 से 15 तक संयुक्त निदेशक रहे थे। इसके अलावा गल्होत्रा के बैच में साथी रहे और यूपी कैडर के एचसी अवस्थी भी दौड़ में शामिल हैं। असम-मेघालय कैडर के वाईसी मोदी, सीआईएसएफ के डायरेक्टर जनरल राजेश रंजन, आईटीबीपी के डीजी एसएस देशवाल, यूपी कैडर के 1985 बैच के अरुण कुमार, केरल कैडर के लोकनाथ बेहेरा, ऋषि राज सिंह, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनाइक के नाम भी छांटे गए हैं।   

दो अन्य भी हो सकते हैं रेस से बाहर

अगर जनवरी खत्म होने से पहले बैठक नहीं हुई तो इस रेस से परमिंदर राय (1982 बैच हरियाणा कैडर) और तीर्थ राय (1984 बैच गुजरात कैडर) भी बाहर हो सकते हैं। क्योंकि ये दोनों भी जनवरी के अंत में सेवानिवृत होंगे। बीते हफ्ते चयन समिति की बैठक हुई थी। बैठक में प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी हिस्सा लिया। खड़गे ने जिन अफसरों का चुनाव हुआ है उनकी बैकग्राउंड जानकारी मांगी थी।

खड़गे चाहते हैं कि चयन समिति में उनके नामों पर चर्चा करने से पहले शॉर्टलिस्ट अधिकारियों की वरिष्ठता, ईमानदारी, जांच और भ्रष्टाचार-विरोधी कार्यों का विवरण बताया जाए। इन जानकारियों के अभाव में खड़गे ने कहा कि सीबीआई निदेशक पर फैसला नहीं कर सकते। बैठक के बेनतीजा होने के बाज खड़गे ने कहा था, "पहली गलती जो शख्स योग्य नहीं है उसे नियुक्त करने की है और दूसरी गलती बिना जानकारी दिए उन्होंने बैठक बुला ली। बैठक में हो रही यह देरी सरकार की गलती है। इस बैठक को 21 फरवरी से पहले बुलाया जाना चाहिए जब उसका कार्यकाल समाप्त होता है।" 
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