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चिंताजनक: जलवायु संकट से बच्चों की पढ़ाई और सीखने पर मंडराया खतरा, प्राकृतिक आपदाओं से स्कूलों का नुकसान
Mon, 21 Jul 2025 07:39 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Mon, 21 Jul 2025 07:39 AM IST
सार
रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 20 वर्षों में कम से कम 75 फीसदी जलवायु आपदाओं के दौरान स्कूल बंद हुए और हर बार 50 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए। जलवायु संबंधी तनाव जैसे गर्मी, जंगल की आग, तूफान, बाढ़, सूखा, बीमारियां और समुद्र का बढ़ता स्तर शिक्षा को प्रभावित करते हैं।
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- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
जो बच्चे छोटी उम्र में गर्मी की मार झेलते हैं, वे 1.5 साल तक की पढ़ाई खो सकते हैं। जलवायु परिवर्तन शिक्षा को सीधा नुकसान पहुंचा रहा है और अब तक की शैक्षिक प्रगति को मिटा सकता है। यह खुलासा यूनेस्को की वैश्विक शिक्षा निगरानी टीम, जलवायु संचार व शिक्षा की निगरानी एवं मूल्यांकन परियोजना और कनाडा के सस्केचवान विवि के शोधार्थियों के ताजा अध्ययन में हुआ है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 20 वर्षों में कम से कम 75 फीसदी जलवायु आपदाओं के दौरान स्कूल बंद हुए और हर बार 50 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए। जलवायु संबंधी तनाव जैसे गर्मी, जंगल की आग, तूफान, बाढ़, सूखा, बीमारियां और समुद्र का बढ़ता स्तर शिक्षा को प्रभावित करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन आपदाओं के कारण खासकर गरीब देशों में हर साल स्कूल बंद हो रहे हैं। इससे बच्चों के सीखने का नुकसान और ड्रॉपआउट यानी स्कूल छोड़ने की संभावना बढ़ रही है। 1969 से 2012 तक 29 देशों के आंकड़े बताते हैं कि जन्म से पहले और शुरुआती वर्षों में गर्मी झेलने वाले बच्चों की स्कूली पढ़ाई कम होती है। दक्षिण पूर्व एशिया में यह प्रभाव सबसे ज्यादा देखा गया। रिपोर्ट में कहा गया है, यदि कोई बच्चा बहुत ज्यादा तापमान का शिकार होता है, तो उसकी शिक्षा में 1.5 साल की कमी आ सकती है। अमेरिका में जिनके पास कम आय या माध्यमिक विद्यालय प्रमाणपत्र नहीं है वे लोग 15 फीसदी अधिक खतरे में हैं, क्योंकि उन्हें जलवायु परिवर्तन की वजह से वायु प्रदूषण के इलाकों में रहना होता है। इन इलाके में बच्चे अस्थमा जैसी बीमारियों से अधिक पीड़ित होंते। वे अमेरिकी स्कूल जो सरकारी आपदा राहत फंड पाते हैं, उनमें समाज के कमजोर तबकों के छात्र ज्यादा होते हैं।
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प्राकृतिक आपदाओं से स्कूलों का नुकसान
2013 की जकार्ता बाढ़ के बाद कई स्कूल बंद हुए। शिक्षक और छात्र मारे गए। कुछ को राहत शिविर बना दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि जकार्ता के जिन स्कूलों के पास आपदा प्रबंधन योजना और बाढ़ की आपात स्थितियों से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया थी उन 81 फीसदी स्कूलों ने माना कि इस संकट में ये योजनाएं काफी मददगार रहीं।
अमेरिका में असमानता
अमेरिका में सालाना तापमान औसतन एक डिग्री ज्यादा रहा और स्कूल में एसी नहीं था, तो बच्चों के अंक एक फीसदी तक घटे। अफ्रीकी अमेरिकी और हिस्पैनिक बच्चों पर इसका असर ज्यादा पड़ा, जिससे पांच फीसदी तक की शैक्षिक खाई बनी। लगभग अमेरिका के आधे से अधिक स्कूलों को अपने हीटिंग और कूलिंग सिस्टम को सुधारने की जरूरत है।
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ब्राजील अधिक प्रभावित
ब्राजील के गर्म इलाकों के छात्रों को हर साल सीखने में एक फीसदी तक का नुकसान होता है। हाशिए पर रहने वाले लोग जलवायु संकट से ज्यादा पीड़ित हैं। 2019 में आपदाओं से सबसे अधिक प्रभावित 10 देशों में से आठ गरीब या निम्न मध्यम आय वाले देश थे। बच्चों के लिए उच्च जलवायु जोखिम वाले 33 देशों में से 29 कमजोर देश हैं।