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आरजी कर मामला: सियालदह अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची ममता सरकार, अपील दायर करने की मिली अनुमति

Tue, 21 Jan 2025 09:26 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: राहुल कुमार Updated Tue, 21 Jan 2025 09:26 PM IST
सार

West Bengal: महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने सियालदह के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिर्बान दास द्वारा पारित आदेश को चुनौती देने के लिए मंगलवार सुबह न्यायमूर्ति देबांगसु बसाक और न्यायमूर्ति मोहम्मद शब्बार रशीदी की खंडपीठ के समक्ष याचिका दायर की।

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RG Kar: West Bengal government moves Cal HC against life term till death order
आरजी कर मामला - फोटो : ANI

विस्तार

पश्चिम बंगाल सरकार ने आरजी कर अस्पताल की महिला चिकित्सक के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या करने के मामले में दोषी संजय रॉय को मौत की सजा देने का अनुरोध करते हुए मंगलवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय में अपील दायर की है। सियालदह अदालत की मृत्यु तक कारावास की सजा सुनाए जाने के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उच्च न्यायालय में चुनौती देने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के 24 घंटे से भी कम समय में राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है।
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महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने सियालदह के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिर्बान दास द्वारा पारित आदेश को चुनौती देने के लिए मंगलवार सुबह न्यायमूर्ति देबांगसु बसाक और न्यायमूर्ति मोहम्मद शब्बार रशीदी की खंडपीठ के समक्ष याचिका दायर की। एक अधिकारी ने बताया, सरकार ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है और अपील दायर करने के लिए अदालत की अनुमति प्राप्त कर ली है। उच्च न्यायालय के सूत्रों ने कहा कि अगर अपील दायर करने की प्रक्रिया मंगलवार तक पूरी हो जाती है तो मामले से संबंधित न्यायिक प्रक्रिया इसी सप्ताह शुरू हो सकती है।
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 ममता बोलीं-  अपराध करने के बाद बच निकला, तो वह फिर ऐसा करेगा
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घटना को एक दुर्लभ, जघन्य और संवेदनशील अपराध करार देते हुए कहा कि अगर कोई अपराध करने के बाद बच निकलता है, तो वह दोबारा ऐसा करेगा और उसे संरक्षण देना हमारा काम नहीं है। उन्होंने कहा कि वह दोषी के लिए सजा ए मौत की मांग कर रही हैं।
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बनर्जी ने मालदा में  कहा,  अगर कोई इतना राक्षसी और बर्बर है, तो समाज मानवीय कैसे रह सकता है? हमने अपराजिता विधेयक पारित किया, लेकिन केंद्र उस पर कब्जा जमाए बैठा है। हमने उस विधेयक में मृत्युदंड को शामिल किया है और हम चाहते हैं कि यह देश के लिए एक आदर्श बने।  अगर किसी को आजीवन कारावास की सजा दी जाती है, तो वह व्यक्ति पैरोल पर रिहा हो सकता है। मैं अधिवक्ता रहीं हूं और मैने कई मामले लड़े हैं। सियालदह अदालत के न्यायाधीश ने कहा कि यह दुर्लभ से दुर्लभतम मामला नहीं है और मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता। अगर यह दुर्लभ से दुर्लभतम मामला नहीं है तो और क्या है।
 
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