फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Report: 240 crore workers are forced to face the scorching heat

रिपोर्ट: 240 करोड़ मजदूर भीषण गर्मी का सामना करने को मजबूर, 2.3 करोड़ श्रमिक काम के दौरान होते हैं चोटिल

Mon, 06 May 2024 06:11 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 06 May 2024 06:11 AM IST
सार

Report: दुनिया के 71 फीसदी श्रमिक या तो बढ़ते तापमान की वजह से गर्मी की मार झेल रहे हैं या उन्हें अपने काम के दौरान कभी न कभी इसका सामना करना पड़ेगा। 2010 में ऐसे श्रमिक 65.5 फीसदी थे।

विज्ञापन
Report: 240 crore workers are forced to face the scorching heat
महिला मजदूर। - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

जलवायु परिवर्तन के साथ बढ़ते तापमान का असर इतना गहरा गया है कि हर साल काम के दौरान औसतन 240 करोड़ श्रमिक भीषण गर्मी का सामना करने को मजबूर हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की नई रिपोर्ट इंश्योरिंग सेफ्टी एंड हेल्थ एट वर्क इन चेंजिंग क्लाइमेट में यह जानकारी दी गई है। संयुक्त राष्ट्र ने इस रिपोर्ट में दुनियाभर के श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन के पड़ते प्रभावों को उजागर किया है। 

विज्ञापन


दुनिया के 71 फीसदी श्रमिक या तो बढ़ते तापमान की वजह से गर्मी की मार झेल रहे हैं या उन्हें अपने काम के दौरान कभी न कभी इसका सामना करना पड़ेगा। 2010 में ऐसे श्रमिक 65.5 फीसदी थे। इस वृद्धि से साबित होता है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ता तापमान पहले से कहीं ज्यादा मेहनतकश श्रमिकों को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, हर साल भीषण गर्मी से करीब 2.3 करोड़ श्रमिक काम के दौरान चोटिल होते हैं। 18,970 श्रमिकों को जान से हाथ धोना पड़ रहा है। जो इन दुर्घटनाओं से बच जाते हैं उनमे से कई जीवनभर इन चोटों और उसके प्रभावों का दर्द झेलते हैं। कार्यस्थल पर लग रहीं इन चोटों से हर साल करीब 21 लाख विकलांगता समायोजित जीवन वर्षों की क्षति हो रही है, जिसकी भरपाई नामुमकिन है।
विज्ञापन


बढ़ रहीं बीमारियां
काम के दौरान गर्मी का तनाव स्वास्थ्य से जुड़े अन्य खतरों को भी बढ़ा रहा है, इनमें किडनी से जुड़ी बीमारियां प्रमुख हैं। गर्मी के तनाव ने 2.62 करोड़ श्रमिकों को किडनी से जुड़ी बीमारियों का मरीज बना दिया है। इसके अलावा कमजोरी, भटकाव और थकावट भी है। गंभीर मामलों में यह हीटस्ट्रोक का कारण बन जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मजबूत कानून बने
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने रिपोर्ट में सरकारों को जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों से निपटने के लिए अपने कानूनों को सशक्त करने पर जोर देने की बात कही है, ताकि श्रमिकों के हितों की रक्षा की जा सके। कुछ देशों में कानूनी तौर पर  उन श्रमिकों की निगरानी पर जोर दिया जा रहा है जो काम के दौरान अक्सर गर्मी, धूप, वायु प्रदूषण व स्वास्थ्य से जुड़े अन्य खतरों के संपर्क में आते हैं। इसके बावजूद अभी भी देशों में इसको लेकर पर्याप्त कानूनों का आभाव है। जहां कानून हैं भी वहां इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed