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कई मौकों पर खरे नहीं उतरे थे राफेल विमान, 2008 में कर दिया था अस्वीकार : रिपोर्ट

Thu, 14 Feb 2019 03:49 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Thu, 14 Feb 2019 03:49 PM IST
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report says Rafale aircraft did not come right on many occasions, rejected in 2008
राफेल

एक ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक दसॉल्ट एविएशन द्वारा निर्मित फाइटर विमान कई मौकों पर खरे नहीं उतरे हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2004 से 2015 के बीच में कई प्रतियोगिताओं में यह विमान तकनीकी और मूल्य मूल्यांकन स्टेज पर विफल साबित हुए हैं। बता दें कि तकनीकी मूल्यांकन समिति (टीईसी) ने पहली बार मई 2008 में राफेल विमान को स्वीकार करने से मना कर दिया था। क्योंकि 9 एयर स्टाफ गुणात्मक आवश्यकताओं (एएसक्यूआर) को पूरा नहीं कर सके थे। इस दौरान 126 फाइटर विमानों को निविदा पर रखा गया था और फ्रांसीसी विमान निर्माता ने इंजीनियरिंग सहायता पैकेज पर डेटा प्रस्तुत नहीं किया था। 

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रिपोर्ट के मुताबिक मूल्यांकन किए गए छह विमानों में से, केवल मिग -35 सभी तकनीकी मानकों को पूरा करता था। जबकि अन्य चार विमान F-18, F-16, ग्रिपेन और यूरोफाइटर में एक या दो सही नहीं थे। तकनीकी प्रबंधक (एयर), या टीएम (एयर), जो वायु अधिग्रहण के तकनीकी पहलुओं की देखरेख करते हैं, ने ASQR के साथ विभिन्न विमानों के गैर-अनुपालन पर सवाल उठाए और टीईसी से इसके मूल्यांकन की समीक्षा करने के लिए कहा। कैग रिपोर्ट के मुताबिक विक्रेताओं से स्पष्टीकरण प्राप्त करने के बाद, मार्च 2009 में समिति ने अपने तकनीकी मूल्यांकन को सही ठहराया और राफेल को दूसरी बार खारिज कर दिया।
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टीएम (एयर) ने विदेशी सैन्य ठेकेदारों द्वारा प्रस्तुत बोलियों की वारंटी पर स्पष्टीकरण मांगा। जिसके बाद विक्रेताओं ने अपने स्पष्टीकरण दिए जाने के बाद, टीईसी ने अपनी रिपोर्ट की समीक्षा की और 25 मार्च, 2009 को तीसरी बार दसॉल्ट की बोली को अस्वीकार करने के अपने फैसले को सही ठहराया।
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यह इस बिंदु पर था कि दसॉल्ट ने अपने विमान में संशोधन करने की पेशकश की, जिसमें से नौ मानकों को पूरा करने में वह विफल रही, और बदलाव करने के लिए एक अतिरिक्त वाणिज्यिक प्रस्ताव प्रस्तुत करने का प्रस्ताव भी रखा। फर्म ने कहा कि राफेल नाटो विनिर्देशों के लिए बनाया गया था और भारतीय वायुसेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए अनुकूलित किया जाना था। 


कैग की रिपोर्ट के अनुसार राफेल विमान गुणात्मक आवश्यकताओं में से तीन को पूरा नहीं कर सके, इसके बाद दसॉल्ट ने पुर्जों के डेटा और इंजीनियरिंग सहायता पैकेज की निर्माता-अनुशंसित सूची की आपूर्ति करने पर सहमति व्यक्त की थी। रिपोर्ट के मुताबिक यह अभी भी आरएफपी में निर्दिष्ट वारंटी और अन्य विकल्पों का अनुपालन नहीं करता है। इसके कारण मंत्रालय ने चौथी बार दसॉल्ट की तकनीकी को अस्वीकार कर दिया। 

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