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ICMR: आईसीएमआर प्रयोगशाला का शोधार्थी भी कर सकेंगे उपयोग, परिषद ने जारी किया मसौदा
Fri, 12 May 2023 05:32 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Fri, 12 May 2023 05:32 AM IST
सार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में घोषणा की थी कि सरकार के पास मौजूद अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल निजी क्षेत्र के लिए भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें आईसीएमआर की प्रयोगशालाएं सबसे अहम हैं।
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ICMR
- फोटो : ANI
विस्तार
जल्द शोध व अनुसंधान के लिए देश की आधुनिक प्रयोगशालाओं का इस्तेमाल स्वतंत्र शोधकर्ता भी कर सकेंगे। बृहस्पतिवार को नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने 18 पेज का मसौदा जारी किया है, जिसमें सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज के अलावा विश्वविद्यालय, अनुसंधान केंद्र, स्टार्टअप और एमएसएमई उद्योग में आईसीएमआर की बीएस-3 स्तर की प्रयोगशालाओं का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में घोषणा की थी कि सरकार के पास मौजूद अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल निजी क्षेत्र के लिए भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें आईसीएमआर की प्रयोगशालाएं सबसे अहम हैं। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा, मसौदा जारी कर संस्थानों, स्वतंत्र शोधकर्ता और स्टार्टअप कंपनियों से आपत्ति व सुझाव मांगे हैं। आगामी एक महीने में यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रयोगशालाओं में यह अपने शोध शुरू कर सकेंगे।
एलोपैथी की तरह, आयुष को वैज्ञानिक पहचान देगा आईसीएमआर
नई दिल्ली। आईसीएमआर ने घोषणा की है कि आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और सिद्ध चिकित्सा पद्धतियों को लेकर कई अहम अध्ययन करेंगे ताकि पारंपरिक चिकित्सा को वैज्ञानिक प्रमाण दिए जा सकें। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल और आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए जल्द ही आयुष चिकित्सा को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की दिशा में कई अहम निर्णय होने के संकेत दिए हैं।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में घोषणा की थी कि सरकार के पास मौजूद अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल निजी क्षेत्र के लिए भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें आईसीएमआर की प्रयोगशालाएं सबसे अहम हैं। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा, मसौदा जारी कर संस्थानों, स्वतंत्र शोधकर्ता और स्टार्टअप कंपनियों से आपत्ति व सुझाव मांगे हैं। आगामी एक महीने में यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रयोगशालाओं में यह अपने शोध शुरू कर सकेंगे।
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एलोपैथी की तरह, आयुष को वैज्ञानिक पहचान देगा आईसीएमआर
नई दिल्ली। आईसीएमआर ने घोषणा की है कि आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और सिद्ध चिकित्सा पद्धतियों को लेकर कई अहम अध्ययन करेंगे ताकि पारंपरिक चिकित्सा को वैज्ञानिक प्रमाण दिए जा सकें। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल और आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए जल्द ही आयुष चिकित्सा को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की दिशा में कई अहम निर्णय होने के संकेत दिए हैं।
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