#CoronaPositive: कोरोना को हराने के लिए संसाधन सीमित...पर हौसले बुलंद
- पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई), वेंटिलेटर, अस्पताल, टेस्टिंग किट, स्टाफ की कमी
- कोरोना को सामुदायिक फैलाव से दूर रखना सबसे बड़ी चुनौती है...
- मौजूद : 8500 वेंटिलेटर सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए दिया गया है
विस्तार
सीमित संसाधानों की मार झेल रहे स्वास्थ्य तंत्र के सामने कोरोना महामारी ने बड़ा संकट खडा कर दिया है। पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई), वेंटिलेटर, अस्पताल, टेस्टिंग किट, स्टाफ की कमी के साथ ही कोरोना को सामुदायिक फैलाव से दूर रखना सबसे बड़ी चुनौती है। अब तक इसमें काफी हद तक कामयाबी हासिल हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निगरानी में गठित अलग-अलग समितियां रात-दिन करोड़ों जिंदगियों को बचाने में जुटी हैं।
टास्क फोर्स के एक सदस्य ने बताया कि करीब 50 हजार वेंटिलेटर खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके अलावा हर महीने 5 हजार वेंटिलेटर भारत में ही तैयार करने की योजना बनाई है। कोरोना महामारी में भी पिछले महीने 2700 वेंटिलेटर भारत में बनाए गए थे। फिलहाल दो तरह के वेंटिलेटर तैयार किए जा रहे हैं। निर्माता कंपनियों के पास इसे बनाने में रॉ मैटेरियल की कमी है जिसे पूरा करने के लिए विशेष कार्गो को भेजा जा रहा है। चीन से इलेक्ट्रिक सामान और यूरोप से बाकी सामान लाया जाएगा।
जल्द मिलेंगे 50 हजार वेंटिलेटर, एक करोड़ पीपीई...
कोरोना संक्रमण से निपटने में वेंटिलेटर, पीपीई समेत अन्य उपकरणों की खासी जरूरत होती है। जल्द ही 50 हजार वेंटिलेटर, 1 करोड़ पीपीई, 20 लाख से ज्यादा सर्जिकल मास्क उपलब्ध हो सकेंगे। इनमें से 10 हजार वेंटिलेटर और 1 करोड़ पीपीई अगले दो सप्ताह तक अस्पतालों तक पहुंच जाएंगे। इसके अलावा देश भर में कोविड अस्पताल तैयार हो रहे हैं। बिस्तरों की कमी को दूर करने के लिए रेलवे 20 हजार कोच तैयार कर रहा है जिसमें 3.20 लाख मरीजों को भर्ती करने की क्षमता होगी। इसके अलावा दिल्ली सहित कई मेट्रो शहरों में खेल स्टेडियम भी बैकअप के लिए रखे गए हैं।
स्वदेशी वैज्ञानिकों की टेस्टिंग किट भरोसेमंद
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फरवरी से लेकर अब तक काफी संख्या में टेस्टिंग किट बनाने के लिए मेडिकल कंपनियों से प्रस्ताव मिले हैं। इनमें से कुछ को मंजूरी भी दी जा चुकी है।
रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए सिस्टम को काफी आसान भी बनाया है। यही वजह है कि आज भारत के पास दुनिया के अन्य देशों की तुलना में 50% से भी ज्यादा सस्ती किट उपलब्ध हैं। इनसे प्रति सप्ताह डेढ़ लाख सैंपल की जांच की जा सकती है। 10 लाख किट विश्व स्वास्थ्य संगठन की मदद से मंगाई जा रही हैं। हालांकि अभी देश की विभिन्न प्रयोगशालाओं में 30 से 40 फीसदी क्षमता का ही इस्तेमाल हो रहा है।
मल्टीपेशेंट वेंटिलेटर बनाने शुरु...
डीआरडीओ ने मल्टीपेशेंट वेंटिलेटर बनाना शुरू कर दिया है। 7-8 दिन में उत्पादन शुरू हो जाएगा। 30 हजार वेंटिलेटर बनाने में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड मदद कर रहा है। विज्ञान एवं तकनीकी विभाग ने भी पुणे की एक कंपनी को महाराष्ट्र के लिए एक हजार निगेटिव आयन जेनेरेटर्स बनाने का काम सौंपा है। नेगेटिव आयन जेनेरेटर्स वायरल लोड को कम करने के काम आते हैं।
अगर तीसरी स्टेज में पहुंचे...तो 40 लाख वेंटिलेटरों की जरूरत
अनुमान के अनुसार देश में अगर कोरोना वायरस का दायरा बढ़ता है तो हर दिन 4 से 5 लाख पीपीई किट की जरूरत पड़ सकती है। भारत की आबादी व संक्रमण के फैलाव को देखते हुए अगर तीसरी स्टेज में हम बढ़ते हैं तो मौजूद वेंटिलेटरों से 100 गुना ज्यादा यानि करीब 40 लाख वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है।
चीन, सिंगापुर, द. कोरिया से आयात होंगे उपकरण
स्वास्थ्य कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने गठित समिति का अनुमान है कि भारत में फिलहाल 10 लाख प्रोटेक्शन सूट, 40 लाख एन-95 मास्क, 20 लाख ग्लब्स, 6 लाख फेस शील्ड और 20 लाख सर्जिकल मास्क की जरूरत है। मांग को पूरा करने के लिए चीन, सिंगापुर और साउथ कोरिया से भी आयात करेंगे। सरकार के अधीन एचएलएल कंपनी ने पीपीई खरीद प्रक्रिया के लिए टेंडर निकाले हैं।
देश में कुल वेंटिलेटर...
- सरकारी अस्पताल - 8432
- निजी अस्पताल- 31,500
- वेंटिलेटर : 243 पीपीई किट्स : 3261
- सर्जिकल मास्क : 4,63,450 एन-95
- मास्क: 20,566 सैनिटाइजर : 22,366