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Research: दुनियाभर में 10 करोड़ हेक्टेयर से ज्यादा खेत खाली, भर सकते हैं करोड़ों पेट, अध्ययन में खुलासा
Thu, 12 Oct 2023 06:25 AM IST
यशोधन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Thu, 12 Oct 2023 06:25 AM IST
सार
तमाम परिस्थितियों का अध्ययन करने के बाद शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि इस नजरअंदाज कर दी गई जमीन को कृषि योग्य बनाया जाए तो वह जलवायु परिवर्तन व भोजन की कमी के दोहरे वैश्विक संकट से निपटने में मदद मिल सकती है।
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प्राकृतिक खेती करेंगे किसान
- फोटो : Social Media
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विस्तार
वैश्विक स्तर 1992 से 2020 के बीच कुल 10.1 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि को बगैर खेती के ही छोड़ दिया गया, जो आकार में 1992 की कुल कृषि भूमि के करीब सात फीसदी के बराबर है। यदि इन पर खेती की जाए तो करोड़ों लोगों को अन्न उपलब्ध हो सकता है।
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इस संबंध में नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया, जिसके नतीजे प्रतिष्ठित जर्नल नेचर कम्युनिकेशन्स में प्रकाशित हुए हैं।
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दरअसल, कभी-कभी मिट्टी में पोषक तत्वों को बहाल करने के लिए कृषि भूमि को परती छोड़ दिया जाता है, लेकिन यहां स्थिति अलग है। वैश्विक स्तर पर हर साल औसतन 36 लाख हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि को खाली छोड़ दिया जाता है। धीरे-धीरे इस जमीन की गुणवत्ता में कमी आने लगती है।
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82.8 करोड़ लोगों को पर्याप्त भोजन नहीं
आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में दुनिया में करीब 82.8 करोड़ लोगों के लिए पर्याप्त भोजन की व्यवस्था नहीं है। इनका पेट भरने के लिए अगले तीन दशकों में करीब 22.6 करोड़ हेक्टेयर तक कृषि भूमि में वृद्धि की जरूरत है, जो पर्यावरण और जैवविविधता पर गंभीर असर डालेगी। कृषि क्षेत्र में बढ़ता उत्सर्जन भी एक बड़ी समस्या बन चुका है।
इन तमाम परिस्थितियों का अध्ययन करने के बाद शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि इस नजरअंदाज कर दी गई जमीन को कृषि योग्य बनाया जाए तो वह जलवायु परिवर्तन व भोजन की कमी के दोहरे वैश्विक संकट से निपटने में मदद मिल सकती है।
47 करोड़ लोगों का भरा जा सकता है पेट
वैज्ञानिकों ने इस कृषि भूमि को छोड़े जाने के लिए जमीन की गुणवत्ता में आ रही गिरावट, सामाजिक बदलाव, आपदा, संघर्ष और शहरीकरण जैसे कारकों को जिम्मेदार माना है।
हालांकि, शोध अध्ययन में यह भी सामने आया है कि इस छोड़ी गई फसल भूमि में से 6.1 करोड़ हेक्टेयर जमीन को खेती के लिए पुनः उपयोग किया जा सकता है, जिससे प्रतिवर्ष 47.6 करोड़ लोगों का पेट भर सकता है।