Tuberculosis: चावल, दाल और सत्तू से कम होगा टीबी का जोखिम, मरीज और परिवार के लिए बताया उचित आहार
भारतीय शोधकर्ताओं ने झारखंड के 10 हजार से अधिक लोगों पर दो अलग-अलग अध्ययन बीते तीन साल में पूरे किए हैं, जिसे मंगलवार को मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित किया गया। इसमें 1200 कैलोरी और 52 ग्राम प्रोटीन युक्त आहार के सेवन की सलाह दी गई है।
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टीबी के मरीज और उसके संपर्क में रहने वालों को अगर हर दिन चावल, दाल और सत्तू युक्त आहार दिया जाए तो उनमें इस बीमारी के जोखिम को कम किया जा सकता है। दुनिया में पहली बार वैज्ञानिक तथ्यों के जरिये टीबी संक्रमण और पोषक आहार के बीच प्रभावी असर का पता चला है।
भारतीय शोधकर्ताओं ने झारखंड के 10 हजार से अधिक लोगों पर दो अलग-अलग अध्ययन बीते तीन साल में पूरे किए हैं, जिसे मंगलवार को मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित किया गया। इसमें 1200 कैलोरी और 52 ग्राम प्रोटीन युक्त आहार के सेवन की सलाह दी गई है।
पहला अध्ययन : घर वालों पर 48 फीसदी जोखिम हुआ कम...मंगलूरू के येनेपोया मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ. अनुराग भार्गव ने बताया कि 16 अगस्त 2019 से 31 जनवरी 2021 के बीच पहला अध्ययन किया गया, जिसमें झारखंड की आदिवासी आबादी में करीब 10,345 लोगों का चयन किया गया। ये लोग अपने-अपने घरों में टीबी मरीजों के संपर्क में थे। छह माह तक जब इन लोगों को पोषक आहार का सेवन कराया गया तो इनमें 48 फीसदी तक टीबी का जोखिम कम देखने को मिला।
टीबी के जानलेवा होने के पीछे अल्पपोषण भी एक बड़ी वजह
नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के संक्रामक रोग विभागाध्यक्ष डॉ. निवेदिता गुप्ता ने कहा, टीबी मरीज का वजन लगातार कम होता है। अगर रोगी मधुमेह ग्रस्त है तो उसकी यह स्थिति काफी हद तक जानलेवा बन जाती है। टीबी के जानलेवा होने के पीछे अल्पपोषण भी एक बड़ी वजह है।
डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक रहीं डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा, अभी तक हम पोषण और टीबी बीमारी को लेकर चर्चा करते थे, लेकिन अब हमारे पास साक्ष्य भी आ गए हैं। भारत में टीबी मरीजों को प्रतिमाह पोषण कार्यक्रम के तहत 500 रुपये दिए जा रहे हैं। यह अध्ययन बताते हैं कि अगर हम टीबी मरीज को रोजाना दवा के साथ पोषक आहार का सेवन कराएं तो अच्छे परिणाम ज्यादा तेजी से मिल सकते हैं।
दूसरा अध्ययन : मृत्युदर में 60 फीसदी की कमी
दूसरा अध्ययन टीबी रोगियों पर किया गया, जिसके लिए 2,800 रोगियों का चयन किया। सामने आया कि पोषक आहार मिलता है तो दो महीने के भीतर बीमारी की मृत्युदर यानी रोगी के लिए जानलेवा स्थिति में 60% तक कमी आती है। आहार में यह होना चाहिए शामिल- पांच किलो चावल, 1.5 किलो अरहर की दाल, सूक्ष्म पोषक तत्व गोलियां (आयोडीन, आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन ए, विटामिन बी12, विटामिन डी, जिंक), दूध, सत्तू, दही, चने का आटा (मासिक आहार)।