बंदिशों ने बेटियों को बनाया ज्यादा आक्रामक और ताकतवर, शोध में हुआ खुलासा
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पहले कभी रहा होगा कि लड़कियां सबकुछ सहन कर जाती होंगी। उन्हें गुस्सा भी कम आता होगा या वे रिएक्ट कम करती होंगी लेकिन अब ऐसा नहीं है। उनका धैर्य अब लड़कों से पहले टूट रहा है। टीन एज लड़कियां अपने हमउम्र लड़कों से ज्यादा आक्रामक होती हैं। बरेली कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग द्वारा बरेली इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं पर किए गए अध्ययन से ये खुलासा हुआ है।
बरेली कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग की प्रभारी डॉ. सुविधा शर्मा के निर्देशन में यह अध्ययन किया गया। इसमें बरेली इंटर कॉलेज के 15 छात्र और 15 छात्राओं से प्रश्नों की पूछताछ कर उनमें आक्रामकता के स्तर की जांच की गई। जेंडर के हिसाब से लड़कों और लड़कियों की आक्रामकता में कोई अंतर नहीं होता, लेकिन परिवेश, पारिवारिक माहौल, शिक्षा और रहन-सहन का स्तर आदि से यह प्रभावित होता है।
इस तथ्य से अध्ययन की शुरुआत हुई। अध्ययन में लड़कियों में लड़कों की अपेक्षा 20 फीसदी आक्रामकता ज्यादा पाई गई। डॉ. सुविधा शर्मा ने बताया कि जिन परिवारों में लड़कियों पर ज्यादा बंदिशें लगाई जाती हैं या फिर जिन पर ज्यादा दबाव रहता है, अभिभावक जिनसे सामान्य से ज्यादा पूछताछ करते हैं, उन्हें घर से ज्यादा बाहर जाने की आजादी नहीं होती है, ऐसी लड़कियों में आक्रामकता बढ़ जाती है।
पहले भी हुए हैं ऐसे अध्ययन
‘लड़के-लड़कियों में आक्रामकता की तुलना और लिंग विशेष के प्रभाव’ जैसे विषय पर अध्ययन 2005 में स्विटरलैंड में हुआ था। किशोर सुधार केंद्र में आक्रामकता को लेकर हुए इस अध्ययन में लड़कों की अपेक्षा लड़कियों का व्यवहार अधिक आक्रामक पाया गया।
वहीं चंडीगढ़ में 1500 किशोर-किशोरियों पर हुए अध्ययन के नतीजे उलट निकले। यह अध्ययन को-एडवांस पेडेरिक सेक्टर एंड पोस्ट ग्रेजुएट सेंटर ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च चंडीगढ़ में हुआ। इसमें किशोरों में आक्रामकता ज्यादा निकली थी क्योंकि इनके रहन-सहन में सामान्य से अंतर था।