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Republic Day: भारतीय सेना में कैसे बदलीं यूनिफॉर्म और राइफलें, गणतंत्र दिवस परेड में होगा प्रदर्शन
Wed, 26 Jan 2022 09:57 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 26 Jan 2022 09:57 AM IST
सार
मेजर कक्कड़ ने बताया कि 2022 के गणतंत्र दिवस में भारतीय सेना के कुल छह दस्ते नजर आएंगे। हर दस्ते में पारंपरिक 144 सैनिकों के बजाय 96 सैनिकों को जगह दी गई है, ताकि कोरोनावायरस के प्रोटोकॉल्स का भी पालन किया जा सके।
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भारतीय सेना के दस्तों में इस बार होगा कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन।
- फोटो : Social Media
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विस्तार
गणतंत्र दिवस में परेड के लिए अलग-अलग राज्यों और मंत्रालयों के साथ भारतीय सेना के तीनों अंगों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। बताया गया है कि भारतीय थलसेना (इंडियन आर्मी) इस साल अपनी परेड में जवानों की यूनिफॉर्म और राइफलों में समय के साथ हुए बदलावों को पेश करेगी। मेजर जनरल आलोक कक्कड़ ने इस बात की जानकारी दी है।
भारतीय सेना के तीन दस्ते पिछले दशकों की यूनिफॉर्म पहने और राइफलें उठाए मार्च करते नजर आएंगे। उधर एक दस्ता आजादी के अमृत महोत्सव का हिस्सा बने इस गणतंत्र दिवस पर भारतीय सेना की नई कॉम्बैट यूनिफॉर्म का प्रदर्शन करेगा। इस टुकड़ी के पास आधुनिक टैवोर राइफल्स भी दिखेंगी।
मेजर कक्कड़ ने बताया कि 2022 के गणतंत्र दिवस में भारतीय सेना के कुल छह दस्ते नजर आएंगे। हर दस्ते में पारंपरिक 144 सैनिकों के बजाय 96 सैनिकों को जगह दी गई है, ताकि कोरोनावायरस के प्रोटोकॉल्स का भी पालन किया जा सके।
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इस तरह होगा दस्तों में यूनिफॉर्म का प्रदर्शन
भारतीय सेना की ओर से मार्च में उतरने वाला पहला दस्ता राजपूत रेजिमेंट के सैनिकों का होगा, जो कि 1950 की यूनिफॉर्म पहने और साथ में .303 बोर की राइफल लिए नजर आएंगे। इसके बाद दूसरा मार्चिंग दस्ता असम रेजिमेंट के सैनिकों का होगा और यह दस्ता 1960 के दशक की यूनिफॉर्म के साथ .303 बोर की राइफल लिए दिखेगा।
उन्होंने बताया कि सेना की 1970 के दशक की वर्दी जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट के सैनिकों द्वारा पहनी जाएगी, जो तीसरी मार्चिंग टुकड़ी का गठन करेंगे और वे 7.62 मिमी सेल्फ-लोडिंग राइफलें (एसएलआर) लेकर कदमताल करेंगे।
उन्होंने कहा कि चौथी और पांचवीं मार्चिंग टुकड़ी क्रमशः सिख लाइट इन्फैंट्री और आर्मी ऑर्डनेंस कोर रेजिमेंट की होगी। उन्होंने कहा कि ये सैनिक सेना की वर्तमान वर्दी पहनेंगे और 5.56 मिमी इंसास राइफल लेकर मार्च करेंगे। उन्होंने कहा कि छठा दल पैराशूट रेजिमेंट के सैनिकों का होगा जो नई लड़ाकू वर्दी पहनेंगे, जिसका अनावरण इस महीने की शुरुआत में किया गया था, और उनके पास टेवोर राइफलें होंगी।
गणतंत्र दिवस पर कुल कितने मार्चिंग दल होंगे?
मेजर कक्कड़ ने बताया कि कुल 14 मार्चिंग दल होंगे- सेना के छह, नौसेना का एक, वायु सेना का एक, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के चार, राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के दो, दिल्ली पुलिस का एक और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) से एक।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की झांकी में दर्शायी जाएगी लोक अदालत
उधर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की झांकी 26 जनवरी को यहां राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार शामिल होगी। झांकी में लोक अदालत को दर्शाया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि कानून मंत्रालय की झांकी का विषय 'एक मुट्ठी आसमान (समावेशी कानूनी प्रणाली): लोक अदालत' है। उन्होंने कहा कि झांकी के सामने के हिस्से में 'न्याय सबके लिए' के साथ हाथ का एक भाव दिखाया गया है, जो निडरता, गारंटी और सुरक्षा का प्रतीक है।
झांकी के पिछले हिस्से में एक हाथ को एक-एक करके अपनी पांच अंगुलियों को खोलते हुए देखा जा सकता है, जिसमें लोक अदालतों के पांच मार्गदर्शक सिद्धांतों - सभी के लिए सुलभ, निश्चित, किफायती, न्यायसंगत और समय पर न्याय- को दर्शाया गया है।
अबाइड विद मी के मुकाबले बेहतर भारतीय धुनें उपलब्ध हैं, केंद्र का दावा
केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस बीटिंग रिट्रीट समारोह से महात्मा गांधी के पसंदीदा अंग्रेजी भजन अबाइड विद मी को इसलिए हटाया क्योंकि आजादी के अमृत महोत्सव को देखते हुए ज्यादा बेहतर भारतीय धुनें उपलब्ध हैं। सरकारी सूत्रों ने रविवार को यह दावा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार इस बार ज्यादा से ज्यादा भारतीय धुनें चाहती थी और इसलिए तय किया गया कि इस वर्ष 29 जनवरी के समारोह में सिर्फ भारतीय धुनें ही बजाई जाएंगी। इस वर्ष अबाइड विद मी की जगह देशभक्ति गीत ऐ मेरे वतन के लोगों को शामिल किया गया है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने अबाइड विद मी को हटाने के फैसले पर सरकार की आलोचना की है।
सूत्रों ने कहा कि ऐ मेरे वतन के लोगों देश के लिए जान देने वाले सारे शहीदों को सम्मान देने वाला गीत है और ज्यादा से ज्यादा भारतीय खुद को इससे जुड़ा महसूस करते हैं इसलिए इसे बीटिंग रिट्रीट में शामिल किया गया है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि सैन्य बलों की वीरता और साहस का सम्मान करने के लिए अबाइड विद मी के मुकाबले ऐ मेरे वतन के लोगों ज्यादा सटीक है। उन्होंने यह भी कहा कि औपनिवेशिक काल के धुनों को हटाकर लोगों से ज्यादा जुड़ाव रखने वाले धुनों को शामिल करना एक सतत प्रक्रिया है। अबाइड विद मी भले ही एक लोकप्रिय सैन्य धुन हो लेकिन इसके बोल बहुत कम लोग समझ पाते हैं। समारोह में 44 बिगुलवादक, 16 तुरहीवादक और 75 ड्रमवादक हिस्सा लेंगे।
ये धुनें बजेंगी बीटिंग रिट्रीट में
हे कांचा, चन्ना बिल्लौरी, जय जन्म भूमि, नृत्य सरिता, विजय घोष, केसरिया बन्ना, वीर सियाचिन, हथौड़ी, लड़ाकू, स्वदेशी, अमर चट्टान, गोल्डन एरो और स्वर्ण जयंती। इसके अलावा वीर सैनिक, फैन फेयर बाई बगलर्स, आईएनएस इंडिया, यशस्वी, जय भारती, केरला, सिकी ए मोल, हिंद की सेना, कदम कदम बढ़ाए जा, ड्रमर्स कॉल, ऐ मेरे वतन के लोगों।
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भारतीय सेना के तीन दस्ते पिछले दशकों की यूनिफॉर्म पहने और राइफलें उठाए मार्च करते नजर आएंगे। उधर एक दस्ता आजादी के अमृत महोत्सव का हिस्सा बने इस गणतंत्र दिवस पर भारतीय सेना की नई कॉम्बैट यूनिफॉर्म का प्रदर्शन करेगा। इस टुकड़ी के पास आधुनिक टैवोर राइफल्स भी दिखेंगी।
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मेजर कक्कड़ ने बताया कि 2022 के गणतंत्र दिवस में भारतीय सेना के कुल छह दस्ते नजर आएंगे। हर दस्ते में पारंपरिक 144 सैनिकों के बजाय 96 सैनिकों को जगह दी गई है, ताकि कोरोनावायरस के प्रोटोकॉल्स का भी पालन किया जा सके।
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इस तरह होगा दस्तों में यूनिफॉर्म का प्रदर्शन
भारतीय सेना की ओर से मार्च में उतरने वाला पहला दस्ता राजपूत रेजिमेंट के सैनिकों का होगा, जो कि 1950 की यूनिफॉर्म पहने और साथ में .303 बोर की राइफल लिए नजर आएंगे। इसके बाद दूसरा मार्चिंग दस्ता असम रेजिमेंट के सैनिकों का होगा और यह दस्ता 1960 के दशक की यूनिफॉर्म के साथ .303 बोर की राइफल लिए दिखेगा।
उन्होंने बताया कि सेना की 1970 के दशक की वर्दी जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट के सैनिकों द्वारा पहनी जाएगी, जो तीसरी मार्चिंग टुकड़ी का गठन करेंगे और वे 7.62 मिमी सेल्फ-लोडिंग राइफलें (एसएलआर) लेकर कदमताल करेंगे।
उन्होंने कहा कि चौथी और पांचवीं मार्चिंग टुकड़ी क्रमशः सिख लाइट इन्फैंट्री और आर्मी ऑर्डनेंस कोर रेजिमेंट की होगी। उन्होंने कहा कि ये सैनिक सेना की वर्तमान वर्दी पहनेंगे और 5.56 मिमी इंसास राइफल लेकर मार्च करेंगे। उन्होंने कहा कि छठा दल पैराशूट रेजिमेंट के सैनिकों का होगा जो नई लड़ाकू वर्दी पहनेंगे, जिसका अनावरण इस महीने की शुरुआत में किया गया था, और उनके पास टेवोर राइफलें होंगी।
गणतंत्र दिवस पर कुल कितने मार्चिंग दल होंगे?
मेजर कक्कड़ ने बताया कि कुल 14 मार्चिंग दल होंगे- सेना के छह, नौसेना का एक, वायु सेना का एक, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के चार, राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के दो, दिल्ली पुलिस का एक और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) से एक।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की झांकी में दर्शायी जाएगी लोक अदालत
उधर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की झांकी 26 जनवरी को यहां राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार शामिल होगी। झांकी में लोक अदालत को दर्शाया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि कानून मंत्रालय की झांकी का विषय 'एक मुट्ठी आसमान (समावेशी कानूनी प्रणाली): लोक अदालत' है। उन्होंने कहा कि झांकी के सामने के हिस्से में 'न्याय सबके लिए' के साथ हाथ का एक भाव दिखाया गया है, जो निडरता, गारंटी और सुरक्षा का प्रतीक है।
झांकी के पिछले हिस्से में एक हाथ को एक-एक करके अपनी पांच अंगुलियों को खोलते हुए देखा जा सकता है, जिसमें लोक अदालतों के पांच मार्गदर्शक सिद्धांतों - सभी के लिए सुलभ, निश्चित, किफायती, न्यायसंगत और समय पर न्याय- को दर्शाया गया है।
अबाइड विद मी के मुकाबले बेहतर भारतीय धुनें उपलब्ध हैं, केंद्र का दावा
केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस बीटिंग रिट्रीट समारोह से महात्मा गांधी के पसंदीदा अंग्रेजी भजन अबाइड विद मी को इसलिए हटाया क्योंकि आजादी के अमृत महोत्सव को देखते हुए ज्यादा बेहतर भारतीय धुनें उपलब्ध हैं। सरकारी सूत्रों ने रविवार को यह दावा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार इस बार ज्यादा से ज्यादा भारतीय धुनें चाहती थी और इसलिए तय किया गया कि इस वर्ष 29 जनवरी के समारोह में सिर्फ भारतीय धुनें ही बजाई जाएंगी। इस वर्ष अबाइड विद मी की जगह देशभक्ति गीत ऐ मेरे वतन के लोगों को शामिल किया गया है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने अबाइड विद मी को हटाने के फैसले पर सरकार की आलोचना की है।
सूत्रों ने कहा कि ऐ मेरे वतन के लोगों देश के लिए जान देने वाले सारे शहीदों को सम्मान देने वाला गीत है और ज्यादा से ज्यादा भारतीय खुद को इससे जुड़ा महसूस करते हैं इसलिए इसे बीटिंग रिट्रीट में शामिल किया गया है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि सैन्य बलों की वीरता और साहस का सम्मान करने के लिए अबाइड विद मी के मुकाबले ऐ मेरे वतन के लोगों ज्यादा सटीक है। उन्होंने यह भी कहा कि औपनिवेशिक काल के धुनों को हटाकर लोगों से ज्यादा जुड़ाव रखने वाले धुनों को शामिल करना एक सतत प्रक्रिया है। अबाइड विद मी भले ही एक लोकप्रिय सैन्य धुन हो लेकिन इसके बोल बहुत कम लोग समझ पाते हैं। समारोह में 44 बिगुलवादक, 16 तुरहीवादक और 75 ड्रमवादक हिस्सा लेंगे।
ये धुनें बजेंगी बीटिंग रिट्रीट में
हे कांचा, चन्ना बिल्लौरी, जय जन्म भूमि, नृत्य सरिता, विजय घोष, केसरिया बन्ना, वीर सियाचिन, हथौड़ी, लड़ाकू, स्वदेशी, अमर चट्टान, गोल्डन एरो और स्वर्ण जयंती। इसके अलावा वीर सैनिक, फैन फेयर बाई बगलर्स, आईएनएस इंडिया, यशस्वी, जय भारती, केरला, सिकी ए मोल, हिंद की सेना, कदम कदम बढ़ाए जा, ड्रमर्स कॉल, ऐ मेरे वतन के लोगों।