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Bombay HC: रात में सोने का अधिकार एक बुनियादी मानवीय आवश्यकता, इसका उल्लघंन नहीं हो सकता; हाईकोर्ट की टिप्पणी

Mon, 15 Apr 2024 10:03 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 15 Apr 2024 10:03 PM IST
सार

अदालत 64 वर्षीय राम इसरानी की ओर से मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। ईडी ने इसरानी को पिछले साल अगस्त में गिरफ्तार किया था। 
 

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Right to sleep a basic human requirement Bombay High Court Says on ED questioning senior citizen post midnigh
बॉम्बे हाईकोर्ट। - फोटो : ANI

विस्तार

एक वरिष्ठ नागरिक की याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि सोने का अधिकार एक बुनियादी मानवीय आवश्यकता है, जिसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट की जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने यह टिप्पणी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक वरिष्ठ नागरिक से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तरफ से रातभर पूछताछ किए जाने के मामले में की। 

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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 64 साल के राम इसरानी ने ईडी की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। याचिका में इसरानी ने अपनी  गिरफ्तारी को अवैध बताया था। उन्होंने कहा था कि वे जांच में सहयोग कर रहे थे और ईडी के समन पर 7 अगस्त, 2023 को उसके सामने पेश हुए थे। जहां उनसे रातभर पूछताछ की गई और फिर सुबह गिरफ्तार कर लिया गया।
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सुनवाई के दौरान ईडी का पक्ष रख रहे वकील ने अदालत को बताया कि इसरानी ने रात में अपना बयान दर्ज करने के लिए सहमति दी थी। वहीं, इसरानी ने अपनी याचिका में कहा है कि ईडी के अधिकारियों ने उनसे सुबह के 3 बजे तक पूछताछ की थी।
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सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने इसरानी की याचिका खारिज कर दी। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि वह याचिकाकर्ता से रातभर पूछताछ करने के तरीके से सहमत नहीं है। जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने कहा कि बयान दिन के दौरान दर्ज किए जाने चाहिए, न कि रात में जब किसी व्यक्ति का संज्ञानात्मक कौशल क्षीण हो सकता है। 

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