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कृषि कानून: मध्यप्रदेश के पंचायत चुनावों में भाजपा को मिल सकता है फायदा, राजस्थान-छत्तीसगढ़ में भी मजबूती की उम्मीद

Fri, 19 Nov 2021 04:53 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Fri, 19 Nov 2021 04:53 PM IST
सार

वरिष्ठ किसान नेता राहुल राज कहते है कि 700 किसानों की शहादत का नतीजा है कि आज ये काले कानून वापस हो रहे हैं। किसान जीत रहा है, घमंड टूट रहा है। पीएम मोदी ने जो तीन कानून वापस लेने की घोषणा की है इसका हम स्वागत करते हैं और सम्मान करते हैं। आगामी संसद सत्र में जब तक ये तीन कानून वापस नहीं होंगे, तब तक आंदोलन जारी रहेगा...

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Repeal farm laws: BJP may get benefit in Madhya Pradesh Panchayat elections
किसान आंदोलन - फोटो : ANI (File Photo)

विस्तार

मोदी सरकार ने प्रकाश पर्व के दिन तीन नए कृषि कानून को वापस लेकर मास्टर स्ट्रोक लगाने की कोशिश की है। माना जा रहा है कि भाजपा को इसका सीधा फायदा उत्तर प्रदेश और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव में तो मिलेगा ही, बल्कि अन्य राज्यों में होने वाले पंचायत चुनावों में भी पार्टी की स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में विपक्ष में बैठी भाजपा को अपनी छवि को सुधारने का मौका मिलेगा। किसान आंदोलन के कारण इन दोनों ही राज्यों में बैकफुट पर रही पार्टी फिर से किसानों के बीच जाकर अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगी।

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मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन का कोई प्रभाव नहीं

दिल्ली की सीमाओं पर साल भर से चल रहे किसान आंदोलन का मिलाजुला असर मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में देखने को मिला। मध्यप्रदेश में भारत बंद, रेल रोको आंदोलन का उतना प्रभाव नहीं रहा। जबकि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में किसानों के आंदोलन का अच्छा खासा प्रभाव देखने को मिला। मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार ऋषि पांडेय ने अमर उजाला से कहा कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी, इसलिए वहां किसान संगठनों के प्रदर्शन को हवा मिल रही थी। लेकिन मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन का कोई प्रभाव नहीं था। कई राज्यों में छोटे मोटे आंदोलन चलते रहे लेकिन पूरे समय मध्यप्रदेश इससे अछूता ही रहा। मध्यप्रदेश में अगर इस आंदोलन का कुछ प्रभाव होता तो खंडवा लोकसभा उपचुनाव समेत अन्य विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों पर इसका सीधा असर देखने को मिलता।  

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वरिष्ठ किसान नेता राहुल राज कहते है कि 700 किसानों की शहादत का नतीजा है कि आज ये काले कानून वापस हो रहे हैं। किसान जीत रहा है, घमंड टूट रहा है। पीएम मोदी ने जो तीन कानून वापस लेने की घोषणा की है इसका हम स्वागत करते हैं और सम्मान करते हैं। आगामी संसद सत्र में जब तक ये तीन कानून वापस नहीं होंगे, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं समर्थन मूल्य पर खरीदी की गारंटी की कानून की मांग अभी भी बनी हुई है।  
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राहुल राज कहते हैं कि अगर केंद्र सरकार ये कानून वापस नहीं लेती, तो मध्यप्रदेश में आगामी दिनों में होने जा रहे पंचायत चुनाव में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ता। नए कानूनों के बाद से ही प्रदेश के सभी गांवों में भाजपा नेताओं और उनकी सरकार का विरोध हो रहा है। लखमीरपुर हिंसा के बाद शहीद किसानों के अस्थि कलश मध्यप्रदेश के सभी जिलों में गए हैं। इस दौरान ये देखने में आया कि लखमीरपुर की घटना से मध्यप्रदेश के किसानों में बहुत रोष है।

राजस्थान और छत्तीसगढ़ में दिखा था असर

राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार संदीप दहिया बताते हैं कि संयुक्त किसान मोर्चा में कई किसान राजस्थान से आते थे। जैसा आंदोलन दिल्ली, यूपी और पंजाब में होता था, उसी तर्ज पर कार्यक्रम राजस्थान के जिलों में भी आयोजित किए जाते थे। अब भविष्य में जो पैटर्न दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में लागू होगा वही प्रदेश में भी देखने को मिलेगा।

दहिया कहते हैं कि राज्य के हनुमानगढ़, गंगानगर, बीकानेर और सीकर, झुंझुनू वाले इलाके कृषि क्षेत्र हैं। प्रदेश के किसानों की नाराजगी राज्य सरकार के प्रति नहीं बल्कि केंद्र सरकार के प्रति ज्यादा है। पहले दिन से प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार किसानों के आंदोलन को समर्थन देती आई है। इसका नतीजा यह रहा कि कुछ जिलों में हुए पंचायत चुनावों में कांग्रेस को जबरदस्त जीत हासिल हुई।



इधर, छत्तीसगढ़ में भी किसान आंदोलन का कोई खास असर देखने को नहीं मिला था, बल्कि किसानों की भाजपा के प्रति नाराजगी ओर बढ़ गई है। पत्रिका अखबार रायपुर के स्थानीय संपादक शिव शर्मा अमर उजाला को बताते है कि, केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों की काट में राज्य की भूपेश बघेल सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर मंडी कानूनों में संशोधन कर दिया था। लेकिन राज्यपाल ने इस बिल पर साइन नहीं किए। इसके बाद से ही भाजपा और कांग्रेस के बीच तनातनी का माहौल है। कांग्रेस सरकार लगातार किसानों को बता रही है कि हम किसानों के भले के लिए मंडी कानूनों में संशोधन लेकर आए थे, लेकिन वह लागू नहीं हो सके। आज प्रदेश के किसान बघेल सरकार के कामकाज और योजनाओं से खुश नजर आ रहे हैं।

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