रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट: बैंक धोखाधड़ी बढ़ी, आकस्मिक कोष में बचे 1.96 लाख करोड़ रुपये
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने साल 2019 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी कर दी है। आरबीआई की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में चलन में मौजूद मुद्रा का फीसद बढ़कर 21.10 लाख करोड़ पर पहुंच गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि घरेलू मांग घटने से आर्थिक गतिविधियां सुस्त हो गई हैं, इसे पटरी पर लाने के लिए निजी निवेश बढ़ाने की जरूरत है।
71 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की बैंक धोखाधड़ी, 6801 मामले सामने आए
आरबीआई की इस रिपोर्ट में आईएल एंड एफएस संकट के बारे में कहा गया है कि इसके बाद एनबीएफसी से वाणिज्यिक क्षेत्र को ऋण प्रवाह (लोन फ्लो) 20 फीसदी तक घट गया है। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार साल 2018-19 में बैंकों में धोखाधड़ी के 6,801 मामले सामने आए, इनमें 71,542.93 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई।
कृषि ऋण माफी जैसी योजनाओं से घटी राज्यों की वित्तीय प्रोत्साहन की क्षमता
रिपोर्ट में आरबीआई ने कहा है कि अधिशेष कोष से सरकार को 52367 करोड़ रुपये देने के बाद आरबीआई के आकस्मिक कोष में 1,96,344 करोड़ रुपये की राशि बची है। इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि कृषि ऋण माफी, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के क्रियान्वयन, आय समर्थन योजनाओं के चलते राज्यों की वित्तीय प्रोत्साहन की क्षमता घटी है।
बता दें कि रिजर्व बैंक ने इसी महीने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अपने अनुमान को घटाकर 6.9 प्रतिशत किया है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि अर्थव्यवस्था के समक्ष इस समय जो बड़ा सवाल हैं: वह यह कि क्या हम अस्थाई नरमी में है या यह चक्रीय गिरावट है अथवा इस सुस्ती के पीछे संरचनात्मक मुद्दे बड़ी वजह हैं?
केंद्रीय बैंक ने कहा कि नरमी का यह दौर एक गहरी संरचनात्मक सुस्ती के बजाय चक्रीय गिरावट का हो सकता है। रिजर्व बैंक ने वर्ष 2019 में महत्वपूर्ण नीतिगत दर रेपो में 1.10 प्रतिशत की कटौती की है। लगातार चार बार की गई कटौती के बाद रेपो दर 5.4 प्रतिशत पर नौ साल के निचले स्तर पर आ गई है।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि अब सभी के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता उपभोग में सुधार और निजी निवेश में बढ़ोतरी की है। रिजर्व बैंक ने कहा कि बैंकिंग और गैर- बैंकिंग क्षेत्रों को मजबूत कर, बुनियादी ढांचा खर्च में बड़ी वृद्धि और श्रम कानून, कराधान और अन्य कानूनी सुधारों के क्रियान्वयन के जरिये इसे हासिल किया जा सकता है। रिजर्व बैंक ने कहा कि कुल मांग उम्मीद से अधिक कमजोर पड़ी है। घरेलू मांग में सुस्ती से अर्थव्यवस्था में ‘जोश’ का अभाव है।
बीते साल बैंकों का एनपीए घटकर 9.1 प्रतिशत रहा
बैंकों के फंसे कर्ज के बारे में जल्द पता चलने और उसका जल्द समाधान होने से वित्त वर्ष 2018- 19 में बैंकों की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां उनके कुल कर्ज का 9.1 प्रतिशत पर नियंत्रित करने में मदद मिली है जो साल भर पहले 11.2 प्रतिशत के स्तर पर थी। रिजर्व बैंक ने सालाना रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। गैर-निष्पादित ऋण में ताजा वृद्धि का स्तर भी कम होने से इस तरह के कर्ज के लिए बैंकिंग तंत्र में होने वाला प्रावधान का अनुपात समीक्षाधीन अवधि के दौरान 60.9 प्रतिशत तक बढ़ गया।
रिजर्व बैंक की बृहस्पतिवार को जारी 2018- 19 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि समस्या का जल्द पता चलने, उसको दुरुस्त करने और उसका समाधान करने के परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2018- 19 में सकल एनपीए अनुपात घटकर 9.1 प्रतिशत रह गया है जो वित्तवर्ष 2017- 18 में 11.2 प्रतिशत था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरुआती कठिनाइयों के बाद दिवाला और रिण शोधन अक्षमता संहिता पूरा माहौल बदलने वाला कदम साबित हो रही है। इसमें कहा गया है, ‘‘पुराने फंसे कर्ज की प्राप्तियों में सुधार आ रहा है और इसके परिणामस्वरूप, संभावित निवेश चक्र में जो स्थिरता बनी हुई थी उसमें सुगमता आने लगी है।