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West Bengal: नए आपराधिक कानूनों को लेकर पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रस्ताव पेश, भाजपा ने TMC पर लगाया आरोप

Wed, 31 Jul 2024 08:53 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Wed, 31 Jul 2024 08:53 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल विधानसभा में आज एक प्रस्ताव पेश किया गया, जिसके तहत हाल ही में लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों की समीक्षा की जाएगी। पश्चिम बंगाल के कानून मंत्री मलय घटक और अन्य की तरफ से पेश किए गए एक प्रस्ताव में नए कानूनों की समीक्षा की मांग की गई।

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Resolution moved in Bengal Assembly seeking review of new criminal laws
नए आपराधिक कानूनों को लेकर पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रस्ताव पेश - फोटो : www.wbassembly.gov.in

विस्तार

पश्चिम बंगाल विधानसभा में सत्ताधारी दल और राज्य के कानून मंत्री की विधानसभा के नियम 169 के तहत पेश किए गए प्रस्ताव का विरोध करते हुए भाजपा सदस्यों ने कहा कि नए कानून समाज के कई वर्गों में उचित विचार-विमर्श के बाद लागू किए गए हैं और टीएमसी सदस्यों ने इसे राजनीतिक मकसद से पेश किया है।
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नए कानूनों की समीक्षा करने का आग्रह
इस प्रस्ताव में पश्चिम बंगाल सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार से सुशासन के हित में न्यायविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों के आम सहमति वाले विचारों को विकसित करने और मौलिक अधिकारों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की रक्षा करने के लिए नए कानूनों की समीक्षा करने का आग्रह किया गया।
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जुलाई महीने से देश में लागू हो गए तीन नए कानून
बता दें कि तीन नए आपराधिक कानून - भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम एक जुलाई से देश भर में लागू हो गए हैं, जो क्रमशः भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेंगे।
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टीएमसी ने नए कानूनों को बताया जनविरोधी
वहीं सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए कानून मंत्री मलल घटक ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य के कई न्यायविदों की तरफ से तीनों नए कानूनों की विस्तृत जांच में पाया गया है कि इनमें से कई प्रावधान पुराने तीन कानूनों के मूल प्रावधानों की तुलना में बहुत अधिक कठोर और जनविरोधी हैं। उन्होंने कहा कि तीनों विधेयक पिछले साल 20 दिसंबर को लोकसभा में 147 सांसदों को संसद से निलंबित किए जाने के बाद और अगले दिन राज्यसभा में बिना पर्याप्त चर्चा के पारित किए गए थे।

भाजपा के मुख्य सचेतक ने प्रस्ताव का किया विरोध
इस दौरान विधानसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक शंकर घोष ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि इसे राजनीतिक मकसद से पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि संसद में विधेयक पारित होने से पहले कई राज्यों, उच्च न्यायालयों, न्यायिक अकादमियों, विधि विश्वविद्यालयों और सांसदों और विधायकों के अलावा कुछ आम लोगों की तरफ से नए विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा की गई थी। शंकर घोष ने कहा कि भारतीय दंड संहिता और सीआरपीसी को ब्रिटिश शासकों ने भारतीयों को दंडित करने के लिए बनाया था और केंद्र की भाजपा सरकार नए कानूनों के जरिए देश के लोगों को न्याय देना चाहती है।


वहीं भाजपा विधायक के दावों का जवाब देते हुए स्पीकर बिमान बनर्जी ने कहा कि पिछला प्रस्ताव उन विधेयकों के संबंध में था जिन्हें संसद में पारित होना बाकी है और वर्तमान प्रस्ताव नए कानूनों के बारे में है। स्पीकर ने कहा कि प्रस्ताव पर चर्चा गुरुवार को जारी रहेगी।
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