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बड़ा बयान: सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एमबी लोकुर बोले, यूएपीए का प्रावधान देशद्रोह से अधिक खतरनाक

Sat, 21 May 2022 10:38 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sat, 21 May 2022 10:38 PM IST
सार

लोकुर ने कहा कि मैं मानता हूं कि सरकार देशद्रोह के कानून को खत्म कर देगी, लेकिन उतना ही चिंताजनक यूएपीए की धारा 13 का एक समानांतर प्रावधान है।

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Retired Supreme Court judge MB Lokur says provision of UAPA more dangerous than sedition news in Hindi
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एमबी लोकुर - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एमबी लोकुर ने शनिवार को कहा कि देशद्रोह को लेकर शीर्ष अदालत की ओर से 11 मई को जारी आदेश महत्वपूर्ण है। हालांकि, उन्होंने गैरकानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम (यूएपीए) के एक प्रावधान के दुरुपयोग को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि इस प्रावधान का बना रहना यह एक फ्राई पैन से आग में कूदने जैसा ही होगा। 

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'देशद्रोह से आजादी' नामक एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकुर ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से पारित उस अंतरिम आदेश का मतलब जानना चाहा जिसमें औपनिवेशिक काल के देशद्रोह कानून पर उचित परीक्षण होने तक रोक लगा दी गई है। इसके अलावा केंद्र और राज्यों को इस कानून के तहत कोई नई एफआईआर दर्ज न करने का निर्देश दिया गया है। 
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यूएपीए की धारा 13 के प्रावधान पर उठाए सवाल
लोकुर ने कहा, 'मैं नहीं जानता की सरकार देशद्रोह के प्रावधान को लेकर क्या करेगी लेकिन मेरा विचार है कि सरकार इसे खत्म कर देगी। लेकिन उतना ही चिंताजनक यूएपीए की धारा 13 का एक समानांतर प्रावधान है। देशद्रोह में असंतुष्टि सरकार के खिलाफ होती है लेकिन यूएपीए के प्रावधान में यह भारत के खिलाफ असंतुष्टि है, यह इनमें एकमात्र अंतर है। '
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उन्होंने कहा कि देशद्रोह में ऐसे कई अपवाद हैं जहां इसके आरोप लगाए नहीं जा सकते लेकिन यूएपीए की धारा 13 के तहत कोई अपवाद नहीं हैं। अगर यह प्रावधान बना रहता है तो यह एक फ्राई पैन से आग में कूदने जैसा होगा। पूर्व न्यायाधीश ने आगे कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि राज्य असंतोष के बारे में क्या सोचेगा क्योंकि यूएपीए के तहत जमानत मिलना कठिन है।


पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि अपने सुप्रीम कोर्ट ने देशद्रोह के मामलों में चल रही जांच और लंबित मुकदमों व कार्यवाहियों पर पूरे देश में रोक लगा दी है। उन्होंने कहा कि देश भर में लंबित मुकदमों और देशद्रोह कानून के तहत सभी कार्यवाहियों पर यह यथास्थिति हानिकारक हिस्सा है। अगर किसी के खिलाफ गलत मामला दर्ज है तो उसे और इंतजार करना होगा।

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